1 हे यियà¥à¤«à¤¿à¤²à¥à¤¸, मैं ने पहिली पà¥à¤¸à¥â€à¤¤à¤¿à¤•à¤¾ उन सब बातोंके विषय में लिखी, जो यीशॠने आरमà¥à¤ में किया और करता और सिखाता रहा। 2 उस दिन तक जब वह उन पà¥à¤°à¤°à¤¿à¤¤à¥‹à¤‚को जिनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ उस ने चà¥à¤¨à¤¾ या, पवितà¥à¤° आतà¥à¥˜à¤¾ के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ आजà¥à¤žà¤¾ देकर ऊपर उठाया न गया। 3 और उस ने दà¥:ख उठाने के बाद बहà¥à¤¤ से पके पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£à¥‹à¤‚से अपके आप को उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ जीवित दिखाया, और चालीस दिन तक वह उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ दिखाई देता रहा: और परमेशà¥à¤µà¤° के राजà¥à¤¯ की बातें करता रहा। 4 ओर उन से मिलकर उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ आजà¥à¤žà¤¾ दी, कि यरूशलेम को न छोड़ो, परनà¥â€à¤¤à¥ पिता की उस पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤œà¥à¤žà¤¾ के पूरे होने की बाट जाहते रहो, जिस की चरà¥à¤šà¤¾ तà¥à¤® मà¥à¤ से सà¥à¤¨ चà¥à¤•à¥‡ हो। 5 कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि यूहनà¥à¤¨à¤¾ ने तो पानी में बपतिसà¥à¥˜à¤¾ दिया है परनà¥â€à¤¤à¥ योड़े दिनोंके बाद तà¥à¤® पवितà¥à¤°à¤¾à¤¤à¥à¥˜à¤¾ से बपतिसà¥à¥˜à¤¾ पाओगे। 6 सो उनà¥â€à¤¹à¥€à¤‚ ने इकटà¥à¤ े होकर उस से पूछा, कि हे पà¥à¤°à¤à¥, कà¥â€à¤¯à¤¾ तू इसी समय इसà¥â€à¤¤à¥à¤°à¤¾à¤à¤² को राजà¥à¤¯ फेर देगा 7 उस ने उन से कहा; उन समयोंया कालोंको जानना, जिन को पिता ने अपके ही अधिकà¥à¤•à¤¾à¤°à¤¨à¥‡ में रखा है, तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¤¾ काम नहीं। 8 परनà¥â€à¤¤à¥ जब पवितà¥à¤° आतà¥à¥˜à¤¾ तà¥à¤® पर आà¤à¤—ा तब तà¥à¤® सामरà¥à¤¯ पाओगे; और यरूशलेम और सारे यहूदिया और सामरिया में, और पृयà¥â€à¤µà¥€ की छोर तक मेरे गवाह होगे। 9 यह कहकर वह उन के देखते देखते ऊपर उठा लिया गया; और बादल ने उसे उन की आंखोंसे छिपा लिया। 10 और उसके जाते समय जब वे आकाश की ओर ताक रहे थे, तो देखो, दो पà¥à¤°à¥‚ष शà¥à¤µà¥‡à¤¤ वसà¥â€à¤¤à¥à¤° पहिने हà¥à¤ उन के पास आ खड़े हà¥à¤à¥¤ 11 और कहने लगे; हे गलीली पà¥à¤°à¥‚षों, तà¥à¤® कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚खड़े सà¥â€à¤µà¤°à¥à¤— की ओर देख रहे हो यही यीशà¥, जो तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥‡ पास से सà¥â€à¤µà¤°à¥à¤— पर उठा लिया गया है, जिस रीति से तà¥à¤® ने उसे सà¥â€à¤µà¤°à¥à¤— को जाते देखा है उसी रीति से वह फिर आà¤à¤—ा।। 12 तब वे जैतून नाम के पहाड़ से जो यरूशलेम के निकट à¤à¤• सबà¥â€à¤¤ के दिन की दूरी पर है, यरूशलेम को लौटे। 13 और जब वहां पहà¥à¤‚चे तो वे उस अटारी पर गà¤, जहां पतरस और यूहनà¥à¤¨à¤¾ और याकूब और अनà¥â€à¤¦à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤¸ और फिलपà¥â€à¤ªà¥à¤¸ और योमा और बरतà¥à¤²à¤®à¤¾à¤ˆ और मतà¥à¤¤à¥€ और हलफई का पà¥à¤¤à¥à¤° याकूब और शमौन जेलोतेस और याकूब का पà¥à¤¤à¥à¤° यहूदा रहते थे। 14 थे सब कई सà¥â€à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚और यीशॠकी माता मरियम और उसके à¤à¤¾à¤‡à¤¯à¥‹à¤‚के साय à¤à¤• चितà¥à¤¤ होकर पà¥à¤°à¤¾à¤°à¥à¤¯à¤¨à¤¾ में लगे रहे।। 15 और उनà¥â€à¤¹à¥€à¤‚ दिनोंमें पतरस à¤à¤¾à¤‡à¤¯à¥‹à¤‚के बीच में जो à¤à¤• सौ बीस वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के लगà¤à¤— इकटà¥à¤ े थे, खड़ा होकर कहने लगा। 16 हे à¤à¤¾à¤‡à¤¯à¥‹à¤‚, अवशà¥à¤¯ या कि पवितà¥à¤° शासà¥â€à¤¤à¥à¤° का वह लेख पूरा हो, जो पवितà¥à¤° आतà¥à¥˜à¤¾ ने दाऊद के मà¥à¤– से यहूदा के विषय में जो यीशॠके पकड़नेवालोंका अगà¥à¤µà¤¾ या, पहिले से कही यी। 17 कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि वह तो हम में गिना गया, और इस सेवकाई में सहà¤à¤¾à¤—ी हà¥à¤†à¥¤ 18 (उस ने अधरà¥à¤® की कमाई से à¤à¤• खेत मोल लिया; और सिर के बल गिरा, और उसका पेट फट गया, और उस की सब अनà¥â€à¤¤à¤¡à¤¿à¤¯à¤¼à¤¾à¤‚ निकल पड़ी। 19 और इस बात को यरूशलेम के सब रहनेवाले जान गà¤, यहां तक कि उस खेत का नाम उन की à¤à¤¾à¤·à¤¾ में हकलदमा अरà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥â€ लोहू का खेत पड़ गया।) 20 कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि à¤à¤œà¤¨ सहिंता में लिखा है, कि उसका घर उजड़ जाà¤, और उस में कोई न बसे और उसका पद कोई दूसरा ले ले। 21 इसलिथे जितने दिन तक पà¥à¤°à¤à¥ यीशॠहमारे साय आता जाता रहा, अरà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥â€ यूहनà¥à¤¨à¤¾ के बपतिसà¥à¥˜à¤¾ से लेकर उसके हमारे पास से उठाठजाने तक, जो लोग बराबर हमारे साय रहे। 22 उचित है कि उन में से à¤à¤• वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ हमारे साय उसके जी उठने का गवाह हो जाà¤à¥¤ 23 तक उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने दो को खड़ा किया, à¤à¤• यà¥à¤¸à¥à¤« को, जो बर-सबा कहलाता है, जिस का उपनाम यूसतà¥à¤¸ है, दूसरा मतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥à¤¯à¤¾à¤¹ को। 24 और यह कहकर पà¥à¤°à¤¾à¤°à¥à¤¯à¤¨à¤¾ की; कि हे पà¥à¤°à¤à¥, तू जो सब के मन जानता है, यह पà¥à¤°à¤—ट कर कि इन दानोंमें से तू ने किस को चà¥à¤¨à¤¾ है। 25 कि वह इस सेवकाई और पà¥à¤°à¤°à¤¿à¤¤à¤¾à¤ˆ का पद ले जिसे यहूदा छोड़ कर अपके सà¥à¤¯à¤¾à¤¨ को गया। 26 तब उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने उन के बारे में चिटà¥à¤ ियां डालीं, और चिटà¥à¤ ी मतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥à¤¯à¤¾à¤¹ के नाम पर निकली, सो वह उन गà¥à¤¯à¤¾à¤°à¤¹ पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤à¥‹à¤‚के साय गिना गया।।
1 जब पिनà¥â€à¤¤à¥‡à¤•à¥à¤¸ का दिन आया, तो वे सब à¤à¤• जगह इकटà¥à¤ े थे। 2 और à¤à¤•à¤¾à¤à¤• आकाश से बड़ी आंधी की सी सनसनाहट का शबà¥â€à¤¦ हà¥à¤†, और उस से सारा घर जहां वे बैठे थे, गूंज गया। 3 और उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ आग की सी जीà¤à¥‡à¤‚ फटती हà¥à¤ˆ दिखाई दीं; और उन में से हर à¤à¤• पर आ ठहरीं। 4 और वे सब पवितà¥à¤° आतà¥à¥˜à¤¾ से à¤à¤° गà¤, और जिस पà¥à¤°à¤•à¤¾à¤° आतà¥à¥˜à¤¾ ने उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ बोलने की सामरà¥à¤¯ दी, वे अनà¥à¤¯ अनà¥à¤¯ à¤à¤¾à¤·à¤¾ बोलने लगे।। 5 और आकाश के नीचे की हर à¤à¤• जाति में से à¤à¤•à¥à¤¤ यहूदी यरूशलेम में रहते थे। 6 जब वह शबà¥â€à¤¦ हà¥à¤† तो à¤à¥€à¤¡à¤¼ लग गई और लोग घबरा गà¤, कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि हर à¤à¤• को यही सà¥à¤¨à¤¾à¤ˆ देता या, कि थे मेरी ही à¤à¤¾à¤·à¤¾ में बोल रहे हैं। 7 और वे सब चकित और अचमà¥à¤à¤¿à¤¤ होकर कहने लगे; देखो, थे जो बोल रहे हैं कà¥â€à¤¯à¤¾ सब गलीली नहीं 8 तो फिर कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚हम में से हर à¤à¤• अपकà¥à¤•à¥€ अपकà¥à¤•à¥€ जनà¥à¥˜ à¤à¥‚मि की à¤à¤¾à¤·à¤¾ सà¥à¤¨à¤¤à¤¾ है 9 हम जो पारयी और मेदी और à¤à¤²à¤¾à¤®à¥€ लोग और मिसà¥à¤ªà¥à¤¤à¤¾à¤®à¤¿à¤¯à¤¾ और यहूदिया और कपà¥â€à¤ªà¤¦à¥‚किया और पà¥à¤¨à¥â€à¤¤à¥à¤¸ और आसिया। 10 और फà¥à¤°à¥‚गिया और पमफूलिया और मिसर और लिबूआ देश जो कà¥à¤°à¥‡à¤¨à¥‡ के आस पास है, इन सब देशोंके रहनेवाले और रोमी पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¸à¥€, कà¥â€à¤¯à¤¾ यहूदी कà¥â€à¤¯à¤¾ यहूदी मत धारण करनेवाले, कà¥à¤°à¥‡à¤¤à¥€ और अरबी à¤à¥€ हैं। 11 परनà¥â€à¤¤à¥ अपकà¥à¤•à¥€ अपकà¥à¤•à¥€ à¤à¤¾à¤·à¤¾ में उन से परमेशà¥à¤µà¤° के बड़े बड़े कामोंकी चरà¥à¤šà¤¾ सà¥à¤¨à¤¤à¥‡ हैं। 12 और वे सब चकित हà¥à¤, और घबराकर à¤à¤• दूसरे से कहने लगे कि यह कà¥â€à¤¯à¤¾ हà¥à¤† चाहता है 13 परनà¥â€à¤¤à¥ औरोंने ठटà¥à¤ ा करके कहा, कि वे तो नई मदिरा के नशे में हैं।। 14 पतरस उन गà¥à¤¯à¤¾à¤°à¤¹ के साय खड़ा हà¥à¤† और ऊंचे शबà¥â€à¤¦ से कहने लगा, कि हे यहूदियो, और हे यरूशलेम के सब रहनेवालो, यह जान लो और कान लगाकर मेरी बातें सà¥à¤¨à¥‹à¥¤ 15 जैसा तà¥à¤® समठरहे हो, थे नशें में नहीं, कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि अà¤à¥€ तो पहर ही दिन चढ़ा है। 16 परनà¥â€à¤¤à¥ यह वह बात है, जो योà¤à¤² à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯à¤¦à¥à¤µà¤•à¥à¤¤à¤¾ के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ कही गई है। 17 कि परमेशà¥à¤µà¤° कहता है, कि अनà¥â€à¤¤ कि दिनोंमें à¤à¤¸à¤¾ होगा, कि मैं अपना आतà¥à¥˜à¤¾ सब मनà¥à¤·à¥à¤¯à¥‹à¤‚पर उंडेलूंगा और तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥‡ बेटे और तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥€ बेटियां à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯à¤¦à¥à¤µà¤¾à¤£à¥€ करेंगी और तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥‡ जवान दरà¥à¤¶à¤¨ देखेंगे, और तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥‡ पà¥à¤°à¤¿à¤¨à¤ सà¥â€à¤µà¤ªà¥â€à¤¤ देखेंगे। 18 बरन मैं अपके दासोंऔर अपकà¥à¤•à¥€ दासियोंपर à¤à¥€ उन दिनोंमें अपके आतà¥à¥˜à¤¾ में से उंडेलूंगा, और वे à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯à¤¦à¥à¤µà¤¾à¤£à¥€ करेंगे। 19 और मैं ऊपर आकाश में अदà¥à¤à¥à¤¤ काम, और नीचे धरती पर चिनà¥â€à¤¹, अरà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥â€ लोहू, और आग और धूà¤à¤‚ का बादल दिखाऊंगा। 20 पà¥à¤°à¤à¥ के महान और पà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤§ दिन के आने से पहिले सूरà¥à¤¯ अनà¥â€à¤§à¥‡à¤°à¤¾ और चानà¥â€à¤¦ लोहू हो जाà¤à¤—ा। 21 और जो कोई पà¥à¤°à¤à¥ का नाम लेगा, वही उदà¥à¤§à¤¾à¤° पाà¤à¤—ा। 22 हे इसà¥â€à¤¤à¥à¤°à¤¾à¤à¤²à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚, थे बातें सà¥à¤¨à¥‹: कि यीशॠनासरी à¤à¤• मनà¥à¤·à¥à¤¯ या जिस का परमेशà¥à¤µà¤° की ओर से होने का पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£ उन सामरà¥à¤¯ के कामोंऔर आशà¥â€à¤šà¤°à¥à¤¯ के कामोंऔर चिनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚से पà¥à¤°à¤—ट है, जो परमेशà¥à¤µà¤° ने तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥‡ बीच उसके दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ कर दिखलाठजिसे तà¥à¤® आप ही जानते हो। 23 उसी को, जब वह परमेशà¥à¤µà¤° की ठहराई हà¥à¤ˆ मनसा और होनहार के जà¥à¤žà¤¾à¤¨ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° पकड़वाया गया, तो तà¥à¤® ने अधमिरà¥à¤¯à¥‹à¤‚के हाथ से उसे कà¥à¤°à¥‚स पर चढ़वाकर मार डाला। 24 परनà¥â€à¤¤à¥ उसी को परमेशà¥à¤µà¤° ने मृतà¥à¤¯à¥ के बनà¥â€à¤§à¤¨à¥‹à¤‚से छà¥à¤¡à¤¼à¤¾à¤•à¤° जिलाया: कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि यह अनहोना या कि वह उसके वश में रहता। 25 कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि दाऊद उसके विषय में कहता है, कि मैं पà¥à¤°à¤à¥ को सरà¥à¤µà¤¦à¤¾ अपके सामà¥à¤¹à¤¨à¥‡ देखता रहा कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि वह मेरी दिहनी ओर है, ताकि मैं डिग न जाऊं। 26 इसी कारण मेरा मन आननà¥â€à¤¦ हà¥à¤†, और मेरी जीठमगन हà¥à¤ˆ; बरन मेरा शà¥à¤°à¥€à¤° à¤à¥€ आशा में बसा रहेगा। 27 कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि तू मेरे पà¥à¤°à¤¾à¤£à¥‹à¤‚को अधोलोक में न छोड़ेगा; और न अपके पवितà¥à¤° जन को सड़ने ही देगा! 28 तू ने मà¥à¤à¥‡ जीवन का मारà¥à¤— बताया हे; तू मà¥à¤à¥‡ अपके दरà¥à¤¶à¤¨ के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ आननà¥â€à¤¦ से à¤à¤° देगा। 29 हे à¤à¤¾à¤‡à¤¯à¥‹, मैं उस कà¥à¤²à¤ªà¤¤à¤¿ दाऊद के विषय में तà¥à¤® से साहस के साय कह सकता हूं कि वह तो मर गया और गाड़ा à¤à¥€ गया और उस की कबà¥à¤° आज तक हमारे यहां वरà¥à¤¤à¤®à¤¾à¤¨ है। 30 सो à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯à¤¦à¥à¤µà¤•à¥à¤¤à¤¾ होकर और यह जानकर कि परमेशà¥à¤µà¤° ने मà¥à¤ से शपय खाई है, कि परमेशà¥à¤µà¤° ने मà¥à¤ से शपय खाई है, कि मैं तेरे वंश में से à¤à¤• वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को तेरे सिंहासन पर बैठाऊंगा। 31 उस ने होनहार को पहिले ही से देखकर मसीह के जी उठने के विषय में à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯à¤¦à¥à¤µà¤¾à¤£à¥€ की कि न तो उसका पà¥à¤°à¤¾à¤£ अधोलोक में छोड़ा गया, और न उस की देह सड़ने पाई। 32 इसी यीशॠको परमेशà¥à¤µà¤° ने जिलाया, जिस के हम सब गवाह हैं। 33 इस पà¥à¤°à¤•à¤¾à¤° परमेशà¥à¤µà¤° के दिहने हाथ से सरà¥à¤µà¥‹à¤šà¥â€à¤š पद पाकर, और पिता से वह पवितà¥à¤° आतà¥à¥˜à¤¾ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥â€à¤¤ करके जिस की पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤œà¥à¤žà¤¾ की गई यी, उस ने यह उंडेल दिया है जो तà¥à¤® देखते और सनते हो। 34 कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि दाऊद तो सà¥â€à¤µà¤°à¥à¤— पर नहीं चढ़ा; परनà¥â€à¤¤à¥ वह आप कहता है, कि पà¥à¤°à¤à¥ ने मेरे पà¥à¤°à¤à¥ से कहा; 35 मेरे दिहने बैठ, जब तक कि मैं तेरे बैरियोंको तेरे पांवोंतले की चौकी न कर दूं। 36 सो अब इसà¥â€à¤¤à¥à¤°à¤¾à¤à¤² का सारा घराना निशà¥â€à¤šà¤¯ जान ले कि परमेशà¥à¤µà¤° ने उसी यीशॠको जिसे तà¥à¤® ने कà¥à¤°à¥‚स पर चढ़ाया, पà¥à¤°à¤à¥ à¤à¥€ ठहराया और मसीह à¤à¥€à¥¤à¥¤ 37 तब सà¥à¤¨à¤¨à¥‡à¤µà¤¾à¤²à¥‹à¤‚के हà¥à¤°à¥ƒà¤¦à¤¯ छिद गà¤, और वे पतरस और शेष पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤à¥‹à¤‚से पूछने लगे, कि हे à¤à¤¾à¤‡à¤¯à¥‹, हम कà¥â€à¤¯à¤¾ करें 38 पतरस ने उन से कहा, मन फिराओ, और तà¥à¤® में से हर à¤à¤• अपके अपके पापोंकी à¤à¤®à¤¾ के लिथे यीशॠमसीह के नाम से बपतिसà¥à¥˜à¤¾ ले; तो तà¥à¤® पवितà¥à¤° आतà¥à¥˜à¤¾ का दान पाओगे। 39 कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि यह पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤œà¥à¤žà¤¾ तà¥à¤®, और तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥€ सनà¥â€à¤¤à¤¾à¤¨à¥‹à¤‚, और उन सब दूर दूर के लोगोंके लिथे à¤à¥€ है जिनको पà¥à¤°à¤à¥ हमारा परमेशà¥à¤µà¤° अपके पास बà¥à¤²à¤¾à¤à¤—ा। 40 उस ने बहà¥à¤¤ ओर बातोंमें à¤à¥€ गवाही दे देकर समà¤à¤¾à¤¯à¤¾ कि अपके आप को इस टेढ़ी जाति से बचाओ। 41 सो जिनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने उसका वचन गà¥à¤°à¤¹à¤£ किया उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने बपतिसà¥à¥˜à¤¾ लिया; और उसी दिन तीन हजार मनà¥à¤·à¥à¤¯à¥‹à¤‚के लगà¤à¤— उन में मिल गà¤à¥¤ 42 और वे पà¥à¤°à¤°à¤¿à¤¤à¥‹à¤‚से शिà¤à¤¾ पाने, और संगति रखने में और रोटी तोड़ने में और पà¥à¤°à¤¾à¤°à¥à¤¯à¤¨à¤¾ करने में लौलीन रहे।। 43 और सब लोगोंपर à¤à¤¯ छा गया, और बहà¥à¤¤ से अदà¥à¤à¥à¤¤ काम और चिनà¥â€à¤¹ पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤à¥‹à¤‚के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ पà¥à¤°à¤—ट होते थे। 44 और वे सब विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ करनेवाले इकटà¥à¤ े रहते थे, और उन की सब वसà¥â€à¤¤à¥à¤à¤‚ साफे की यी। 45 और वे अपकà¥à¤•à¥€ अपकà¥à¤•à¥€ समà¥à¤ªà¤¤à¥à¤¤à¤¿ और सामान बेच बेचकर जैसी जिस की आवशà¥à¤¯à¤•à¤¤à¤¾ होती यी बांट दिया करते थे। 46 और वे पà¥à¤°à¤¤à¤¿ दिन à¤à¤• मन होकर मनà¥â€à¤¦à¤¿à¤° में इकटà¥à¤ े होते थे, और घर घर रोटी तोड़ते हà¥à¤ आननà¥â€à¤¦ और मन की सीधाई से à¤à¥‹à¤œà¤¨ किया करते थे। 47 और परमेशà¥à¤µà¤° की सà¥â€à¤¤à¥à¤¤à¤¿ करते थे, और सब लोग उन से पà¥à¤°à¤¸à¤¨à¥à¤¨ थे: और जो उदà¥à¤§à¤¾à¤° पाते थे, उनको पà¥à¤°à¤à¥ पà¥à¤°à¤¤à¤¿ दिन उन में मिला देता या।।
1 पतरस और यूहनà¥à¤¨à¤¾ तीसरे पहर पà¥à¤°à¤¾à¤°à¥à¤¯à¤¨à¤¾ के समय मनà¥â€à¤¦à¤¿à¤° में जा रहे थे। 2 और लोग à¤à¤• जनà¥à¥˜ के लंगड़े को ला रहे थे, जिस को वे पà¥à¤°à¤¤à¤¿ दिन मनà¥â€à¤¦à¤¿à¤° के उस दà¥à¤µà¤¾à¤° पर जो सà¥à¤¨à¥â€à¤¦à¤° कहलाता है, बैठा देते थे, कि वह मनà¥â€à¤¦à¤¿à¤° में जानेवालोंसे à¤à¥€à¤– मांगे। 3 जब उस ने पतरस और यूहनà¥à¤¨à¤¾ को मनà¥â€à¤¦à¤¿à¤° में जाते देखा, तो उन से à¤à¥€à¤– मांगी। 4 पतरस ने यूहनà¥à¤¨à¤¾ के साय उस की ओर धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ से देखकर कहा, हमारी ओर देख। 5 सो वह उन से कà¥à¤› पाने की आशा रखते हà¥à¤ उन की ओर ताकने लगा। 6 तब पतरस ने कहा, चानà¥â€à¤¦à¥€ और सोना तो मेरे पास है नहीं; परनà¥â€à¤¤à¥ जो मेरे पास है, वह तà¥à¤à¥‡ देता हूं: यीशॠमसीह नासरी के नाम से चल फिर। 7 और उस ने उसका दिहना हाथ पकड़ के उसे उठाया: और तà¥à¤°à¤¨à¥â€à¤¤ उसके पावोंऔर टखनोंमें बल आ गया। 8 और वह उछलकर खड़ा हो गया, और चलने फिरने लगा और चलता; और कूदता, और परमेशà¥à¤µà¤° की सà¥â€à¤¤à¥à¤¤à¤¿ करता हà¥à¤† उन के साय मनà¥â€à¤¦à¤¿à¤° में गया। 9 सब लोगोंने उसे चलते फिरते और परमेशà¥à¤µà¤° की सà¥â€à¤¤à¥à¤¤à¤¿ करते देखकर। 10 उस को पहचान लिया कि यह वही है, जो मनà¥â€à¤¦à¤¿à¤° के सà¥à¤¨à¥â€à¤¦à¤° फाटक पर बैठकर à¤à¥€à¤– मांगा करता या; और उस घटना से जो उसके साय हà¥à¤ˆ यी; वे बहà¥à¤¤ अचमà¥à¤à¤¿à¤¤ और चकित हà¥à¤à¥¤à¥¤ 11 जब वह पतरस और यूहनà¥à¤¨à¤¾ को पकड़े हà¥à¤ या, तो सब लोग बहà¥à¤¤ अचमà¥à¤à¤¾ करते हà¥à¤ उस ओसारे में जो सà¥à¤²à¥ˆà¤®à¤¾à¤¨ का कहलाता है, उन के पास दौड़े आà¤à¥¤ 12 यह देखकर पतरस ने लोगोंसे कहा; हे इसà¥â€à¤¤à¥à¤°à¤¾à¤à¤²à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚, तà¥à¤® इस मनà¥à¤·à¥à¤¯ पर कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚अचमà¥à¤à¤¾ करते हो, और हमारी ओर कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚इस पà¥à¤°à¤•à¤¾à¤° देख रहे हो, कि मानो हम ही ने अपकà¥à¤•à¥€ सामरà¥à¤¯ या à¤à¤•à¥à¤¤à¤¿ से इसे चलना-फिरता कर दिया। 13 इबà¥à¤°à¤¾à¤¹à¥€à¤® और इसहाक और याकूब के परमेशà¥à¤µà¤°, हमारे बापदादोंके परमेशà¥à¤µà¤° ने अपके सेवक यीशॠकी महिमा की, जिसे तà¥à¤® ने पकड़वा दिया, और जब पीलातà¥à¤¸ ने उसे छोड़ देने का विचार किया, तब तà¥à¤® ने उसके सामà¥à¤¹à¤¨à¥‡ उसका इनà¥â€à¤•à¤¾à¤° किया। 14 तà¥à¤® ने उस पवितà¥à¤° और धरà¥à¤®à¥€ का इनà¥â€à¤•à¤¾à¤° किया, और बिनती की, कि à¤à¤• हतà¥à¤¯à¤¾à¤°à¥‡ को तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥‡ लिथे छोड़ दिया जाà¤à¥¤ 15 और तà¥à¤® ने जीवन के करà¥à¤¤à¥à¤¤à¤¾ को मार डाला, जिसे परमेशà¥à¤µà¤° ने मरे हà¥à¤“ं में से जिलाया; और इस बात के हम गवाह हैं। 16 और उसी के नाम ने, उस विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ जो उसके नाम पर है, इस मनà¥à¤·à¥à¤¯ को जिसे तà¥à¤® देखते हो और जानते à¤à¥€ हो सामरà¥à¤¯ दी है; और निशà¥â€à¤šà¤¯ उसी विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ ने जो उसके दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ है, इस को तà¥à¤® सब के सामà¥à¤¹à¤¨à¥‡ बिलकà¥à¤² à¤à¤²à¤¾ चंगा कर दिया है। 17 और अब हे à¤à¤¾à¤‡à¤¯à¥‹, मैं जानता हूं कि यह काम तà¥à¤® ने अजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¤à¤¾ से किया, और वैसा ही तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥‡ सरदारोंने à¤à¥€ किया। 18 परनà¥â€à¤¤à¥ जिन बातोंको परमेशà¥à¤µà¤° ने सब à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯à¤¦à¥à¤µà¤•à¥à¤¤à¤¾à¤“ं के मà¥à¤– से पहिले ही बताया या, कि उसका मसीह दà¥:ख उठाà¤à¤—ा; उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ उस ने इस रीति से पूरी किया। 19 इसलिथे, मन फिराओ और लौट आओ कि तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥‡ पाप मिटाठजाà¤à¤‚, जिस से पà¥à¤°à¤à¥ के समà¥à¤®à¥à¤– से विशà¥à¤°à¤¨à¥â€à¤¤à¤¿ के दिन आà¤à¤‚। 20 और वह उस मसीह यीशॠको à¤à¥‡à¤œà¥‡ जो तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥‡ लिथे पहिले ही से ठहराया गया है। 21 अवशà¥à¤¯ है कि वह सà¥â€à¤µà¤°à¥à¤— में उस समय तक रहे जब तक कि वह सब बातोंका सà¥à¤§à¤¾à¤° न कर ले जिस की चरà¥à¤šà¤¾ परमेशà¥à¤µà¤° ने अपके पवितà¥à¤° à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯à¤¦à¥à¤µà¤•à¥à¤¤à¤¾à¤“ं के मà¥à¤– से की है, जो जगत की उतà¥â€à¤ªà¤¤à¥à¤¤à¤¿ से होते आठहैं। 22 जैसा कि मूसा ने कहा, पà¥à¤°à¤à¥ परमेशà¥à¤µà¤° तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥‡ à¤à¤¾à¤‡à¤¯à¥‹à¤‚में से तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥‡ लिथे मà¥à¤ सा à¤à¤• à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯à¤¦à¥à¤µà¤•à¥à¤¤à¤¾ उठाà¤à¤—ा, जो कà¥à¤› वह तà¥à¤® से कहे, उस की सà¥à¤¨à¤¨à¤¾à¥¤ 23 परनà¥â€à¤¤à¥ पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¥à¥‡à¤• मनà¥à¤·à¥à¤¯ जो उस à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯à¤¦à¥à¤µà¤•à¥à¤¤à¤¾ की न सà¥à¤¨à¥‡, लोगोंमें से नाश किया जाà¤à¤—ा। 24 और सामà¥à¤à¤² से लेकर उकसे बाद बालोंतक जितने à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯à¤¦à¥à¤µà¤•à¥à¤¤à¤¾à¤“ं ने बात कीहं उन सब ने इन दिनोंका सनà¥â€à¤¦à¥‡à¤¶ दिया है। 25 तà¥à¤® à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯à¤¦à¥à¤µà¤•à¥à¤¤à¤¾à¤“ं की सनà¥â€à¤¤à¤¾à¤¨ और उस वाचा के à¤à¤¾à¤—ी हो, जो परमेशà¥à¤µà¤° ने तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥‡ बापदादोंसे बानà¥â€à¤§à¥€, जब उस ने इबà¥à¤°à¤¾à¤¹à¥€à¤® से कहा, कि तेरे वंश के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ पृयà¥â€à¤µà¥€ के सारे घराने आशीष पाà¤à¤‚गे। 26 परमेशà¥à¤µà¤° ने अपके सेवक को उठाकर पहिल तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥‡ पास à¤à¥‡à¤œà¤¾, कि तà¥à¤® में से हर à¤à¤• की उस की बà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤¯à¥‹à¤‚से फेरकर आशीष दे।।
1 जब वे लोगोंसे यह कह रहे थे, तो याजक और मनà¥â€à¤¦à¤¿à¤° के सरदार और सदूकी उन पर चढ़ आà¤à¤‚। 2 कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि वे बहà¥à¤¤ कà¥à¤°à¥‹à¤§à¤¿à¤¤ हà¥à¤ कि वे लोगोंको सिखाते थे और यीशॠका उदाहरण दे देकर मरे हà¥à¤“ं के जी उठने का पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤° करते थे। 3 और उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ पकड़कर दूसरे दिन तक हवालात में रखा कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि सनà¥â€à¤§à¤¯à¤¾ हो गई यी। 4 परनà¥â€à¤¤à¥ वचन के सà¥à¤¨à¤¨à¥‡à¤µà¤¾à¤²à¥‹à¤‚में से बहà¥à¤¤à¥‹à¤‚ने विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ किया, और उन की गिनती पांच हजार पà¥à¤°à¥‚षोंके लगà¤à¤— हो गई।। 5 दूसरे दिन à¤à¤¸à¤¾ हà¥à¤† कि उन के सरदार और पà¥à¤°à¤¿à¤¨à¤¥à¥‡ और शासà¥à¤¤à¥à¤°à¥€à¥¤ 6 और महाथाजक हनà¥à¤¨à¤¾ और कैफा और यूहनà¥à¤¨à¤¾ और सिकनà¥â€à¤¦à¤° और जितने महाथाजक के घराने के थे, सब यरूशलेम में इकटà¥à¤ े हà¥à¤à¥¤ 7 और उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ बीच में खड़ा करके पूछने लगे, कि तà¥à¤® ने यह काम किस सामरà¥à¤¯ से और किस नाम से किया है 8 तब पतरस ने पवितà¥à¤° आतà¥à¥˜à¤¾ से परिपूरà¥à¤£ होकर उन से कहा। 9 हे लोगोंके सरदारोंऔर पà¥à¤°à¤¿à¤¨à¤¯à¥‹à¤‚, इस रà¥à¤¦à¥à¤¬à¤² मनà¥à¤·à¥à¤¯ के साय जो à¤à¤²à¤¾à¤ˆ की गई है, यदि आज हम से उसके विषय में पूछ पाछ की जाती है, कि वह कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कर अचà¥â€à¤›à¤¾ हà¥à¤†à¥¤ 10 तो तà¥à¤® सब और सारे इसà¥â€à¤¤à¥à¤°à¤¾à¤à¤²à¥€ लोग जान लें कि यीशॠमसीह नासरी के नाम से जिसे तà¥à¤® ने कà¥à¤°à¥‚स पर चढ़ाया, और परमेशà¥à¤µà¤° ने मरे हà¥à¤“ं में से जिलाया, यह मनà¥à¤·à¥à¤¯ तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥‡ सामà¥à¤¹à¤¨à¥‡ à¤à¤²à¤¾ चंगा खड़ा है। 11 यह वही पतà¥à¤¯à¤° है जिसे तà¥à¤® राजमिसà¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ने तà¥à¤šà¥â€à¤› जाता और वह कोने के सिकà¥à¤•à¥‡ का पतà¥à¤¯à¤° हो गया। 12 और किसी दूसरे के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ उदà¥à¤§à¤¾à¤° नहीं; कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि सà¥â€à¤µà¤°à¥à¤— के नीचे मनà¥à¤·à¥à¤¯à¥‹à¤‚में और कोई दूसरा नाम नहीं दिया गया, जिस के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ हम उदà¥à¤§à¤¾à¤° पा सकें।। 13 जब उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने पतरस और यूहनà¥à¤¨à¤¾ का हियाव देखा, ओर यह जाना कि थे अनपढ़ और साधारण मनà¥à¤·à¥à¤¯ हैं, तो अचमà¥à¤à¤¾ किया; फिर उन को पहचाना, कि थे यीशॠके साय रहे हैं। 14 और उस मनà¥à¤·à¥à¤¯ को जो अचà¥â€à¤›à¤¾ हà¥à¤† या, उन के साय खड़े देखकर, वे विरोध में कà¥à¤› न कह सके। 15 परनà¥â€à¤¤à¥ उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ सà¤à¤¾ के बाहर जाने की आजà¥à¤žà¤¾ देकर, वे आपस में विचार करने लगे, 16 कि हम इन मनà¥à¤·à¥à¤¯à¥‹à¤‚के साय कà¥â€à¤¯à¤¾ करें कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि यरूशलेम के सब रहनेवालोंपर पà¥à¤°à¤—ट है, कि इन के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ à¤à¤• पà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤§ चिनà¥â€à¤¹ दिखाया गया है; और हम उसका इनà¥â€à¤•à¤¾à¤° नहंी कर सकते। 17 परनà¥â€à¤¤à¥ इसलिथे कि यह बात लोगोंमें और अधिक फैल न जाà¤, हम उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ धमकाà¤à¤‚, कि वे इस नाम से फिर किसी मनà¥à¤·à¥à¤¯ से बातें न करें। 18 तब उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ बà¥à¤²à¤¾à¤¯à¤¾ और चितौनी देकर यह कहा, कि यीशॠके नाम से कà¥à¤› à¤à¥€ न बोलना और न सिखलाना। 19 परनà¥â€à¤¤à¥ पतरस और यूहनà¥à¤¨à¤¾ ने उन को उतà¥à¤¤à¤° दिया, कि तà¥à¤® ही नà¥à¤¯à¤¾à¤¯ करो, कि कà¥â€à¤¯à¤¾ यह परमेशà¥à¤µà¤° के निकट à¤à¤²à¤¾ है, कि हम परमेशà¥à¤µà¤° की बात से बढ़कर तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥€ बात मानें। 20 कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि यह तो हम में हो नहीं सकता, कि जो हम ने देखा और सà¥à¤¨à¤¾ है, वह न कहें। 21 तब उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने उन को और धमकाकर छोड़ दिया, कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि लोगोंके कारण उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ दणà¥â€à¤¡ देने का कोई दांव नहीं मिला, इसलिथे कि जो घटना हà¥à¤ˆ यी उसके कारण सब लोग परमेशà¥à¤µà¤° की बड़ाई करते थे। 22 कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि वह मनà¥à¤·à¥à¤¯, जिस पर यह चंगा करने का चिनà¥â€à¤¹ दिखाया गया या, चालीस वरà¥à¤· से अधिक आयॠका या। 23 वे छूटकर अपके सायियोंके पास आà¤, और जो कà¥à¤› महाथाजकोंऔर पà¥à¤°à¤¿à¤¨à¤¯à¥‹à¤‚ने उन से कहा या, उनको सà¥à¤¨à¤¾ दिया। 24 यह सà¥à¤¨à¤•à¤°, उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने à¤à¤• चितà¥à¤¤ होकर ऊंचे शबà¥â€à¤¦ से परमेशà¥à¤µà¤° से कहा, हे सà¥â€à¤µà¤¾à¤®à¥€, तू वही है जिस ने सवरà¥à¤— और पृयà¥â€à¤µà¥€ और समà¥à¤¦à¥à¤° और जो कà¥à¤› उन में है बनाया। 25 तू ने पवितà¥à¤° आतà¥à¥˜à¤¾ के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ अपके सेवक हमारे पिता दाऊद के मà¥à¤– से कहा, कि अनà¥à¤¯ जातियोंने हà¥à¤²à¥à¤²à¤¡à¤¼ कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚मचाया और देश के लोगोंने कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚वà¥à¤¯à¤°à¥à¤¯ बातें सोची 26 पà¥à¤°à¤à¥ और उसके मसीह के विरोध में पृयà¥â€à¤µà¥€ के राजा खड़े हà¥à¤, और हाकिम à¤à¤• साय इकटà¥à¤ े हो गà¤à¥¤ 27 कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि सचमà¥à¤š तेरे सेवक यीशॠके विरोध में, जिस तू ने अà¤à¤¿à¤·à¥‡à¤• किया, हेरोदेस और पà¥à¤¨à¥â€à¤¤à¤¿à¤¯à¥à¤¸ पीलातà¥à¤¸ à¤à¥€ अनà¥à¤¯ जातियोंऔर इसà¥â€à¤¤à¥à¤°à¤¾à¤à¤²à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚के साय इस नगर में इकटà¥à¤ े हà¥à¤à¥¤ 28 कि जो कà¥à¤› पहिले से तेरी सामरà¥à¤¯ और मति से ठहरा या वही करें। 29 अब, हे पà¥à¤°à¤à¥, उन की धमकियोंको देख; और अपके दासोंको यह बरदान दे, कि तेरा वचन बड़े हियाव से सà¥à¤¨à¤¾à¤à¤‚। 30 और चंगा करने के लिथे तू अपना हाथ बढ़ा; कि चिनà¥â€à¤¹ और अदà¥à¤à¥à¤¤ काम तेरे पवितà¥à¤° सेवक यीशॠके नाम से किठजाà¤à¤‚। 31 जब वे पà¥à¤°à¤¾à¤°à¥à¤¯à¤¨à¤¾ कर चà¥à¤•à¥‡, तो वह सà¥à¤¯à¤¾à¤¨ जहां वे इकटà¥à¤ े थे हिल गया, और वे सब पवितà¥à¤° आतà¥à¥˜à¤¾ से परिपूरà¥à¤£ हो गà¤, और परमेशà¥à¤µà¤° का वचन हियाव से सà¥à¤¨à¤¾à¤¤à¥‡ रहे।। 32 और विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ करनेवालोंकी मणà¥â€à¤¡à¤²à¥€ à¤à¤• चितà¥à¤¤ और à¤à¤• मन के थे यहां तक कि कोई à¤à¥€ अपकà¥à¤•à¥€ समà¥à¤ªà¤¤à¤¿ अपकà¥à¤•à¥€ नहीं कहता या, परनà¥â€à¤¤à¥ सब कà¥à¤› साफे का या। 33 और पà¥à¤°à¤°à¤¿à¤¤ बड़ी सामरà¥à¤¯ से पà¥à¤°à¤à¥ यीशॠके जी उठने की गवाही देते रहे और उन सब पर बड़ा अनà¥à¤—à¥à¤°à¤¹ या। 34 और उन में कोई à¤à¥€ दिरदà¥à¤° न या, कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि जिन के पास à¤à¥‚मि या घर थे, वे उन को बेच बेचकर, बिकी हà¥à¤ˆ वसà¥â€à¤¤à¥à¤“ं का दाम लाते, और उसे पà¥à¤°à¤°à¤¿à¤¤à¥‹à¤‚के पांवोंपर रखते थे। 35 और जैसी जिसे आवशà¥à¤¯à¤•à¤¤à¤¾ होती यी, उसके अनà¥à¤¸à¤¾à¤° हर à¤à¤• को बांट दिया करते थे। 36 और यूसà¥à¤« नाम, कà¥à¤°à¥à¤ªà¥à¤°à¥à¤¸ का à¤à¤• लेवी या जिसका नाम पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤à¥‹à¤‚ने बर-नबा अरà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥â€ (शानà¥â€à¤¤à¤¿ का पà¥à¤¤à¥à¤°) रखा या। 37 उस की कà¥à¤› à¤à¥‚मि यी, जिसे उस ने बेचा, और दाम के रूपके लाकर पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤à¥‹à¤‚के पांवोंपर रख दिà¤à¥¤à¥¤
1 और हननà¥à¤¯à¤¾à¤¹ नाम à¤à¤• मनà¥à¤·à¥à¤¯, और उस की पतà¥â€à¤¨à¥€ सफीरा ने कà¥à¤› à¤à¥‚मि बेची। 2 और उसके दाम में से कà¥à¤› रख छोड़ा; और यह बात उस की पतà¥â€à¤¨à¥€ à¤à¥€ जानती यी, और उसका à¤à¤• à¤à¤¾à¤— लाकर पà¥à¤°à¤°à¤¿à¤¤à¥‹à¤‚के पावोंके आगे रख दिया। 3 परनà¥â€à¤¤à¥ पतरस ने कहा; हे हननà¥à¤¯à¤¾à¤¹! शैतान ने तेरे मन में यह बात कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚डाली है कि तू पवितà¥à¤° आतà¥à¥˜à¤¾ से फूठबोले, और à¤à¥‚मि के दाम में से कà¥à¤› रख छोड़े 4 जब तक वह तेरे पास रही, कà¥â€à¤¯à¤¾ तेरी न यी और जब बिक गई तो कà¥â€à¤¯à¤¾ तेरे वश में न यी तू ने यह बात अपके मन में कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚विचारी तू मनà¥à¤·à¥à¤¯à¥‹à¤‚से नहीं, परनà¥â€à¤¤à¥ परमेशà¥à¤µà¤° से फूठबोला। 5 थे बातें सà¥à¤¨à¤¤à¥‡ ही हननà¥à¤¯à¤¾à¤¹ गिर पड़ा, और पà¥à¤°à¤¾à¤£ छोड़ दिà¤; और सब सà¥à¤¨à¤¨à¥‡à¤µà¤¾à¤²à¥‹à¤‚पर बड़ा à¤à¤¯ छा गया। 6 फिर जवानोंने उठकर उसकी अरà¥à¤¯à¥€ बनाई और बाहर ले जाकर गाढ़ दिया।। 7 लगà¤à¤— तीन घंटे के बाद उस की पतà¥â€à¤¨à¥€, जो कà¥à¤› हà¥à¤† या न जानकर, à¤à¥€à¤¤à¤° आई। 8 तब पतरस ने उस से कहा; मà¥à¤à¥‡ बता कà¥â€à¤¯à¤¾ तà¥à¤® ने वह à¤à¥‚मि इतने ही में बेची यी उस ने कहा; हां, इतने ही में। 9 पतरस ने उस से कहा; यह कà¥â€à¤¯à¤¾ बात है, कि तà¥à¤® दोनोंने पà¥à¤°à¤à¥ की आतà¥à¥˜à¤¾ की पकà¥à¤•à¥€à¤à¤¾ के लिथे à¤à¤•à¤¾ किया है देख, तेरे पति के गाड़नेवाले दà¥à¤µà¤¾à¤° ही पर खड़े हैं, और तà¥à¤à¥‡ à¤à¥€ बाहर ले जाà¤à¤‚गे। 10 तब वह तà¥à¤°à¤¨à¥â€à¤¤ उसके पांवोंपर गिर पड़ी, और पà¥à¤°à¤¾à¤£ छोड़ दिà¤: और जवानोंने à¤à¥€à¤¤à¤° आकर उसे मरा पाया, और बाहर ले जाकर उसके पति के पास गाड़ दिया। 11 और सारी कलीसिया पर और इन बातोंके सब सà¥à¤¨à¤¨à¥‡à¤µà¤¾à¤²à¥‹à¤‚पर, बड़ा à¤à¤¯ छा गया।। 12 और पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤à¥‹à¤‚के हाथोंसे बहà¥à¤¤ चिनà¥â€à¤¹ और अदà¥à¤à¥à¤¤ काम लोगोंके बीच में दिखाठजाते थे, (और वे सब à¤à¤• चितà¥à¤¤ होकर सà¥à¤²à¥ˆà¤®à¤¾à¤¨ के ओसारे में इकटà¥à¤ े हà¥à¤† करते थे। 13 परनà¥â€à¤¤à¥ औरोंमें से किसी को यह हियाव न होता या, उन में जा मिलें; तौà¤à¥€ लोग उन की बड़ाइ। करते थे। 14 और विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ करनेवाले बहà¥à¤¤à¥‡à¤°à¥‡ पà¥à¤°à¥‚ष और सà¥â€à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ पà¥à¤°à¤à¥ की कलीसिया में और à¤à¥€ अधिक आकर मिलते रहे।) 15 यहां तक कि लोग बीमारोंको सड़कोंपर ला लाकर, खाटोंऔर खटोलोंपर लिटा देते थे, कि जब पतरस आà¤, तो उस की छाया ही उन में से किसी पर पड़ जाà¤à¥¤ 16 और यरूशलेम के आस पास के नगरोंसे à¤à¥€ बहà¥à¤¤ लोग बीमारोंऔर अशà¥à¤¦à¥à¤§ आतà¥à¥˜à¤¾à¤“ं के सताठहà¥à¤“ं का ला लाकर, इकटà¥à¤ े होते थे, और सब अचà¥â€à¤›à¥‡ कर दिठजाते थे।। 17 तब महाथाजक और उसके सब सायी जो सदूकियोंके पंय के थे, डाह से à¤à¤° कर उठे। 18 और पà¥à¤°à¤°à¤¿à¤¤à¥‹à¤‚को पकड़कर बनà¥â€à¤¦à¥€à¤—ृह में बनà¥â€à¤¦ कर दिया। 19 परनà¥â€à¤¤à¥ रात को पà¥à¤°à¤à¥ के à¤à¤• सà¥â€à¤µà¤°à¥à¤—दूत ने बनà¥â€à¤¦à¥€à¤—ृह के दà¥à¤µà¤¾à¤° खोलकर उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ बाहर लाकर कहा। 20 कि जाओ, मनà¥â€à¤¦à¤¿à¤° में खड़े होकर, इस जीवन की सब बातें लोगोंको सà¥à¤¨à¤¾à¤“। 21 वे यह सà¥à¤¨à¤•à¤° à¤à¥‹à¤° होते ही मनà¥â€à¤¦à¤¿à¤° में जाकर उपकेश देने लगे: परनà¥â€à¤¤à¥ महाथाजक और उसके सायियोंने आकर महासà¤à¤¾ को और इसà¥â€à¤¤à¥à¤°à¤¾à¤à¤²à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚के सब पà¥à¤°à¤¿à¤¨à¤¯à¥‹à¤‚को इकटà¥à¤ े किया, और बनà¥â€à¤¦à¥€à¤—ृह में कहला à¤à¥‡à¤œà¤¾ कि उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ लाà¤à¤‚। 22 परनà¥â€à¤¤à¥ पà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¥‹à¤‚ने वहां पहà¥à¤‚चकर उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ बनà¥â€à¤¦à¥€à¤—ृह में न पाया, और लौटकर संदेश दिया। 23 कि हम ने बनà¥â€à¤¦à¥€à¤—ृह को बड़ी चौकसी से बनà¥â€à¤¦ किया हà¥à¤†, और पहरेवालोंको बाहर दà¥à¤µà¤¾à¤°à¥‹à¤‚पर खड़े हà¥à¤ पाया; परनतॠजब खोला, तो à¤à¥€à¤¤à¤° कोई न मिला। 24 जब मनà¥â€à¤¦à¤¿à¤° के सरदार और महाथाजकोंने थे बातें सनीं, तो उन के विषय में à¤à¤¾à¤°à¥€ चिनà¥â€à¤¤à¤¾ में पड़ गठकि यह कà¥â€à¤¯à¤¾ हà¥à¤† चाहता है 25 इतने में किसी ने आकर उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ बताया, कि देखो, जिनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ तà¥à¤® ने बनà¥â€à¤¦à¥€à¤—ृह में बनà¥â€à¤¦ रखा या, वे मनà¥à¤·à¥à¤¯ मनà¥â€à¤¦à¤¿à¤° में खड़े हà¥à¤ लोगोंको उपकेश दे रहे हैं। 26 तक सरदार, पà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¥‹à¤‚के साय जाकर, उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ ले आया, परनà¥â€à¤¤à¥ बरबस नहीं, कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि वे लोगोंसे डरते थे, कि हमें पतà¥à¤¯à¤°à¤µà¤¾à¤¹ न करें। 27 उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ फिर लाकर महासà¤à¤¾ के सामà¥à¤¹à¤¨à¥‡ खड़ा कर दिश: और महाथाजक ने उन से पूछा। 28 कà¥â€à¤¯à¤¾ हम ने तà¥à¤®à¥à¤¹à¥‡à¤‚ चिताकर आजà¥à¤žà¤¾ न दी यी, कि तà¥à¤® इस नाम से उपकेश न करना तौà¤à¥€ देखो, तà¥à¤® ने सारे यरूशलेम को अपके उपकेश से à¤à¤° दिया है और उस वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ का लोहू हमारी गरà¥à¤¦à¤¨ पर लाना चाहते हो। 29 तक पतरस और, और पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤à¥‹à¤‚ने उतà¥à¤¤à¤° दिया, कि मनà¥à¤·à¥à¤¯à¥‹à¤‚की आजà¥à¤žà¤¾ से बढ़कर परमेशà¥à¤µà¤° की आजà¥à¤žà¤¾ का पालन करना ही करà¥à¤¤à¤µà¥à¤¯ करà¥à¤® है। 30 हमारे बापदादोंके परमेशà¥à¤µà¤° ने यीशॠको जिलाया, जिसे तà¥à¤® ने कà¥à¤°à¥‚स पर लटकाकर मार डाला या। 31 उसी को परमेशà¥à¤µà¤° ने पà¥à¤°à¤à¥ और उदà¥à¤§à¤¾à¤°à¤• ठहराकर, अपके दिहने हाथ से सरà¥à¤µà¥‹à¤šà¥â€à¤š कर दिया, कि वह इसà¥â€à¤¤à¥à¤°à¤¾à¤à¤²à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚को मन फिराव की शकà¥à¤¤à¤¿ और पापोंकी à¤à¤®à¤¾ पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करे। 32 और हम इन बातोंके गवाह हैं, और पवितà¥à¤° आतà¥à¥˜à¤¾ à¤à¥€, जिसे परमेशà¥à¤µà¤° ने उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ दिया है, जो उस की आजà¥à¤žà¤¾ मानते हैं।। 33 यह सà¥à¤¨à¤•à¤° वे जल गà¤, और उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ मार डालना चाहा। 34 परनà¥â€à¤¤à¥ गमलीà¤à¤² नाम à¤à¤• फरीसी ने जो वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤• और सब लोगोंमें माननीय या, नà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ में खड़े होकर पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤à¥‹à¤‚को योड़ी देर के लिथे बाहर कर देने की आजà¥à¤žà¤¾ दी। 35 तक उस ने कहा, हे इसà¥â€à¤¤à¥à¤°à¤¾à¤à¤²à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚, जो कà¥à¤› इन मनà¥à¤·à¥à¤¯à¥‹à¤‚से किया चाहते हो, सोच समठके करना। 36 कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि इन दिनोंसे पहले यियूदास यह कहता हà¥à¤† उठा, कि मैं à¤à¥€ कà¥à¤› हूं; और कोई चार सौ मनà¥à¤·à¥à¤¯ उसके साय हो लिथे, परनà¥â€à¤¤à¥ वह मारा गया; और जितने लोग उसे मानते थे, सब तितà¥à¤¤à¤° बितà¥à¤¤à¤° हà¥à¤ और मिट गà¤à¥¤ 37 उसके बाद नाम लिखाई के दिनोंमें यहूदा गलीली उठा, और कà¥à¤› लोग अपकà¥à¤•à¥€ ओर कर लिथे: वह à¤à¥€ नाश हो गया, और जितने लागे उसे मानते थे, सब तितà¥à¤¤à¤° बितà¥à¤¤à¤° हो गà¤à¥¤ 38 इसलिथे अब मैं तà¥à¤® से कहता हूं, इन मनà¥à¤·à¥à¤¯à¥‹à¤‚से दूर ही रहो और उन से कà¥à¤› काम न रखो; कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि यदि यह धरà¥à¤® या काम मनà¥à¤·à¥à¤¯à¥‹à¤‚की ओर से हो तब तो मिट जाà¤à¤—ा। 39 परनà¥â€à¤¤à¥ यदि परमेशà¥à¤µà¤° की ओर से है, तो तà¥à¤® उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ कदापि मिटा न सकोगे; कहीं à¤à¤¸à¤¾ न हो, कि तà¥à¤® परमेशà¥à¤µà¤° से à¤à¥€ लड़नेवाले ठहरो। 40 तब उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने उस की बात मान ली; और पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤à¥‹à¤‚को बà¥à¤²à¤¾à¤•à¤° पिटवाया; और यह आजà¥à¤žà¤¾ देकर छोड़ दिया, कि यीशॠके नाम से फिर बातें न करना। 41 वे इस बात से आननà¥â€à¤¦à¤¿à¤¤ होकर महासà¤à¤¾ के सामà¥à¤¹à¤¨à¥‡ से चले गà¤, कि हम उसके नाम के लिथे निरादर होने के योगà¥à¤¯ हो ठहरे। 42 और पà¥à¤°à¤¤à¤¿ दिन मनà¥â€à¤¦à¤¿à¤° में और घर घर में उपकेश करने, और इस बात का सà¥à¤¸à¤®à¤¾à¤šà¤¾à¤° सà¥à¤¨à¤¾à¤¨à¥‡ से, कि यीशॠही मसीह है न रूके।।
1 उन दिनोंमें जब चेले बहà¥à¤¤ होने जाते थे, तो यूनानी à¤à¤¾à¤·à¤¾ बोलनेवाले इबà¥à¤°à¤¾à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚पर कà¥à¤¡à¤¼à¤•à¥à¤¡à¤¼à¤¾à¤¨à¥‡ लगे, कि पà¥à¤°à¤¤à¤¿ दिन की सेवकाई में हमारी विधवाओं की सà¥à¤§à¤¿ नहीं ली जाती। 2 तब उन बारहोंने चेलोंकी मणà¥â€à¤¡à¤²à¥€ को अपके पास बà¥à¤²à¤¾à¤•à¤° कहा, यह ठीक नहीं कि हम परमेशà¥à¤µà¤° का वचन छोड़कर खिलानेपिलाने की सेवा में रहें। 3 इसलिथे हे à¤à¤¾à¤‡à¤¯à¥‹, अपके में से सात सà¥à¤¨à¤¾à¤® पà¥à¤°à¥‚षोंको जो पवितà¥à¤° आतà¥à¥˜à¤¾ और बà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿ से परिपूरà¥à¤£ हो, चà¥à¤¨ लो, कि हम उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ इस काम पर ठहरा दें। 4 परनà¥â€à¤¤à¥ हम तो पà¥à¤°à¤¾à¤°à¥à¤¯à¤¨à¤¾ में और वचन की सेवा में लगे रहेंगे। 5 यह बात सारी मणà¥â€à¤¡à¤²à¥€ को अचà¥â€à¤›à¥€ लगी, और उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने सà¥â€à¤¤à¤¿à¥à¤«à¤¨à¥à¤¸ नाम à¤à¤• पà¥à¤°à¥‚ष को जो विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ और पवितà¥à¤° आतà¥à¥˜à¤¾ से परिपूरà¥à¤£ या, और फिलपà¥â€à¤ªà¥à¤¸ और पà¥à¤°à¤–à¥à¤°à¥‚स और नीकानोर और तीमोन और परिमनास और अनà¥â€à¤¤à¤¾à¤•à¥€à¤µà¤¾à¤²à¤¾ नीकà¥à¤²à¤¾à¤‰à¤¸ को जो यहूदी मत में आ गया या, चà¥à¤¨ लिया। 6 और इनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤à¥‹à¤‚के सामà¥à¤¹à¤¨à¥‡ खड़ा किया और उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने पà¥à¤°à¤¾à¤°à¥à¤¯à¤¨à¤¾ करके उन पर हाथ रखे। 7 और परमेशà¥à¤µà¤° का वचन फैलता गया और यरूशलेम में चेलोंकी गिनती बहà¥à¤¤ बढ़ती गई; और याजकोंका à¤à¤• बड़ा समाज इस मत के अधीन हो गया। 8 सà¥â€à¤¤à¤¿à¤«à¥à¤¨à¥à¤¸ अनà¥à¤—à¥à¤°à¤¹ और सामरà¥à¤¯ में परिपूरà¥à¤£ होकर लोगोंमें बड़े बड़े अदà¥à¤à¥à¤¤ काम और चिनà¥â€à¤¹ दिखाया करता या। 9 तब उस अराधनालय में से जो लिबरतीनोंकी कहलाती यी, और कà¥à¤°à¥‡à¤¨à¥€ और सिकनà¥â€à¤¦à¤¿à¤°à¤¯à¤¾ और किलकिया और à¤à¤¶à¥€à¤¯à¤¾ के लोगोंमें से कई à¤à¤• उठकर सà¥â€à¤¤à¤¿à¤«à¤¨à¥à¤¸ से वाद-विवाद करने लगे। 10 परनà¥â€à¤¤à¥ उस जà¥à¤žà¤¾à¤¨ और उन आतà¥à¥˜à¤¾ का जिस से वह बातें करता या, वे सामà¥à¤¹à¤¨à¤¾ न कर सके। 11 इस पर उनà¥â€à¤¹à¥‹ ने कई लोगोंको उà¤à¤¾à¤°à¤¾ जो कहने लगे, कि हम ने इस मूसा और परमेशà¥à¤µà¤° के विरोध में निनà¥â€à¤¦à¤¾ की बातें कहते सà¥à¤¨à¤¾ है। 12 और लोगोंऔर पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨à¥‹à¤‚और शासà¥â€à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚को à¤à¤¡à¤¼à¤•à¤¾à¤•à¤° चढ़ आठऔर उसे पकड़कर महासà¤à¤¾ में ले आà¤à¥¤ 13 और फूठे गवाह खड़े किà¤, जिनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा कि यह मनà¥à¤·à¥à¤¯ इस पवितà¥à¤° सà¥à¤¯à¤¾à¤¨ और वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¯à¤¾ के विरोध में बोलना नहीं छोड़ता। 14 कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि हम ने उसे यह कहते सà¥à¤¨à¤¾ है, कि यही यीशॠनासरी इस जगह को ढ़ा देगा, और उन रीतोंको बदल डालेगा जो मूसा ने हमें सौंपी हैं। 15 तब सब लोगोंने जो सà¤à¤¾ में बैठे थे, उस की ओर ताककर उसका मà¥à¤–ड़ा सà¥â€à¤µà¤°à¥à¤—दूत का सा देखा।।
1 तब महाथाजक ने कहा, कà¥â€à¤¯à¤¾ थे बातें योंही है 2 उस ने कहा; हे à¤à¤¾à¤‡à¤¯à¥‹, और पितरो सà¥à¤¨à¥‹, हमारा पिता इबà¥à¤°à¤¾à¤¹à¥€à¤® हारान में बसने से पहिले जब मिसà¥à¤ªà¥à¤¤à¤¾à¤®à¤¿à¤¯à¤¾ में या; तो तेजोमय परमेशà¥à¤µà¤° ने उसे दरà¥à¤¶à¤¨ दिया। 3 और उस से कहा कि तू अपके देश और अपके कà¥à¤Ÿà¥à¤®à¥à¤¬ से निकलकर उस देश मे चला जा, जिसे मैं तà¥à¤à¥‡ दिखाऊंगा। 4 तब वह कसदियोंके देश से निकलकर हारान में जा बसा; और उसके पिता की मृतà¥à¤¯à¥ के बाद परमेशà¥à¤µà¤° ने उसको वहां से इस देश में लाकर बसाया जिस में अब तà¥à¤® बसते हो। 5 और उसको कà¥à¤› मीरास बरन पैर रखने à¤à¤° की à¤à¥€ उस में जगह न दी, परनà¥â€à¤¤à¥ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤œà¥à¤žà¤¾ की कि मैं यह देश, तेरे और तेरे बाद तेरे वंश के हाथ कर दूंगा; यदà¥à¤¯à¤ªà¤¿ उस समय उसके कोई पà¥à¤¤à¥à¤° à¤à¥€ न या। 6 और परमेशà¥à¤µà¤° ने योंकहा; कि तेरी सनà¥â€à¤¤à¤¾à¤¨ के लोग पराथे देश में परदेशी होंगे, और वे उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ दास बनाà¤à¤‚गे, और चार सौ वरà¥à¤· तक दà¥à¤– देंगे। 7 फिर परमेशà¥à¤µà¤° ने कहा; जिस जाति के वे दास होंगे, उस को मैं दणà¥â€à¤¡ दूंगा; और इस के बाद वे निकलकर इसी जगह मेरी सेवा करेंगे। 8 और उस ने उस से खतने की वाचा बानà¥â€à¤§à¥€; और इसी दशा में इसहाक उस से उतà¥â€à¤ªà¤¨à¥à¤¨ हà¥à¤†; और आठवें दिन उसका खतना किया गया; और इसहाक से याकूब और याकूब से बारह कà¥à¤²à¤ªà¤¤à¤¿ उतà¥â€à¤ªà¤¨à¥à¤¨ हà¥à¤à¥¤ 9 और कà¥à¤²à¤ªà¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ने यूसà¥à¤« से डाह करके उसे मिसर देश जानेवालोंके हाथ बेचा; परनà¥â€à¤¤à¥ परमेशà¥à¤µà¤° उसके साय या। 10 और उसे उसके सब कà¥â€à¤²à¥‡à¤¶à¥‹à¤‚से छà¥à¤¡à¤¼à¤¾à¤•à¤° मिसर के राजा फिरौन के आगे अनà¥à¤—à¥à¤°à¤¹ और बà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿ दी, और उस ने उसे मिसर पर और अपके सारे घर पर हाकिम ठहराया। 11 तब मिसर और कनान के सारे देश में अकाल पडा; जिस से à¤à¤¾à¤°à¥€ कà¥â€à¤²à¥‡à¤¶ हà¥à¤†, और हमारे बापदादोंको अनà¥à¤¨ नहीं मिलता या। 12 परनà¥â€à¤¤à¥ याकूब ने यह सà¥à¤¨à¤•à¤°, कि मिसर में अनाज है, हमारे बापदादोंको पहिली बार à¤à¥‡à¤œà¤¾à¥¤ 13 और दूसरी बार यूसà¥à¤« अपके à¤à¤¾à¤‡à¤¯à¥‹à¤‚पर पà¥à¤°à¤—ट को गया, और यूसà¥à¥à¤« की जाति फिरौन को मालूम हो गई। 14 तब यूसà¥à¤« ने अपके पिता याकूब और अपके सारे कà¥à¤Ÿà¥à¤®à¥à¤¬ को, जो पछतà¥à¤¤à¤° वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ थे, बà¥à¤²à¤¾ à¤à¥‡à¤œà¤¾à¥¤ 15 तब याकूब मिसर में गया; और वहां वह और हमारे बापदादे मर गà¤à¥¤ 16 और वे शिकिम में पहà¥à¤‚चाठजाकर उस कबà¥à¤° में रखे गà¤, जिसे इबà¥à¤°à¤¾à¤¹à¥€à¤® न चानà¥â€à¤¦à¥€ देकर शिकिम में हमोर की सनà¥â€à¤¤à¤¾à¤¨ से मोल लिया या। 17 परनà¥â€à¤¤à¥ जब उस पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤œà¥à¤žà¤¾ के पूरे होने का समय निकट आया, तो परमेशà¥à¤µà¤° ने इबà¥à¤°à¤¾à¤¹à¥€à¤® से की यी, तो मिसर में वे लोग बढ़ गà¤; और बहà¥à¤¤ हो गà¤à¥¤ 18 जब तक कि मिसर में दूसरा राजा न हà¥à¤† जो यूसà¥à¤« को नहीं जानता या। 19 उस ने हमारी जाति से चतà¥à¤°à¤¾à¤ˆ करके हमारे बापदादोंके साय यहां तक कà¥à¤µà¥à¤¯à¥‹à¤¹à¤¾à¤° किया, कि उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ अपके बालकोंको फेंक देना पड़ा कि वे जीवित न रहें। 20 उस समय मूसा उतà¥â€à¤ªà¤¨à¥à¤¨ हà¥à¤† जो बहà¥à¤¤ ही सà¥à¤¨à¥â€à¤¦à¤° या; और वह तीन महीने तक अपके पिता के घर में पाला गया। 21 परनà¥â€à¤¤à¥ जब फेंक दिया गया तो फिरौन की बेटी ने उसे उठा लिया, और अपना पà¥à¤¤à¥à¤° करके पाला। 22 और मूसा को मिसरियोंकी सारी विदà¥à¤¯à¤¾ पढ़ाई गई, और वह बातोंऔर कामोंमें सामरà¥à¤¯à¥€ या। 23 जब वह चालीस वरà¥à¤· का हà¥à¤†, तो उसके मन में आया कि मैं अपके इसà¥â€à¤¤à¥à¤°à¤¾à¤à¤²à¥€ à¤à¤¾à¤‡à¤¯à¥‹à¤‚से à¤à¥‡à¤‚ट करूं। 24 और उस ने à¤à¤• वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ पर अनà¥à¤¯à¤¾à¤¯ होने देखकर, उसे बचाया, और मिसरी को मारकर सताठहà¥à¤ का पलटा लिया। 25 उस ने सोचा, कि मेरे à¤à¤¾à¤ˆ समà¤à¥‡à¤‚गे कि परमेशà¥à¤µà¤° मेरे हाथोंसे उन का उदà¥à¤§à¤¾à¤° करेगा, परनà¥â€à¤¤à¥ उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने न समà¤à¤¾à¥¤ 26 दूसरे दिन जब वे आपस में लड़ रहे थे, तो वह वहां आ निकला; और यह कहके उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ मेल करने के लिथे समà¤à¤¾à¤¯à¤¾, कि हे पà¥à¤°à¥‚षो, तà¥à¤® तो à¤à¤¾à¤ˆ à¤à¤¾à¤ˆ हो, à¤à¤• दूसरे पर कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚अनà¥à¤¯à¤¾à¤¯ करते हो 27 परनà¥â€à¤¤à¥ जो अपके पड़ोसी पर अनà¥à¤¯à¤¾à¤¯ कर रहा या, उस ने उसे यह कहकर हटा दिया, कि तà¥à¤à¥‡ किस ने हम पर हाकिम और नà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¥€ ठहराया है 28 कà¥â€à¤¯à¤¾ जिस रीति से तू ने कल मिसरी को मार डाला मà¥à¤à¥‡ à¤à¥€ मार डालना चाहता है 29 यह बात सà¥à¤¨à¤•à¤°, मूसा à¤à¤¾à¤—ा; और मिदà¥à¤¯à¤¾à¤¨ देश में परदेशी होकर रहने लगा: और वहां उसके दो पà¥à¤¤à¥à¤° उतà¥â€à¤ªà¤¨à¥à¤¨ हà¥à¤à¥¤ 30 जब पूरे चालीस वरà¥à¤· बीत गà¤, तो à¤à¤• सà¥â€à¤µà¤°à¥à¤— दूत ने सीनै पहाड़ के जंगल में उसे जलती हà¥à¤ˆ फाड़ी की जà¥â€à¤µà¤¾à¤²à¤¾ में दरà¥à¤¶à¤¨ दिया। 31 मूसा ने उस दरà¥à¤¶à¤¨ को देखकर अचमà¥à¤à¤¾ किया, और जब देखने के लिथे पास गया, तो पà¥à¤°à¤à¥ का यह शबà¥â€à¤¦ हà¥à¤†à¥¤ 32 कि मैं तेरे बापदादों, इबà¥à¤°à¤¾à¤¹à¥€à¤®, इसहाक और याकूब का परमेशà¥à¤µà¤° हूं: तब तो मूसा कांप उठा, यहां तक कि उसे देखने का हियाव न रहा। 33 तब पà¥à¤°à¤à¥ ने उस से कहा; अपके पावोंसे जूती उतार ले, कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि जिस जगह तू खड़ा है, वह पवितà¥à¤° à¤à¥‚मि है। 34 मैं ने सचमà¥à¤š अपके लोगोंकी रà¥à¤¦à¥à¤¦à¤¶à¤¾ को जो मिसर में है, देखी है; और उन की आह और उन का रोना सà¥à¤¨ लिया है; इसलिथे उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ छà¥à¤¡à¤¼à¤¾à¤¨à¥‡ के लिथे उतरा हूं। अब आ, मैं तà¥à¤à¥‡ मिसर में à¤à¥‡à¤‚जूंगा। 35 जिस मूसा को उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने यह कहकर नकारा या कि तà¥à¤à¥‡ किस ने हम पर हाकिम और नà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¥€ ठहराया है; उसी को परमेशà¥à¤µà¤° ने हाकिम और छà¥à¤¡à¤¼à¤¾à¤¨à¥‡à¤µà¤¾à¤²à¤¾ ठहराकर, उस सà¥â€à¤µà¤°à¥à¤— दूत के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ जिस ने उसे फाड़ी में दरà¥à¤¶à¤¨ दिया या, à¤à¥‡à¤œà¤¾à¥¤ 36 यही वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ मिसर और लाल समà¥à¤¦à¥à¤° और जंगल में चालीस वरà¥à¤· तक अदà¥à¤à¥à¤¤ काम और चिनà¥â€à¤¹ दिखा दिखाकर उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ निकाल लाया। 37 यह वही मूसा है, जिस ने इसà¥â€à¤¤à¥à¤°à¤¾à¤à¤²à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚से कहा; कि परमेशà¥à¤µà¤° तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥‡ à¤à¤¾à¤‡à¤¯à¥‹à¤‚में से तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥‡ लिथे मà¥à¤ सा à¤à¤• à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯à¤¦à¥à¤µà¤•à¥à¤¤à¤¾ उठाà¤à¤—ा। 38 यह वही है, जिस ने जंगल में कलीसिया के बीच उस सà¥â€à¤µà¤°à¥à¤—दूत के साय सीनै पहाड़ पर उस से बातें की, और हमारे बापदादोंके साय या: उसी को जीवित वचन मिले, कि हम तक पहà¥à¤‚चाà¤à¥¤ 39 परनà¥â€à¤¤à¥ हमारे बापदादोंने उस की मानना न चाहा; बरन उसे हटाकर अपके मन मिसर की ओर फेरे। 40 और हारून से कहा; हमारे लिथे à¤à¤¸à¤¾ देवता बना, जो हमारे आगे आगे चलें; कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि यह मूसा जा हमें मिसर देश से निकाल लाया, हम नहीं जानते उसे कà¥â€à¤¯à¤¾ हà¥à¤† 41 उन दिनोंमें उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने à¤à¤• बछड़ा बनाकर, उस की मूरत के आगे बलि चढ़ाया; और अपके हाथोंके कामोंमें मगन होने लगे। 42 सो परमेशà¥à¤µà¤° ने मà¥à¤‚ह मोड़कर उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ छोड़ दिया, कि आकशगण पूजें; जैसा à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯à¤¦à¥à¤µà¤•à¥à¤¤à¤¾à¤“ं की पà¥à¤¸à¥â€à¤¤à¤• में लिखा है; कि हे इसà¥â€à¤¤à¥à¤°à¤¾à¤à¤² के घराने, कà¥â€à¤¯à¤¾ तà¥à¤® जंगल में चालीस वरà¥à¤· तक पशà¥à¤¬à¤²à¤¿ और अनà¥à¤¨à¤¬à¤²à¤¿ मà¥à¤ ही को चढ़ाते रहे 43 और तà¥à¤® मोलेक के तमà¥à¤¬à¥‚ और रिफान देवता के तारे को लिठफिरते थे; अरà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥â€ उन आकारोंको जिनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ तà¥à¤® ने दणà¥â€à¤¡à¤µà¤¤ करने के लिथे बनाया या: सो मैं तà¥à¤®à¥à¤¹à¥‡à¤‚ बाबà¥à¤° के पके ले जाकर बसाऊंगा। 44 साà¤à¥€ का तमà¥à¤¬à¥‚ जंगल में हमारे बापदादोंके बीच में या; जैसा उस ने ठहराया, जिस ने मूसा से कहा; कि जो आकर तू ने देखा है, उसके अनà¥à¤¸à¤¾à¤° इसे बना। 45 उसी तमà¥à¤¬à¥‚ को हमारे बापदादे पूरà¥à¤µà¤•à¤¾à¤² से पाकर यहोशू के साय यहां ले आà¤; जिस समय कि उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने उन अनà¥à¤¯à¤œà¤¾à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚का अधिकà¥à¤•à¤¾à¤°à¤¨à¥‡ पाया, जिनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ परमेशà¥à¤µà¤° ने हमारे बापदादोंके सामà¥à¤¹à¤¨à¥‡ से निकाल दिया; और वह दाऊद के समय तक रहा। 46 उस पर परमेशà¥à¤µà¤° ने अनà¥à¤—à¥à¤°à¤¹ किया, सो उस ने बिनती की, कि मैं याकूब के परमेशà¥à¤µà¤° के लिथे निवास सà¥à¤¯à¤¾ ठहराऊं। 47 परनà¥â€à¤¤à¥ सà¥à¤²à¥ˆà¤®à¤¾à¤¨ ने उसके लिथे घर बनाया। 48 परनà¥â€à¤¤à¥ परम पà¥à¤°à¤§à¤¾à¤¨ हाथ के बनाठघरोंमें नहीं रहता, जैसा कि à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯à¤¦à¥à¤µà¤•à¥à¤¤à¤¾ ने कहा। 49 कि पà¥à¤°à¤à¥ कहता है, सà¥â€à¤µà¤°à¥à¤— मेरा सिहांसन और पृयà¥â€à¤µà¥€ मेरे पांवोंतले की पीढ़ी है, मेरे लिथे तà¥à¤® किस पà¥à¤°à¤•à¤¾à¤° का घर बनाओगे और मेरे विशà¥à¤°à¤® का कौन सा सà¥à¤¯à¤¾à¤¨ होगा 50 कà¥â€à¤¯à¤¾ थे सब वसà¥â€à¤¤à¥à¤à¤‚ मेरे हाथ की बनाई नहीं हे हठीले, और मन और कान के खतनारिहत लोगो, तà¥à¤® सदा पवितà¥à¤° आतà¥à¥˜à¤¾ का सामà¥à¤¹à¤¨à¤¾ करते हो। 51 जैसा तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥‡ बापदादे करते थे, वैसे ही तà¥à¤® à¤à¥€ करते हो। 52 à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯à¤¦à¥à¤µà¤•à¥à¤¤à¤¾à¤“ं में से किस को तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥‡ बापदादोंने नहीं सताया, और उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने उस धरà¥à¤®à¥€ के आगमन का पूरà¥à¤µà¤•à¤¾à¤² से सनà¥â€à¤¦à¥‡à¤¶ देनेवालोंको मार डाला, और अब तà¥à¤® à¤à¥€ उसके पकड़वानेवाले और मार डालनेवाले हà¥à¤à¥¤ 53 तà¥à¤® ने सà¥â€à¤µà¤°à¥à¤—दूतोंके दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ ठहराई हà¥à¤ˆ वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¯à¤¾ तो पाई, परनà¥â€à¤¤à¥ उसका पालन नहीं किया।। 54 थे बातें सà¥à¤¨à¤•à¤° वे जल गठऔर उस पर दांत पीसने लगे। 55 परनà¥â€à¤¤à¥ उस ने पवितà¥à¤° आतà¥à¥˜à¤¾ से परिपूरà¥à¤£ होकर सà¥â€à¤µà¤°à¥à¤— की ओर देखा और परमेशà¥à¤µà¤° की महिमा को और यीशॠको परमेशà¥à¤µà¤° की दिहनी ओर खड़ा देखकर। 56 कहा; देखों, मैं सà¥â€à¤µà¤°à¥à¤— को खà¥à¤²à¤¾ हà¥à¤†, और मनà¥à¤·à¥à¤¯ के पà¥à¤¤à¥à¤° को परमेशà¥à¤µà¤° के दिहनी ओर खड़ा हà¥à¤† देखता हूं। 57 तब उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने बड़े शबà¥â€à¤¦ से चिलà¥à¤²à¤¾à¤•à¤° कान बनà¥â€à¤¦ कर लिà¤, और à¤à¤• चितà¥à¤¤ होकर उस पर फपके। 58 और उसे नगर के बाहर निकालकर पतà¥à¤¯à¤°à¤µà¤¾à¤¹ करने लगे, और गवाहोंने अपके कपके उतार रखे। 59 और वे सà¥â€à¤¤à¤¿à¥à¤«à¤¨à¥à¤¸ को पतà¥à¤¯à¤°à¤µà¤¾à¤¹ करते रहे, और वह यह कहकर पà¥à¤°à¤¾à¤°à¥à¤¯à¤¨à¤¾ करता रहा; कि हे पà¥à¤°à¤à¥ यीशà¥, मेरी आतà¥à¥˜à¤¾ को गà¥à¤°à¤¹à¤£ कर। 60 फिर घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ टेककर ऊंचे शबà¥â€à¤¦ से पà¥à¤•à¤¾à¤°à¤¾, हे पà¥à¤°à¤à¥, यह पाप उन पर मत लगा, और यह कहकर सो गया: और शाऊल उसके बध में सहमत या।।
1 उसी दिन यरूशलेम की कलीसिया पर बड़ा उपदà¥à¤°à¤µ होने लगा और पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤à¥‹à¤‚को छोड़ सब के सब यहूदिया और सामरिया देशोंमें तितà¥à¤¤à¤° बितà¥à¤¤à¤° हो गà¤à¥¤ 2 और à¤à¤•à¥à¤¤à¥‹à¤‚ने सà¥â€à¤¤à¤¿à¤«à¤¨à¥à¤¸ को कबà¥à¤° में रखा; और उसके लिथे बड़ा विलाप किया। 3 शाऊल कलीसिया को उजाड़ रहा या; और घर घर घà¥à¤¸à¤•à¤° पà¥à¤°à¥‚षोंऔर सà¥â€à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚को घसीट घसीटकर बनà¥â€à¤¦à¥€à¤—ृह में डालता या।। 4 जो तितà¥à¤¤à¤° बितà¥à¤¤à¤° हà¥à¤ थे, वे सà¥à¤¸à¤®à¤¾à¤šà¤¾à¤° सà¥à¤¨à¤¾à¤¤à¥‡ हà¥à¤ फिरे। 5 और फिलपà¥â€à¤ªà¥à¤¸ सामरिया नगर में जाकर लोगोंमें मसीह का पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤° करने लगा। 6 और जो बातें फिलपà¥â€à¤ªà¥à¤¸ ने कहीं उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ लोगोंने सà¥à¤¨à¤•à¤° और जो चिनà¥â€à¤¹ वह दिखाता या उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ देख देखकर, à¤à¤• चितà¥à¤¤ होकर मन लगाया। 7 कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि बहà¥à¤¤à¥‹à¤‚में से अशà¥à¤¦à¥à¤§ आतà¥à¥˜à¤¾à¤à¤‚ बड़े शबà¥â€à¤¦ से चिलà¥à¤²à¤¾à¤¤à¥€ हà¥à¤ˆ निकल गई, और बहà¥à¤¤ से फोले के मारे हà¥à¤ और लंगडे à¤à¥€ अचà¥â€à¤›à¥‡ किठगà¤à¥¤ 8 और उस नगर में बड़ा आननà¥â€à¤¦ हà¥à¤†à¥¤à¥¤ 9 इस से पहिले उस नगर में शमौन नाम à¤à¤• मनà¥à¤·à¥à¤¯ या, जो टोना करके सामरिया के लोगोंको चकित करता और अपके आप को कोई बड़ा पà¥à¤°à¥‚ष बनाता यां 10 और सब छोटे से बड़े तक उसे मान कर कहते थे, कि यह मनà¥à¤·à¥à¤¯ परमशà¥â€à¥‡à¤µà¤° की वह शकà¥à¤¤à¤¿ है, जो महान कहलाती है। 11 उस ने बहà¥à¤¤ दिनोंसे उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ अपके टोने के कामोंसे चकित कर रखा या, इसी लिथे वे उस को बहà¥à¤¤ मानते थे। 12 परनà¥â€à¤¤à¥ जब उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने फिलपà¥â€à¤ªà¥à¤¸ की पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤¤à¤¿ की जो परमेशà¥à¤µà¤° के राजà¥à¤¯ और यीशॠके नाम का सà¥à¤¸à¤®à¤¾à¤šà¤¾à¤° सà¥à¤¨à¤¾à¤¤à¤¾ या तो लोग, कà¥â€à¤¯à¤¾ पà¥à¤°à¥‚ष, कà¥â€à¤¯à¤¾ सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ बपतिसà¥à¥˜à¤¾ लेने लगे। 13 तब शमौन ने आप à¤à¥€ पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤¤à¤¿ की और बपतिसà¥à¥˜à¤¾ लेकर फिलपà¥â€à¤ªà¥à¤¸ के साय रहने लगा और चिनà¥â€à¤¹ और बड़े बड़े सामरà¥à¤¯ के काम होते देखकर चकित होता या। 14 जब पà¥à¤°à¤°à¤¿à¤¤à¥‹à¤‚ने जो यरूशलेम में थे सà¥à¤¨à¤¾ कि सामरियोंने परमेशà¥à¤µà¤° का वचन मान लिया है तो पतरस और यूहनà¥à¤¨à¤¾ को उन के पास à¤à¥‡à¤œà¤¾à¥¤ 15 और उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने जाकर उन के लिथे पà¥à¤°à¤¾à¤°à¥à¤¯à¤¨à¤¾ की कि पवितà¥à¤° आतà¥à¥˜à¤¾ पाà¤à¤‚। 16 कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि वह अब तक उन में से किसी पर न उतरा या, उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने तो केवल पà¥à¤°à¤à¥ यीशॠमें नाम में बपतिसà¥à¥˜à¤¾ लिया या। 17 तब उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने उन पर हाथ रखे और उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने पवितà¥à¤° आतà¥à¥˜à¤¾ पाया। 18 जब शमौन ने देखा कि पà¥à¤°à¤°à¤¿à¤¤à¥‹à¤‚के हाथ रखने से पवितà¥à¤° आतà¥à¥˜à¤¾ दिया जाता है, तो उन के पास रूपके लाकर कहा। 19 कि यह अधिकà¥à¤•à¤¾à¤°à¤¨à¥‡ मà¥à¤à¥‡ à¤à¥€ दो, कि जिस किसी पर हाथ रखूं, वह पवितà¥à¤° आतà¥à¥˜à¤¾ पाà¤à¥¤ 20 पतरस ने उस से कहा; तेरे रूपके तेरे साय नाश हों, कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि तू ने परमेशà¥à¤µà¤° का दान रूपयोंसे मोल लेने का विचार किया। 21 इस बात में न तेरा हिसà¥â€à¤¸à¤¾ है, न बांटा; कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि तेरा मन परमेशà¥à¤µà¤° के आगे सीधा नहीं। 22 इसलिथे अपकà¥à¤•à¥€ इस बà¥à¤°à¤¾à¤ˆ से मन फिराकर पà¥à¤°à¤à¥ से पà¥à¤°à¤¾à¤°à¥à¤¯à¤¨à¤¾ कर, समà¥à¤à¤µ है तेरे मन का विचार à¤à¤®à¤¾ किया जाà¤à¥¤ 23 कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि मैं देखता हूं, कि तू पितà¥à¤¤ की सी कड़वाहट और अधरà¥à¤® के बनà¥â€à¤§à¤¨ में पड़ा है। 24 शमौन ने उतà¥à¤¤à¤° दिया, कि तà¥à¤® मेरे लिथे पà¥à¤°à¤à¥ से पà¥à¤°à¤¾à¤°à¥à¤¯à¤¨à¤¾ करो कि जो बातें तà¥à¤® ने कहीं, उन में से कोई मà¥à¤ पर न आ पके।। 25 सो वे गवाही देकर और पà¥à¤°à¤à¥ का वचन सà¥à¤¨à¤¾à¤•à¤°, यरूशलेम को लौट गà¤, और सामरियोंके बहà¥à¤¤ गावोंमें सà¥à¤¸à¤®à¤¾à¤šà¤¾à¤° सà¥à¤¨à¤¾à¤¤à¥‡ गà¤à¥¤à¥¤ 26 फिर पà¥à¤°à¤à¥ के à¤à¤• सà¥â€à¤µà¤°à¥à¤—दूत ने फिलपà¥â€à¤ªà¥à¤¸ से कहा; उठकर दकà¥â€à¤–िन की ओर उस मारà¥à¤— पर जा, जो यरूशलेम से अजà¥à¥›à¤¾à¤¹ को जाता है, और जंगल में है। 27 वह उठकर चल दिया, और देखो, कूश देश का à¤à¤• मनà¥à¤·à¥à¤¯ आ रहा या जो खोजा और कूशियोंकी रानी कनà¥â€à¤¦à¤¾à¤•à¥‡ का मनà¥â€à¤¤à¥à¤°à¥€ और खजांची या, और à¤à¤œà¤¨ करने को यरूशलेम आया या। 28 और वह अपके रय पर बैठा हà¥à¤† या, और यशायाह à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯à¤¦à¥à¤µà¤•à¥à¤¤à¤¾ की पà¥à¤¸à¥â€à¤¤à¤• पढ़ता हà¥à¤† लौटा जा रहा या। 29 तब आतà¥à¥˜à¤¾ ने फिलपà¥â€à¤ªà¥à¤¸ से कहा, निकट जाकर इस रय के साय हो ले। 30 फिलपà¥â€à¤ªà¥à¤¸ ने उस ओर दौड़कर उसे यशायाह à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯à¤¦à¥à¤µà¤•à¥à¤¤à¤¾ की पà¥à¤¸à¥â€à¤¤à¤• पढ़ते हà¥à¤ सà¥à¤¨à¤¾, और पूछा, कि तू जो पढ़ रहा है कà¥â€à¤¯à¤¾ उसे समà¤à¤¤à¤¾ à¤à¥€ है 31 उस ने कहा, जब तक कोई मà¥à¤à¥‡ न समà¤à¤¾à¤ तो मैं कà¥â€à¤¯à¤¾à¤‚ेकर समà¤à¥‚ं और उस ने फिलपà¥â€à¤ªà¥à¤¸ से बिनती की, कि चढ़कर मेरे पास बैठ। 32 पवितà¥à¤° शासà¥â€à¤¤à¥à¤° का जो अधà¥à¤¯à¤¾à¤¯ वह पढ़ रहा या, वह यह या; कि वह à¤à¥‡à¤¡à¤¼ की नाईं वध होने को पहà¥à¤‚चाया गया, और जैसा मेमà¥à¤¨à¤¾ अपके ऊन कतरनेवालोंके सामà¥à¤¹à¤¨à¥‡ चà¥à¤ªà¤šà¤¾à¤ª रहता है, वैसे ही उस ने à¤à¥€ अपना मà¥à¤‚ह न खोला। 33 उस की दीनता में उसका नà¥à¤¯à¤¾à¤¯ होने नहीं पाया, और उसके समय के लोगोंका वरà¥à¤£à¤¨ कौन करेगा, कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि पृयà¥â€à¤µà¥€ से उसका पà¥à¤°à¤¾à¤£ उठाया जाता है। 34 इस पर खोजे ने फिलपà¥â€à¤ªà¥à¤¸ से पूछा; मैं तà¥à¤ से बिनती करता हूं, यह बता कि à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯à¤¦à¥à¤µà¤•à¥à¤¤à¤¾ यह किस विषय में कहता है, अपके या किसी दूसरे के विषय में। 35 तब फिलपà¥â€à¤ªà¥à¤¸ ने अपना मà¥à¤‚ह खोला, और इसी शासà¥â€à¤¤à¥à¤° से आरमà¥à¤ करके उसे यीशॠका सà¥à¤¸à¤®à¤¾à¤šà¤¾à¤° सà¥à¤¨à¤¾à¤¯à¤¾à¥¤ 36 मारà¥à¤— में चलते चलते वे किसी जल की जगह पहà¥à¤‚चे, तब खोजे ने कहा, देख यहां जल है, अब मà¥à¤à¥‡ बपतिसà¥à¥˜à¤¾ लेने में कà¥â€à¤¯à¤¾ रोक है। 37 फिलपà¥â€à¤ªà¥à¤¸ ने कहा, यदि तू सारे मन से विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ करता है तो हो सकता है: उस ने उतà¥à¤¤à¤° दिया मैं विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ करता हूं कि यीशॠमसीह परमेशà¥à¤µà¤° का पà¥à¤¤à¥à¤° है। 38 तब उस ने रय खड़ा करने की आजà¥à¤žà¤¾ दी, और फिलपà¥â€à¤ªà¥à¤¸ और खोजा दोनोंजल में उतर पके, और उस ने उसे बपतिसà¥à¥˜à¤¾ दिया। 39 जब वे जल में से निकलकर ऊपर आà¤, तो पà¥à¤°à¤à¥ का आतà¥à¥˜à¤¾ फिलपà¥â€à¤ªà¥à¤¸ को उठा ले गया, सो खोजे ने उसे फिर न देखा, और वह आननà¥â€à¤¦ करता हà¥à¤† अपके मारà¥à¤— चला गया। 40 और फिलपà¥â€à¤ªà¥à¤¸ अशदोद में आ निकला, और जब तक कैसरिया में न पहà¥à¤‚चा, तब तक नगर नगर सà¥à¤¸à¤®à¤¾à¤šà¤¾à¤° सà¥à¤¨à¤¾à¤¤à¤¾ गया।।
1 और शाऊल जो अब तक पà¥à¤°à¤à¥ के चेलोंको धमकाने और घात करने की धà¥à¤¨ में या, महाथाजक के पास गया। 2 और उस से दिमशà¥â€à¤• की अराधनालयोंके नाम पर इस अà¤à¤¿à¤ªà¥à¤°à¤¾à¤¯ की चिटà¥à¤ ियां मांगी, कि कà¥â€à¤¯à¤¾ पà¥à¤°à¥‚ष, कà¥â€à¤¯à¤¾ सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€, जिनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ वह इस पंय पर पाठउनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ बानà¥â€à¤§à¤•à¤° यरूशलेम में ले आà¤à¥¤ 3 परनà¥â€à¤¤à¥ चलते चलते जब वह दिमशà¥â€à¤• के निकट पहà¥à¤‚चा, तो à¤à¤•à¤¾à¤à¤• आकाश से उसके चारोंओर जà¥à¤¯à¥‹à¤¤à¤¿ चमकी। 4 और वह à¤à¥‚मि पर गिर पड़ा, और यह शबà¥â€à¤¦ सà¥à¤¨à¤¾, कि हे शाऊल, हे शाऊल, तू मà¥à¤à¥‡ कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚सताता है 5 उस ने पूछा; हे पà¥à¤°à¤à¥, तू कौन है उस ने कहा; मैं यीशॠहूं; जिसे तू सताता है। 6 परनà¥â€à¤¤à¥ अब उठकर नगर में जा, और जो कà¥à¤› करना है, वह तà¥à¤ से कहा जाà¤à¤—ा। 7 जो मनà¥à¤·à¥à¤¯ उसके साय थे, वे चà¥à¤ªà¤šà¤¾à¤ª रह गà¤; कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि शबà¥â€à¤¦ तो सà¥à¤¨à¤¤à¥‡ थे, परनà¥â€à¤¤à¥ किसी को दखते न थे। 8 तब शाऊल à¤à¥‚मि पर से उठा, परनà¥â€à¤¤à¥ जब आंखे खोलीं तो उसे कà¥à¤› दिखाई न दिया और वे उसका हाथ पकड़के दिमशà¥â€à¤• में ले गà¤à¥¤ 9 और वह तीन दिन तक न देख सका, और न खाया और न पीया। 10 दिमशà¥â€à¤• में हननà¥à¤¯à¤¾à¤¹ नाम à¤à¤• चेला या, उस से पà¥à¤°à¤à¥ ने दरà¥à¤¶à¤¨ में कहा, हे हननà¥à¤¯à¤¾à¤¹! उस ने कहा; हां पà¥à¤°à¤à¥à¥¤ 11 तब पà¥à¤°à¤à¥ ने उस से कहा, उठकर उस गली में जा जो सीधी कहलाती है, और यहूदा के घर में शाऊल नाम à¤à¤• तारसी को पूछ ले; कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि देख, वह पà¥à¤°à¤¾à¤°à¥à¤¯à¤¨à¤¾ कर रहा है। 12 और उस ने हननà¥à¤¯à¤¾à¤¹ नाम à¤à¤• पà¥à¤°à¥‚ष को à¤à¥€à¤¤à¤° आते, और अपके ऊपर आते देखा है; ताकि फिर से दृषà¥â€à¤Ÿà¤¿ पाà¤à¥¤ 13 हननà¥à¤¯à¤¾à¤¹ ने उतà¥à¤¤à¤° दिया, कि हे पà¥à¤°à¤à¥, मैं ने इस मनà¥à¤·à¥à¤¯ के विषय में बहà¥à¤¤à¥‹à¤‚से सà¥à¤¨à¤¾ है, कि इस ने यरूशलेम में तेरे पवितà¥à¤° लोगोंके साय बड़ी बड़ी बà¥à¤°à¤¾à¤ˆà¤¯à¤¾à¤‚ की हैं। 14 और यहां à¤à¥€ इस को महाथाजकोंकी ओर से अधिकà¥à¤•à¤¾à¤°à¤¨à¥‡ मिला है, कि जो लोग तेरा नाम लेते हैं, उन सब को बानà¥â€à¤§ ले। 15 परनà¥â€à¤¤à¥ पà¥à¤°à¤à¥ ने उस से कहा, कि तू चला जा; कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि यह, तो अनà¥à¤¯à¤œà¤¾à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚और राजाओं, और इसà¥â€à¤¤à¥à¤°à¤¾à¤à¤²à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚के सामà¥à¤¹à¤¨à¥‡ मेरा नाम पà¥à¤°à¤—ट करने के लिथे मेरा चà¥à¤¨à¤¾ हà¥à¤† पातà¥à¤° है। 16 और मैं उसे बताऊंगा, कि मेरे नाम के लिथे उसे कैसा कैसा दà¥à¤– उठाना पकेगा। 17 तब हननà¥à¤¯à¤¾à¤¹ उठकर उस घर में गया, और उस पर अपना हाथ रखकर कहा, हे à¤à¤¾à¤ˆ शाऊल, पà¥à¤°à¤à¥, अरà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥â€ यीशà¥, जो उस रासà¥â€à¤¤à¥‡ में, जिस से तू आया तà¥à¤à¥‡ दिखाई दिया या, उसी ने मà¥à¤à¥‡ à¤à¥‡à¤œà¤¾ है, कि तू फिर दृषà¥â€à¤Ÿà¤¿ पाठऔर पवितà¥à¤° आतà¥à¥˜à¤¾ से परिपूरà¥à¤£ हो जाà¤à¥¤ 18 और तà¥à¤°à¤¨à¥â€à¤¤ उस की आंखोंसे छिलके से गिरे, और वह देखने लगा और उठकर बपतिसà¥à¥˜à¤¾ लिया; फिर à¤à¥‹à¤œà¤¨ करके बल पाया।। 19 और वह कई दिन उन चेलोंके साय रहा जो दिमशà¥â€à¤• में थे। 20 और वह तà¥à¤°à¤¨à¥â€à¤¤ आराधनालयोंमें यीशॠका पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤° करने लगा, कि वह परमेशà¥à¤µà¤° का पà¥à¤¤à¥à¤° है। 21 और सब सà¥à¤¨à¤¨à¥‡à¤µà¤¾à¤²à¥‡ चकित होकर कहने लगे; कà¥â€à¤¯à¤¾ यह वही वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ नहीं है जो यरूशलेम में उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ जो इस नाम को लेते थे नाश करता या, और यहां à¤à¥€ इसी लिथे आया या, कि उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚बानà¥â€à¤§à¤•à¤° महाथाजकोंके पास ले आठ22 परनà¥â€à¤¤à¥ शाऊल और à¤à¥€ सामरà¥à¤¯à¥€ होता गया, और इस बात का पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£ दे देकर कि मसीह यही है, दिमशà¥â€à¤• के रहनेवाले यहूदियोंका मà¥à¤‚ह बनà¥â€à¤¦ करता रहा।। 23 जब बहà¥à¤¤ दिन बीत गà¤, तो यहूदियोंने मिलकर उसके मार डालने की यà¥à¤•à¥à¤¤à¤¿ निकाली। 24 परनà¥â€à¤¤à¥ उन की यà¥à¤•à¥à¤¤à¤¿ शाऊल को मालूम को गई: वे तो उसके मार डालने के लिथे रात दिन फाटकोंपर लगे रहे थे। 25 परनà¥â€à¤¤à¥ रात को उसके चेलोंने उसे लेकर टोकरे में बैठाया, और शहरपनाह पर ठलटकाकर उतार दिया।। 26 यरूशलेम में पहà¥à¤‚चकर उस ने चेलोंके साय मिल जाने का उपाय किया: परनà¥â€à¤¤à¥ सब उस से डरते थे, कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि उन को पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤¤à¤¿ न होता या, कि वह à¤à¥€ चेला है। 27 परनà¥â€à¤¤à¥ बरनबा उसे अपके साय पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤à¥‹à¤‚के पास ले जाकर उन से कहा, कि इस ने किस रीति से मारà¥à¤— में पà¥à¤°à¤à¥ को देखा, और इस ने इस से बातें कीं; फिर दिमशà¥â€à¤• में इस ने कैसे हियाव से यीशॠके नाम का पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤° किया। 28 वह उन के साय यरूशलेम में आता जाता रहा। 29 और निधड़क होकर पà¥à¤°à¤à¥ के नाम से पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤° करता या: और यूनानी à¤à¤¾à¤·à¤¾ बोलनेवाले यहूदियोंके साय बातचीत और वाद-विवाद करता या; परनà¥â€à¤¤ à¥à¤µà¥‡ उसके मार डालने का यतà¥â€à¤¨ करने लगे। 30 यह जानकर à¤à¤¾à¤ˆ उसे कैसरिया में ले आà¤, और तरसà¥à¤¸ को à¤à¥‡à¤œ दिया।। 31 सो सारे यहूदिया, और गलील, और समरिया में कलीसिया को चैन मिला, और उसकी उनà¥à¤¨à¤¤à¤¿ होती गई; और वह पà¥à¤°à¤à¥ के à¤à¤¯ और पवितà¥à¤° आतà¥à¥˜à¤¾ की शानà¥â€à¤¤à¤¿ में चलती और बढ़ती जाती यी।। 32 और à¤à¤¸à¤¾ हà¥à¤† कि पतरस हर जगह फिरता हà¥à¤†, उन पवितà¥à¤° लोगोंके पास à¤à¥€ पहà¥à¤‚चा, जो लà¥à¤¦à¥à¤¦à¤¾ में रहते थे। 33 वहां उसे à¤à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾à¤¸ नाम फोले का मारा हà¥à¤† à¤à¤• मनà¥à¤·à¥à¤¯ मिला, जो आठवरà¥à¤· से खाट पर पड़ा या। 34 पतरस ने उस से कहा; हे à¤à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾à¤¸! यीशॠमसीह तà¥à¤à¥‡ चंगा करता है; उठ, अपना बिछौना बिछा; तब वह तà¥à¤°à¤¨à¥â€à¤¤ उठखड़ हà¥à¤†à¥¤ 35 और लà¥à¤¦à¥à¤¦à¤¾ और शारोन के सब रहनेवाले उसे देखकर पà¥à¤°à¤à¥ की ओर फिरे।। 36 याफा में तबीता अरà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥â€ दोरकास नाम à¤à¤• विशà¥à¤µà¤¾à¤¸à¤¿à¤¨à¥€ रहती यी, वह बहà¥à¤¤à¥‡à¤°à¥‡ à¤à¤²à¥‡ à¤à¤²à¥‡ काम और दान किया करती यी। 37 उनà¥â€à¤¹à¥€à¤‚ दिनोंमें वह बीमार होकर मर गई; और उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने उसे नहलाकर अटारी पर रख दिया। 38 और इसलिथे कि लà¥à¤¦à¥à¤¦à¤¾ याफा के निकट या, चेलोंने यह सà¥à¤¨à¤•à¤° कि पतरस वहां है दो मनà¥à¤·à¥à¤¯ à¤à¥‡à¤œà¤•à¤° उस ने बिनती की कि हमारे पास आने में देर न कर। 39 तब पतरस उठकर उन के साय हो लिया, और जब पहà¥à¤‚च गया, तो वे उसे उस अटारी पर ले गà¤; और सब विधवाà¤à¤‚ रोती हà¥à¤ˆ उसके पास आ खड़ी हà¥à¤ˆ: और जो कà¥à¤°à¤¤à¥‡ और कपके दोरकास ने उन के साय रहते हà¥à¤ बनाठथे, दिखाने लगीं। 40 तब पतरस ने सब को बाहर कर दिया, और घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ टेककर पà¥à¤°à¤¾à¤°à¥à¤¯à¤¨à¤¾ की; और लोय की ओर देखकर कहा; हे तबीता उठ: तब उस ने अपकà¥à¤•à¥€ आंखे खोल दी; और पतरस को देखकर उठबैठी। 41 उस ने हाथ देकर उसे उठाया और पवितà¥à¤° लोगोंऔर विधवाओं को बà¥à¤²à¤¾à¤•à¤° उसे जीवित और जागृत दिखा दिया। 42 यह बात सारे याफा मे फैल गई: और बहà¥à¤¤à¥‡à¤°à¥‹à¤‚ने पà¥à¤°à¤à¥ पर विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ किया। 43 और पतरस याफा में शमौन नाम किसी चमड़े के धनà¥â€à¤§à¤¾ करनेवाले के यहां बहà¥à¤¤ दिन तक रहा।।
1 कैसरिया में कà¥à¤°à¤¨à¥‡à¤²à¤¿à¤¯à¥à¤¸ नाम à¤à¤• मनà¥à¤·à¥à¤¯ या, जो इतालियानी नाम पलटन का सूबेदार या। 2 वह à¤à¤•à¥à¤¤ या, और अपके सारे घराने समेत परमेशà¥à¤µà¤° से डरता या, और यहूदी लागोंको बहà¥à¤¤ दान देता, और बराबर परमेशà¥à¤µà¤° से पà¥à¤°à¤¾à¤°à¥à¤¯à¤¨à¤¾ करता या। 3 उस ने दिन के तीसरे पहर के निकट दरà¥à¤¶à¤¨ में सà¥â€à¤ªà¤·à¥â€à¤Ÿ रूप से देखा, कि परमेशà¥à¤µà¤° का à¤à¤• सà¥â€à¤µà¤°à¥à¤—दूत मेरे पास à¤à¥€à¤¤à¤° आकर कहता है; कि हे कà¥à¤°à¤¨à¥‡à¤²à¤¿à¤¯à¥à¤¸à¥¤ 4 उस ने उसे धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ से देखा; और डरकर कहा; हे पà¥à¤°à¤à¥ कà¥â€à¤¯à¤¾ है उस ने उस से कहा, तेरी पà¥à¤°à¤¾à¤°à¥à¤¯à¤¨à¤¾à¤à¤‚ और तेरे दान सà¥à¥˜à¤°à¤£ के लिथे परमेशà¥à¤µà¤° के सामà¥à¤¹à¤¨à¥‡ पहà¥à¤‚चे हैं। 5 और अब याफा में मनà¥à¤·à¥à¤¯ à¤à¥‡à¤œà¤•à¤° शमौन को, जो पतरस कहलाता है, बà¥à¤²à¤µà¤¾ ले। 6 वह शमौन चमड़े के धनà¥â€à¤§à¤¾ करनेवाले के यहां पाहà¥à¤¨ है, जिस का घर समà¥à¤¦à¥à¤° के किनारे हैं। 7 जब वह सà¥â€à¤µà¤°à¥à¤—दूत जिस ने उस से बातें की यीं चला गया, तो उस ने दो सेवक, और जो उसके पास उपसà¥à¤¯à¤¿à¤¤ रहा करते थे उन में से à¤à¤• à¤à¤•à¥à¤¤ सिपाही को बà¥à¤²à¤¾à¤¯à¤¾à¥¤ 8 और उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ सब बातें बताकर याफा को à¤à¥‡à¤œà¤¾à¥¤à¥¤ 9 दूसरे दिन, जब वे चलते चलते नगर के पास पहà¥à¤‚चे, तो दो पहर के निकट पतरस कोठे पर पà¥à¤°à¤¾à¤°à¥à¤¯à¤¨à¤¾ करने चढ़ा। 10 और उसे à¤à¥‚ख लगी, और कà¥à¤› खाना चाहता या; परनà¥â€à¤¤à¥ जब वे तैयार कर रहे थे, तो वह बेसà¥à¤§ हो गया। 11 और उस ने देखा, कि आकाश खà¥à¤² गया; और à¤à¤• पातà¥à¤° बड़ी चादर के समान चारोंकोनोंसे लटकता हà¥à¤†, पà¥â€à¤¯à¥â€à¤µà¥€ की ओर उतर रहा है। 12 जिस में पृयà¥â€à¤µà¥€ के सब पà¥à¤°à¤•à¤¾à¤° के चौपाठऔर रेंगनेवाले जनà¥â€à¤¤à¥ और आकाश के पकà¥à¤•à¥€ थे। 13 और उसे à¤à¤• à¤à¤¸à¤¾ शबà¥â€à¤¦ सà¥à¤¨à¤¾à¤ˆ दिया, कि हे पतरस उठ, मार के खा। 14 परनà¥â€à¤¤à¥ पतरस ने कहा, नहीं पà¥à¤°à¤à¥, कदापि नहीं; कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि मैं ने कà¤à¥€ कोई अपवितà¥à¤° या अशà¥à¤¦à¥à¤§ वसà¥â€à¤¤à¥ नहीं खाई है। 15 फिर दूसरी बार उसे शबà¥â€à¤¦ सà¥à¤¨à¤¾à¤ˆ दिया, कि जो कà¥à¤› परमेशà¥à¤µà¤° ने शà¥à¤¦à¥à¤§ ठहराया है, उसे तू अशà¥à¤¦à¥à¤§ मत कह। 16 तीन बार à¤à¤¸à¤¾ ही हà¥à¤†; तब तà¥à¤°à¤¨à¥â€à¤¤ वह पातà¥à¤° आकाश पर उठा लिया गया।। 17 जब पतरस अपके मन में दà¥à¤¬à¤§à¤¾ कर रहा या, कि यह दरà¥à¤¶à¤¨ जो मैं ने देखा कà¥â€à¤¯à¤¾ है, तो देखो, वे मनà¥à¤·à¥à¤¯ जिनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ कà¥à¤°à¤¨à¥‡à¤²à¤¿à¤¯à¥à¤¸ ने à¤à¥‡à¤œà¤¾ या, शमौन के घर का पता लगाकर डेवढ़ी पर आ खड़े हà¥à¤à¥¤ 18 और पà¥à¤•à¤¾à¤°à¤•à¤° पूछने लगे, कà¥â€à¤¯à¤¾ शमौन जो पतरस कहलाता है, यहीं पाहà¥à¤¨ है 19 पतरस जो उस दरà¥à¤¶à¤¨ पर सोच ही रहा या, कि आतà¥à¥˜à¤¾ ने उस से कहा, देख, तीन मनà¥à¤·à¥à¤¯ तेरी खोज में हैं। 20 सो उठकर नीचे जा, और बेखटके उन के साय हो ले; कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि मैं ही ने उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ à¤à¥‡à¤œà¤¾ है। 21 तब पतरस ने उतरकर उन मनà¥à¤·à¥à¤¯à¥‹à¤‚से कहा; देखो, जिसकी खोज तà¥à¤® कर रहे हो, वह मैं ही हूं; तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥‡ आने का कà¥â€à¤¯à¤¾ कारण है 22 उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा; कà¥à¤°à¤¨à¥‡à¤²à¤¿à¤¯à¥à¤¸ सूबेदार जो धरà¥à¤®à¥€ और परमेशà¥à¤µà¤° से डरनेवाला और सारी यहूदी जाति में सà¥à¤¨à¤¾à¤®à¥€ मनà¥à¤·à¥à¤¯ है, उस ने à¤à¤• पवितà¥à¤° सà¥â€à¤µà¤°à¥à¤—दूत से यह चितावनी पाई है, कि तà¥à¤à¥‡ अपके घर बà¥à¤²à¤¾à¤•à¤° तà¥à¤ से वचन सà¥à¤¨à¥‡à¥¤ 23 तब उस ने उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ à¤à¥€à¤¤à¤° बà¥à¤²à¤¾à¤•à¤° उन की पहà¥à¤¨à¤¾à¤ˆ की।। और दूसरे दिन, वह उनके साय गया; और याफा के à¤à¤¾à¤‡à¤¯à¥‹à¤‚में से कई उसके साय हो लिà¤à¥¤ 24 दूसरे दिन वे कैसरिया में पहà¥à¤‚चे, और कà¥à¤°à¤¨à¥‡à¤²à¤¿à¤¯à¥à¤¸ अपके कà¥à¤Ÿà¥à¤®à¥à¤¬à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚और पà¥à¤°à¤¿à¤¯ मितà¥à¤°à¥‹à¤‚को इकटà¥à¤ े करके उन की बाट जोह रहा या। 25 जब पतरस à¤à¥€à¤¤à¤° आ रहा या, तो कà¥à¤°à¤¨à¥‡à¤²à¤¿à¤¯à¥à¤¸ ने उस से à¤à¥‡à¤‚ट की, और पांवोंपड़के पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤® किया। 26 परनà¥â€à¤¤à¥ पतरस ने उसे उठाकर कहा, खड़ा हो, मैं à¤à¥€ तो मनà¥à¤·à¥à¤¯ हूं। 27 और उसके साय बातचीत करता हà¥à¤† à¤à¥€à¤¤à¤° गया, और बहà¥à¤¤ से लोगोंको इकटà¥à¤ े देखकर। 28 उन से कहा, तà¥à¤® जानते हो, कि अनà¥à¤¯à¤œà¤¾à¤¤à¤¿ की संगति करता या उसके यहां जाना यहूदी के लिथे अधरà¥à¤® है, परनà¥â€à¤¤à¥ परमेशà¥à¤µà¤° ने मà¥à¤à¥‡ बताया है, कि किसी मनà¥à¤·à¥à¤¯ को अपवितà¥à¤° या अशà¥à¤¦à¥à¤§ न कहूं। 29 इसी लिथे मैं जब बà¥à¤²à¤¾à¤¯à¤¾ गया; तो बिना कà¥à¤› कहे चला आया: अब मैं पूछता हूं कि मà¥à¤à¥‡ किस काम के लिथे बà¥à¤²à¤¾à¤¯à¤¾ गया है 30 कà¥à¤°à¤¨à¥‡à¤²à¤¿à¤¯à¥à¤¸ ने कहा; कि इस घड़ी पूरे चार दिन हà¥à¤, कि मैं अपके घर में तीसरे पहर को पà¥à¤°à¤¾à¤°à¥à¤¯à¤¨à¤¾ कर रहा या; कि देखो, à¤à¤• पà¥à¤°à¥‚ष चमकीला वसà¥â€à¤¤à¥à¤° पहिने हà¥à¤, मेरे सामà¥à¤¹à¤¨à¥‡ आ खड़ा हà¥à¤†à¥¤ 31 और कहने लगा, हे कà¥à¤°à¤¨à¥‡à¤²à¤¿à¤¯à¥à¤¸, तेरी पà¥à¤°à¤¾à¤°à¥à¤¯à¤¨à¤¾ सà¥à¤¨ ली गई, और तेरे दान परमेशà¥à¤µà¤° के सामà¥à¤¹à¤¨à¥‡ सà¥à¥˜à¤°à¤£ किठगठहैं। 32 इस लिथे किसी को याफा à¤à¥‡à¤œà¤•à¤° शमौन को जो पतरस कहलाता है, बà¥à¤²à¤¾; वह समà¥à¤¦à¥à¤° के किनारे शमौन चमड़े के धनà¥â€à¤§à¤¾ करनेवाले के घर में पाहà¥à¤¨ है। 33 तब मैं ने तà¥à¤°à¤¨à¥â€à¤¤ तेरे पास लोग à¤à¥‡à¤œà¥‡, और तू ने à¤à¤²à¤¾ किया, जो आ गया: अब हम सब यहां परमेशà¥à¤µà¤° के सामà¥à¤¹à¤¨à¥‡ हैं, ताकि जो कà¥à¤› परमेशà¥à¤µà¤° ने तà¥à¤ से कहा है उसे सà¥à¤¨à¥‡à¤‚। 34 तब पतरस ने मà¥à¤‚ह खोलकर कहा; 35 अब मà¥à¤à¥‡ निशà¥â€à¤šà¤¯ हà¥à¤†, कि परमेशà¥à¤µà¤° किसी का पठनहीं करता, बरन हर जाति में जो उस से डरता और धरà¥à¤® के काम करता है, वह उसे à¤à¤¾à¤¤à¤¾ है। 36 जो वचन उस ने इसà¥â€à¤¤à¥à¤°à¤¾à¤à¤²à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚के पास à¤à¥‡à¤œà¤¾, जब कि उस ने यीशॠमसीह के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ (जो सब का पà¥à¤°à¤à¥ है) शानà¥â€à¤¤à¤¿ का सà¥à¤¸à¤®à¤¾à¤šà¤¾à¤° सà¥à¤¨à¤¾à¤¯à¤¾à¥¤ 37 वह बात तà¥à¤® जानते हो जो यूहनà¥à¤¨à¤¾ के बपतिसà¥à¥˜à¤¾ के पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤° के बाद गलील से आरमà¥à¤ करके सारे यहूदिया में फैल गई। 38 कि परमेशà¥à¤µà¤° ने किस रीति से यीशॠनासरी को पवितà¥à¤° आतà¥à¥˜à¤¾ और सामरà¥à¤¯ से अà¤à¤¿à¤·à¥‡à¤• किया: वह à¤à¤²à¤¾à¤ˆ करता, और सब को जो शैतान के सताठहà¥à¤ थे, अचà¥â€à¤›à¤¾ करता फिरा; कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि परमेशà¥à¤µà¤° उसके साय या। 39 और हम उन सब कामोंके गवाह हैं; जो उस ने यहूदिया के देश और यरूशलेम में à¤à¥€ किà¤, और उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने उसे काठपर लटकाकर मार डाला। 40 उस को परमेशà¥à¤µà¤° ने तीसरे दिन जिलाया, और पà¥à¤°à¤—ट à¤à¥€ कर दिया है। 41 सब लोगोंको नहीं बरन उन गवाहोंको जिनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ परमेशà¥à¤µà¤° ने पहिले से चà¥à¤¨ लिया या, अरà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥â€ हमको जिनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने उसके मरे हà¥à¤“ं में से जी उठने के बाद उसके साय खाया पीया। 42 और उस ने हमें आजà¥à¤žà¤¾ दी, कि लोगोंमें पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤° करो; और गवाही दो, कि यह वही है; जिसे परमेशà¥à¤µà¤° ने जीवतोंऔर मरे हà¥à¤“ं का नà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¥€ ठहराया है। 43 उस की सब à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯à¤¦à¥à¤µà¤•à¥à¤¤à¤¾ गवाही देते हें, कि जो कोई उस पर विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ करेगा, उस को उसके नाम के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ पापोंकी à¤à¤®à¤¾ मिलेगी।। 44 पतरस थे बातें कह ही रहा या, कि पवितà¥à¤° आतà¥à¥˜à¤¾ वचन के सब सà¥à¤¨à¤¨à¥‡à¤µà¤¾à¤²à¥‹à¤‚पर उतर आया। 45 और जितने खतना किठहà¥à¤ विशà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥€ पतरस के साय आठथे, वे सब चकित हà¥à¤ कि अनà¥à¤¯à¤œà¤¾à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚पर à¤à¥€ पवितà¥à¤° आतà¥à¥˜à¤¾ का दान उंडेला गया है। 46 कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ à¤à¤¾à¤‚ति à¤à¤¾à¤‚ति की à¤à¤¾à¤·à¤¾ बोलते और परमेशà¥à¤µà¤° की बड़ाई करते सà¥à¤¨à¤¾à¥¤ 47 इस पर पतरस ने कहा; कà¥â€à¤¯à¤¾ कोई जल की रोक कर सकता है, कि थे बपतिसà¥à¥˜à¤¾ न पाà¤à¤‚, जिनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने हमारी नाई पवितà¥à¤° आतà¥à¥˜à¤¾ पाया है 48 और उस ने आजà¥à¤žà¤¾ दी कि उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ यीशॠमसीह ने नाम में बपतिसà¥à¥˜à¤¾ दिया जाà¤: तब उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने उस से बिनती की कि कà¥à¤› दिन हमारे साय रह।।
1 और पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤à¥‹à¤‚और à¤à¤¾à¤‡à¤¯à¥‹à¤‚ने जो यहूदिया में थे सà¥à¤¨à¤¾, कि अनà¥à¤¯à¤œà¤¾à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ने à¤à¥€ परमेशà¥à¤µà¤° का वचन मान लिया है। 2 और जब पतरस यरूशलेम में आया, तो खतना किठहà¥à¤ लोग उस से वाद-विवाद करने लगे। 3 कि तू ने खतनारिहत लोगोंके यहां जाकर उन से साय खाया। 4 तब पतरस ने उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ आरमà¥à¤ से कà¥à¤°à¤®à¤¾à¤¨à¥à¤¸à¤¾à¤° कह सà¥à¤¨à¤¾à¤¯à¤¾; 5 कि मैं याफा नगर में पà¥à¤°à¤¾à¤°à¥à¤¯à¤¨à¤¾ कर रहा या, और बेसà¥à¤§ होकर à¤à¤• दरà¥à¤¶à¤¨ देखा, कि à¤à¤• पातà¥à¤°, बड़ी चादर के समान चारोंकोनोंसे लटकाया हà¥à¤†, आकाश से उतरकर मेरे पास आया। 6 जब मैं ने उस पर धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ किया, तो पृयà¥â€à¤µà¥€ के चौपाठऔर बनपशॠऔर रेंगनेवाले जनà¥â€à¤¤à¥ और आकाश के पकà¥à¤•à¥€ देखे। 7 और यह शबà¥â€à¤¦ à¤à¥€ सà¥à¤¨à¤¾ कि हे पतरस उठमार और खा। 8 मैं ने कहा, नहीं पà¥à¤°à¤à¥, नहीं, कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि कोई अपवितà¥à¤° या अशà¥à¤¦à¥à¤§ वसà¥â€à¤¤à¥ मेरे मà¥à¤‚ह में कà¤à¥€ नहीं गई। 9 इस के उतà¥à¤¤à¤° में आकाश से दूसरी बार शबà¥â€à¤¦ हà¥à¤†, कि जो कà¥à¤› परमेशà¥à¤µà¤° ने शà¥à¤¦à¥à¤§ ठहराया है, उसे अशà¥à¤¦à¥à¤§ मत कह। 10 तीन बार à¤à¤¸à¤¾ ही हà¥à¤†; तब सब कà¥à¤› फिर आकाश पर खींच लिया गया। 11 और देखो, तà¥à¤°à¤¨à¥â€à¤¤ तीन मनà¥à¤·à¥à¤¯ जो कैसरिया से मेरे पास à¤à¥‡à¤œà¥‡ गठथे, उस घर पर जिस में हम थे, आ खड़े हà¥à¤à¥¤ 12 तब आतà¥à¥˜à¤¾ ने मà¥à¤ से उन के साय बेखटके हो लेने को कहा, और थे छ: à¤à¤¾à¤ˆ à¤à¥€ मेरे साय हो लिà¤; और हम उस मनà¥à¤·à¥à¤¯ के घर में गà¤à¥¤ 13 और उस ने बताया, कि मैं ने à¤à¤• सà¥â€à¤µà¤°à¥à¤—दूत को अपके घर में खड़ा देखा, जिस ने मà¥à¤ से कहा, कि याफा में मनà¥à¤·à¥à¤¯ à¤à¥‡à¤œà¤•à¤° शमौन को जो पतरस कहलाता है, बà¥à¤²à¤µà¤¾ ले। 14 वह तà¥à¤® से à¤à¤¸à¥€ बातें कहेगा, जिन के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ तू और तेरा सारा घराना उदà¥à¤µà¤¾à¤° पाà¤à¤—ा। 15 जब मैं बातें करने लगा, तो पवितà¥à¤° आतà¥à¥˜à¤¾ उन पर उसी रीति से उतरा, जिस रीति से आरमà¥à¤ में हम पर उतरा या। 16 तब मà¥à¤à¥‡ पà¥à¤°à¤à¥ का वह वचन सà¥à¥˜à¤°à¤£ आया; जो उस ने कहा; कि यूहनà¥à¤¨à¤¾ ने तो पानी से बपतिसà¥à¥˜à¤¾ दिया, परनà¥â€à¤¤à¥ तà¥à¤® पवितà¥à¤° आतà¥à¥˜à¤¾ से बपतिसà¥à¥˜à¤¾ पाओगे। 17 सो जब कि परमेशà¥à¤µà¤° ने उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ à¤à¥€ वही दान दिया, जो हमें पà¥à¤°à¤à¥ यीशॠमसीह पर विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ करने से मिला या; तो मैं कौन या जो परमेशà¥à¤µà¤° को रोक सकता 18 यह सà¥à¤¨à¤•à¤°, वे चà¥à¤ª रहे, और परमेशà¥à¤µà¤° की बड़ाई करके कहने लगे, तक तो परमेशà¥à¤µà¤° ने अनà¥à¤¯à¤œà¤¾à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚को à¤à¥€ जीवन के लिथे मन फिराव का दान दिया है।। 19 सो जो लोग उस कà¥â€à¤²à¥‡à¤¶ के मारे जो सà¥â€à¤¤à¤¿à¤«à¤¨à¥à¤¸ के कारण पड़ा या, तितà¥à¤¤à¤° बितà¥à¤¤à¤° हो गठथे, वे फिरते फिरते फीनीके और कà¥à¤ªà¥à¤°à¥à¤¸ और अनà¥â€à¤¤à¤¾à¤•à¤¿à¤¯à¤¾ में पहà¥à¤‚चे; परनà¥â€à¤¤à¥ यहूदियोंको छोड़ किसी और को वचन न सà¥à¤¨à¤¾à¤¤à¥‡ थे। 20 परनà¥â€à¤¤à¥ उन में से कितने कà¥à¤ªà¥à¤°à¥à¤¸à¥€ और कà¥à¤°à¥‡à¤¨à¥€ थे, जो अनà¥â€à¤¤à¤¾à¤•à¤¿à¤¯à¤¾ में आकर यà¥à¤¨à¤¾à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚को à¤à¥€ पà¥à¤°à¤à¥ यीशॠका सà¥à¤¸à¤®à¤šà¤¾à¤° की बातें सà¥à¤¨à¤¾à¤¨à¥‡ लगे। 21 और पà¥à¤°à¤à¥ का हाथ उन पर या, और बहà¥à¤¤ लोग विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ करके पà¥à¤°à¤à¥ की ओर फिरे। 22 तब उन की चरà¥à¤šà¤¾ यरूशलेम की कलीसिया के सà¥à¤¨à¤¨à¥‡ में आई, और उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने बरनबास को अनà¥â€à¤¤à¤¾à¤•à¤¿à¤¯à¤¾ à¤à¥‡à¤œà¤¾à¥¤ 23 वह वहां पहà¥à¤‚चकर, और परमेशà¥à¤µà¤° के अनà¥à¤—à¥à¤°à¤¹ को देखकर आननà¥â€à¤¦à¤¿à¤¤ हà¥à¤†; और सब को उपकेश दिया कि तन मन लगाकर पà¥à¤°à¤à¥ से लिपके रहो। 24 कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि वह à¤à¤• à¤à¤²à¤¾ मनà¥à¤·à¥à¤¯ या; और पवितà¥à¤° आतà¥à¥˜à¤¾ से परिपूरà¥à¤£ या: और और बहà¥à¤¤ से लोग पà¥à¤°à¤à¥ में आ मिले। 25 तब वह शाऊल को ढूंढने के लिथे तरसà¥à¤¸ को चला गया। 26 और जब उन से मिला तो उसे अनà¥â€à¤¤à¤¾à¤•à¤¿à¤¯à¤¾ में लाया, और à¤à¤¸à¤¾ हà¥à¤† कि वे à¤à¤• वरà¥à¤· तक कलीसिया के साय मिलते और बहà¥à¤¤ लोगोंको उपकेश देते रहे, और चेले सब से पहिले अनà¥â€à¤¤à¤¾à¤•à¤¿à¤¯à¤¾ ही में मसीही कहलाà¤à¥¤à¥¤ 27 उनà¥â€à¤¹à¥€à¤‚ दिनोंमें कई à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯à¤¦à¥à¤µà¤•à¥à¤¤à¤¾ यरूशलेम से अनà¥â€à¤¤à¤¾à¤•à¤¿à¤¯à¤¾ में आà¤à¥¤ 28 उन में से अगबà¥à¤¸ नाम à¤à¤• ने खड़े होकर आतà¥à¥˜à¤¾ की पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤£à¤¾ से यह बताया, कि सारे जगत में बड़ा अकाल पकेगा, और वह अकाल कà¥â€à¤²à¥Œà¤¦à¤¿à¤¯à¥à¤¸ के समय में पड़ा। 29 तब चेलोंने ठहराया, कि हर à¤à¤• अपकà¥à¤•à¥€ अपकà¥à¤•à¥€ पूंजी के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° यहूदिया में रहनेवाले à¤à¤¾à¤‡à¤¯à¥‹à¤‚की सेवा के लिथे कà¥à¤› à¤à¥‡à¤œà¥‡à¥¤ 30 और उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने à¤à¤¸à¤¾ ही किया; और बरनबास और शाऊल के हाथ पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨à¥‹à¤‚के पास कà¥à¤› à¤à¥‡à¤œ दिया।।
1 उस समय हेरोदेस राजा ने कलीसिया के कई à¤à¤• वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚को दà¥à¤– देने के लिथे उन पर हाथ डाले। 2 उस ने यूहनà¥à¤¨à¤¾ के à¤à¤¾à¤ˆ याकूब को तलवार से मरवा डाला। 3 और जब उस ने देखा, कि यहूदी लोग इस से आननà¥â€à¤¦à¤¿à¤¤ होते हैं, तो उस ने पतरस को à¤à¥€ पकड़ लिया: वे दिन अखमीरी रोटी के दिन थे। 4 और उस ने उसे पकड़ के बनà¥â€à¤¦à¥€à¤—ृह में डाला, और रखवाली के लिथे, चार चार सिपाहियोंके चार पहरोंमें रखा: इस मनसा से कि फसह के बाद उसे लोगोंके सामà¥à¤¹à¤¨à¥‡ लाà¤à¥¤ 5 सो बनà¥â€à¤¦à¥€à¤—ृह में पतरस की रखवाली हो रही यी; परनà¥â€à¤¤à¥ कलीसिया उसके लिथे लौ लगाकर परमेशà¥à¤µà¤° से पà¥à¤°à¤¾à¤°à¥à¤¯à¤¨à¤¾ कर रही यी। 6 और जब हेरोदेस उसे उन के सामà¥à¤¹à¤¨à¥‡ लाने को या, तो उसी रात पतरस दो जंजीरोंसे बनà¥â€à¤§à¤¾ हà¥à¤†, दो सिपाहियोंके बीच में सो रहा या: और पहरूठदà¥à¤µà¤¾à¤° पर बनà¥â€à¤¦à¥€à¤—ृह की रखवाली कर रहे थे। 7 तो देखो, पà¥à¤°à¤à¥ का à¤à¤• सà¥â€à¤µà¤°à¥à¤—दूत आ खड़ा हà¥à¤†: और उस कोठरी में जà¥à¤¯à¥‹à¤¤à¤¿ चमकी: और उस ने पतरस की पसली पर हाथ मार के उसे जगाया, और कहा; उठ, फà¥à¤°à¤¤à¥€ कर, और उसके हाथ से जंजीरें खà¥à¤²à¤•à¤° गिर पड़ीं। 8 तब सà¥â€à¤µà¤°à¥à¤—दूत ने उस से कहा; कमर बानà¥â€à¤§, और अपके जूते पहिन ले: उस ने वैसा ही किया, फिर उस ने उस से कहा; अपना वसà¥â€à¤¤à¥à¤° पहिनकर मेरे पीछे हो ले। 9 वह निकलकर उसके पीछे हो लिया; परनà¥â€à¤¤à¥ यह न जानता या, कि जो कà¥à¤› सà¥â€à¤µà¤°à¥à¤—दूत कर रहा है, वह सचमà¥à¤š है, बरन यह समà¤à¤¾, कि मैं दरà¥à¤¶à¤¨ देख रहा हूं। 10 तब वे पहिल और दूसरे पहरे से निकलकर उस लोहे के फाटक पर पहà¥à¤‚चे, जो नगर की ओर है; वह उन के लिथे आप से आप खà¥à¤² गया: और वे निकलकर à¤à¤• ही गली होकर गà¤, इतने में रà¥à¤¸à¥â€à¤µà¤—दूत उसे छोड़कर चला गया। 11 तब पतरस ने सचेत होकर कहा; अब मैं ने सच जान लिया कि पà¥à¤°à¤à¥ ने अपना सà¥â€à¤µà¤°à¥à¤—दूत à¤à¥‡à¤œà¤•à¤° मà¥à¤à¥‡ हेरोदेस के हाथ से छà¥à¤¡à¤¼à¤¾ लिया, और यहूदियोंकी सारी आशा तोड़ दी। 12 और यह सोचकर, वह उस यूहनà¥à¤¨à¤¾ की माता मरियम के घर आया, जो मरकà¥à¤¸ कहलाता है; वहां बहà¥à¤¤ लोग इकटà¥à¤ े होकर पà¥à¤°à¤¾à¤°à¥à¤¯à¤¨à¤¾ कर रहे थे। 13 जब उस ने फाटक की खिड़की खटखटाई; तो रूदे नाम à¤à¤• दासी सà¥à¤¨à¤¨à¥‡ को आई। 14 और पतरस का शबà¥â€à¤¦ पहचानकर, उस ने आननà¥â€à¤¦ के मारे फाटक न खोला; परनà¥â€à¤¤à¥ दौड़कर à¤à¥€à¤¤à¤° गई, और बताया कि पतरस दà¥à¤µà¤¾à¤° पर खड़ा है। 15 उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने उस से कहा; तू पागल है, परनà¥â€à¤¤à¥ वह दृà¥à¤¤à¤¾ से बोली, कि à¤à¤¸à¤¾ ही है: तब उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा, उसका सà¥â€à¤µà¤°à¥à¤—दूत होगा। 16 परनà¥â€à¤¤à¥ पतरस खटखटाता ही रहा: सो उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने खिड़की खोली, और उसे देखकर चकित हो गà¤à¥¤ 17 तब उस ने उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ हाथ से सैन किया, कि चà¥à¤ª रहें; और उन को बताया, कि पà¥à¤°à¤à¥ किस रीति से मà¥à¤à¥‡ बनà¥â€à¤¦à¥€à¤—ृह से निकाल लाया है: फिर कहा, कि याकूब और à¤à¤¾à¤‡à¤¯à¥‹à¤‚को यह बात कह देना; तब निकलकर दूसरी जगह चला गया। 18 à¤à¥‹à¤° को सिपाहियोंमें बड़ी हलचल होने लगी, कि पतरस कà¥â€à¤¯à¤¾ हà¥à¤†à¥¤ 19 जब हेरोदेस ने उस की खोज की, और न पाया; तो पहरूओं की जांच करके आजà¥à¤žà¤¾ दी कि वे मार डाले जाà¤à¤‚; और वह यहूदिया को छोड़कर कैसरिया में जा रहा। 20 और वह सूर और सैदा के लोगोंसे बहà¥à¤¤ अपà¥à¤°à¤¸à¤¨à¥à¤¨ या; सो वे à¤à¤• चितà¥à¤¤ होकर उसके पास आठऔर बलासà¥â€à¤¤à¥à¤¸ को, जो राजा का à¤à¤• करà¥à¤®à¤šà¤¾à¤°à¥€ या, मनाकर मेल करता चाहा; कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि राजा के देश से उन के देश का पालन पोषण होता या। 21 और ठहराठहà¥à¤ दिन हेरोदेस राजवसà¥â€à¤¤à¥à¤° पहिनकर सिंहासन पर बैठा; और उन को वà¥à¤¯à¤¾à¤–à¥à¤¯à¤¾à¤¨ देने लगा। 22 और लोग पà¥à¤•à¤¾à¤° उठे, कि यह तो मनà¥à¤·à¥à¤¯ का नहीं परमेशà¥à¤µà¤° का शबà¥â€à¤¦ है। 23 उसी à¤à¤£ पà¥à¤°à¤à¥ के à¤à¤• सà¥â€à¤µà¤°à¥à¤—दूत ने तà¥à¤°à¤¨à¥â€à¤¤ उसे मारा, कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि उस ने परमशà¥â€à¥‡à¤µà¤° की महिमा नही की और वह कीड़े पड़के मर गया।। 24 परनà¥â€à¤¤à¥ परमेशà¥à¤µà¤° का वचन बà¥à¤¤à¤¾ और फैलता गया।। 25 जब बरनबास और शाऊल अपकà¥à¤•à¥€ सेवा पूरी कर चà¥à¤•à¥‡, तो यूहनà¥à¤¨à¤¾ को जो मरकà¥à¤¸ कहलाता है साय लेकर यरूशलेम से लौटे।।
1 अनà¥â€à¤¤à¤¾à¤•à¤¿à¤¯à¤¾ की कलीसिया में कितने à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯à¤¦à¥à¤µà¤•à¥à¤¤à¤¾ और उपकेशक थे; अरà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥â€ बरनबास और शमौन जो नीगर कहलाता है; और लूकियà¥à¤¸ कà¥à¤°à¥‡à¤¨à¥€, और देश की चौयाई के राजा हेरोदेस का दूधà¤à¤¾à¤ˆ मनाहेम और शाऊल। 2 जब वे उपवास सहित पà¥à¤°à¤à¥ की उपासना कर रहे या, तो पवितà¥à¤° आतà¥à¥˜à¤¾ ने कहा; मेरे निमितà¥à¤¤ बरनबास और शाऊल को उस काम के लिथे अलग करो जिस के लिथे मैं ने उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ बà¥à¤²à¤¾à¤¯à¤¾ है। 3 तब उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने उपवास और पà¥à¤°à¤¾à¤°à¥à¤¯à¤¨à¤¾ करके और उन पर हाथ रखकर उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ विदा किया।। 4 सो वे पवितà¥à¤° आतà¥à¥˜à¤¾ के à¤à¥‡à¤œà¥‡ हà¥à¤ सिलूकिया को गà¤; और वहां से जहाज पर चढ़कर कà¥à¤ªà¥à¤°à¥à¤¸ को चले। 5 और सलमीस में पहà¥à¤‚चकर, परमेशà¥à¤µà¤° का वचन यहूदियोंकी अराधनालयोंमें सà¥à¤¨à¤¾à¤¯à¤¾; और यूहनà¥à¤¨à¤¾ उन का सेवक या। 6 और उस सारे टापू में होते हà¥à¤, पाफà¥à¤¸ तक पहà¥à¤‚चे: वहां उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ बार-यीशॠनाम à¤à¤• यहूदी टोनà¥â€à¤¹à¤¾ और फूठा à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯à¤¦à¥à¤µà¤•à¥à¤¤à¤¾ मिला। 7 वह सिरिगयà¥à¤¸ पौलà¥à¤¸ सूबे के साय या, जो बà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿à¤®à¤¾à¤¨ पà¥à¤°à¥‚ष या: उस ने बरनबास और शाऊल को अपके पास बà¥à¤²à¤¾à¤•à¤° परमेशà¥à¤µà¤° का वचन सà¥à¤¨à¤¨à¤¾ चाहा। 8 परनà¥â€à¤¤à¥ इलीमास टोनà¥â€à¤¹à¥‡ ने, कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि यही उसके नाम का अरà¥à¤¯ है उन का सामà¥à¤¹à¤¨à¤¾ करके, सूबे को विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ करने से रोकता चाहा। 9 तब शाऊल ने जिस का नाम पौलà¥à¤¸ à¤à¥€ है, पवितà¥à¤° आतà¥à¥˜à¤¾ से परिपूरà¥à¤£ हो उस की ओर टकटकी लगाकर कहा। 10 हे सारे कपट और सब चतà¥à¤°à¤¾à¤ˆ से à¤à¤°à¥‡ हà¥à¤ शैतान की सनà¥â€à¤¤à¤¾à¤¨, सकल धरà¥à¤® के बैरी, कà¥â€à¤¯à¤¾ तू पà¥à¤°à¤à¥ के सीधे मारà¥à¤—ोंको टेढ़ा करना न छोड़ेगा 11 अब देख, पà¥à¤°à¤à¥ का हाथ तà¥à¤ पर लगा है; और तू कà¥à¤› समय तक अनà¥â€à¤§à¤¾ रहेगा और सूरà¥à¤¯ को न देखेगा: तब तà¥à¤°à¤¨à¥â€à¤¤ धà¥à¤¨à¥â€à¤§à¤²à¤¾à¤ˆ और अनà¥â€à¤§à¥‡à¤°à¤¾ उस पर छा गया, और वह इधर उधर टटोलने लगा, ताकि कोई उसका हाथ पकड़के ले चले। 12 तब सूबे ने जो कà¥à¤› हà¥à¤† या, देखकर और पà¥à¤°à¤à¥ के उपकेश से चकित होकर विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ किया।। 13 पौलà¥à¤¸ और उसके सायी पाफà¥à¤¸ से जहाज खोलकर पंफूलिया के पिरगा में आà¤: और यूहनà¥à¤¨à¤¾ उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ छोड़कर यरूशलेम को लौट गया। 14 और पिरगा से आगे बढ़कर के पिसिदिया के अनà¥â€à¤¤à¤¾à¤•à¤¿à¤¯à¤¾ में पहà¥à¤‚चे; और सबà¥â€à¤¤ के दिन अराधनालय में जाकर बैठगà¤à¥¤ 15 और वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¯à¤¾ और à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯à¤¦à¥à¤µà¤•à¥à¤¤à¤¾à¤“ं की पà¥à¤¸à¥â€à¤¤à¤• के पढ़ने के बाद सà¤à¤¾ के सरदारोंने उन के पास कहला à¤à¥‡à¤œà¤¾, कि हे à¤à¤¾à¤‡à¤¯à¥‹à¤‚, यदि लोगोंके उपकेश के लिथे तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥‡ मन में कोई बात हो तो कहो। 16 तब पौलà¥à¤¸ ने खड़े होकर और हाथ से सैन करके कहा; हे इसà¥â€à¤¤à¥à¤°à¤¾à¤à¤²à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚, और परमेशà¥à¤µà¤° से डरनेवालों, सà¥à¤¨à¥‹à¥¤ 17 इन इसà¥â€à¤¤à¥à¤°à¤¾à¤à¤²à¥€ लोगोंके परमेशà¥à¤µà¤° ने हमारे बापदादोंको चà¥à¤¨ लिया, और जब थे मिसर देश में परदेशी होकर रहते थे, तो उन की उनà¥à¤¨à¤¤à¤¿ की; और बलवनà¥â€à¤¤ à¤à¥à¤œà¤¾ से निकाल लाया। 18 और वह कोई चालीस वरà¥à¤· तक जंगल में उन की सहता रहा। 19 और कनान देश में सात जातियोंका नाश करके उन का देश कोई साढ़े चार सौ वरà¥à¤· में इन की मीरास में कर दिया। 20 इस के बाद उस ने सामà¥à¤à¤² à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯à¤¦à¥à¤µà¤•à¥à¤¤à¤¾ तक उन में नà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¥€ ठहराà¤à¥¤ 21 उसके बाद उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने à¤à¤• राजा मांगा: तब परमेशà¥à¤µà¤° ने चालीस वषै के लिथे बिनà¥à¤¯à¤¾à¤®à¥€à¤¨ के गोतà¥à¤° में से à¤à¤• मनà¥à¤·à¥à¤¯ अरà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥â€ कीश के पà¥à¤¤à¥à¤° शाऊल को उन पर राजा ठहराया। 22 फिर उसे अलग करके दाऊद को उन का राजा बनाया; जिस के विषय में उस ने गवाही दी, कि मà¥à¤à¥‡ à¤à¤• मनà¥à¤·à¥à¤¯ यिशै का पà¥à¤¤à¥à¤° दाऊद, मेरे मन के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° मिल गया है। वही मेरे सारी इचà¥â€à¤›à¤¾ पूरी करेगा। 23 इसी के वंश में से परमेशà¥à¤µà¤° ने अपकà¥à¤•à¥€ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤œà¥à¤žà¤¾ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° इसà¥â€à¤¤à¥à¤°à¤¾à¤à¤² के पास à¤à¤• उदà¥à¤§à¤¾à¤°à¤•à¤°à¥à¤¤à¤¾, अरà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥â€ यीशॠको à¤à¥‡à¤œà¤¾à¥¤ 24 जिस के आने से पहिले यूहनà¥à¤¨à¤¾ ने सब इसà¥â€à¤¤à¥à¤°à¤¾à¤à¤²à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚को मन फिराव के बपतिसà¥à¥˜à¤¾ का पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤° किया। 25 और जब यूहनà¥à¤¨à¤¾ अपना दौर पूरा करने पर या, तो उस ने कहा, तà¥à¤® मà¥à¤à¥‡ कà¥â€à¤¯à¤¾ समà¤à¤¤à¥‡ हो मैं वह नहीं! बरन देखो, मेरे बाद à¤à¤• आनेवाला है, जिस के पांवोंकी जूती मैं खोलने के योगà¥à¤¯ नहीं। 26 हे à¤à¤¾à¤‡à¤¯à¥‹, तà¥à¤® जो इबà¥à¤°à¤¾à¤¹à¥€à¤® की सनà¥â€à¤¤à¤¾à¤¨ हो; और तà¥à¤® जो परमेशà¥à¤µà¤° से डरते हो, तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥‡ पास इस उदà¥à¤§à¤¾à¤° का वचन à¤à¥‡à¤œà¤¾ गया है। 27 कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि यरूशलेम के रहनेवालोंऔर उनके सरदारोंने, न उसे पहचाना, और न à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯à¤¦à¥à¤µà¤•à¥à¤¤à¤¾à¤“ं की बातें समà¤à¥€; जो हर सबà¥â€à¤¤ के दिन पढ़ी जाती हैं, इसलिथे उसे दोषी ठहराकर उन को पूरा किया। 28 उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने मार डालने के योगà¥à¤¯ कोई दोष उस में ने पाया, तौà¤à¥€ पीलातà¥à¤¸ से बिनती की, कि वह मार डाला जाà¤à¥¤ 29 और जब उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने उसके विषय में लिखी हà¥à¤ˆ सब बातें पूरी की, तो उसे कà¥à¤°à¥‚स पर से उतार कर कबà¥à¤° में रखा। 30 परनà¥â€à¤¤à¥ परमेशà¥à¤µà¤° ने उसे मरे हà¥à¤“ं में से जिलाया। 31 और वह उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ जो उसके साय गलील से यरूशलेम आठथे, बहà¥à¤¤ दिनोंतक दिखाई देता रहा; लोगोंके सामà¥à¤¹à¤¨à¥‡ अब वे à¤à¥€ उसके गवाह हैं। 32 और हम तà¥à¤®à¥à¤¹à¥‡à¤‚ उस पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤œà¥à¤žà¤¾ के विषय में, जो बापदादोंसे की गई यी, यह सà¥à¤¸à¤®à¤¾à¤šà¤¾à¤° सà¥à¤¨à¤¾à¤¤à¥‡ हैं। 33 कि परमेशà¥à¤µà¤° ने यीशॠको जिलाकर, वही पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤œà¥à¤žà¤¾ हमारी सनà¥â€à¤¤à¤¾à¤¨ के लिथे पूरी की, जैसा दूसरे à¤à¤œà¤¨ में à¤à¥€ लिखा है, कि तू मेरा पà¥à¤¤à¥à¤° है; आज मैं ही ने तà¥à¤à¥‡ जनà¥à¥˜à¤¾à¤¯à¤¾ है। 34 और उसके इस रीति से मरे हà¥à¤“ं में से जिलाने के विषय में à¤à¥€, कि वह कà¤à¥€ न सड़े, उस ने योंकहा है; कि मैं दाऊद पर की पवितà¥à¤° और अचल कृपा तà¥à¤® पर करूंगा। 35 इसलिथे उस ने à¤à¤• और à¤à¤œà¤¨ में à¤à¥€ कहा है; कि तू अपके पवितà¥à¤° जन को सड़ने न देगा। 36 कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि दाऊद तो परमेशà¥à¤µà¤° की इचà¥â€à¤›à¤¾ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° अपके समय में सेवा करके सो गया; और अपके बापदादोंमें जा मिला; और सड़ à¤à¥€ गया। 37 परनà¥â€à¤¤à¥ जिस को परमेशà¥à¤µà¤° ने जिलाया, वह सड़ने नहीं पाया। 38 इसलिथे, हे à¤à¤¾à¤‡à¤¯à¥‹; तà¥à¤® जान लो कि इसी के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ पापोंकी à¤à¤®à¤¾ का समाचार तà¥à¤®à¥à¤¹à¥‡à¤‚ दिया जाता है। 39 और जिन बातोंसे तà¥à¤® मूसा की वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¯à¤¾ के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ निरà¥à¤¦à¥‹à¤· नहीं ठहर सकते थे, उनà¥â€à¤¹à¥€à¤‚ सब से हर à¤à¤• विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ करनेवाला उसके दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ निरà¥à¤¦à¥‹à¤· ठहरता है। 40 इसलिथे चौकस रहो, à¤à¤¸à¤¾ न हो, कि जो à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯à¤¦à¥à¤µà¤•à¥à¤¤à¤¾à¤“ं की पà¥à¤¸à¥â€à¤¤à¤• में आया है, 41 तà¥à¤® पà¥à¤° à¤à¥€ आ पके कि हे निनà¥â€à¤¦à¤¾ करनेवालो, देखो, और चकित हो, और मिट जाओ; कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि मैं तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥‡ दिनोंमें à¤à¤• काम करता हूं; à¤à¤¸à¤¾ काम, कि यदि कोई तà¥à¤® से उसकी चरà¥à¤šà¤¾ करे, तो तà¥à¤® कà¤à¥€ पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤¤à¤¿ न करोगे।। 42 उन के बाहर निकलते समय लोग उन से बिनती करने लगे, कि अगले सबà¥â€à¤¤ के दिन हमें थे बातें फिर सà¥à¤¨à¤¾à¤ˆ जाà¤à¤‚। 43 और जब सà¤à¤¾ उठगई तो यहूदियोंऔर यहूदी मत में आठहà¥à¤ à¤à¤•à¥à¤¤à¥‹à¤‚में से बहà¥à¤¤à¥‡à¤°à¥‡ पौलà¥à¤¸ और बरनबास के पीछे हो लिà¤; और उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने उन से बातें करके समà¤à¤¾à¤¯à¤¾, कि परमेशà¥à¤µà¤° के अनà¥à¤—à¥à¤°à¤¹ में बने रहो।। 44 अगले सबà¥â€à¤¤ के दिन नगर के पà¥à¤°à¤¾à¤¯: सब लोग परमेशà¥à¤µà¤° का वचन सà¥à¤¨à¤¨à¥‡ को इकटà¥à¤ े हो गà¤à¥¤ 45 परनà¥â€à¤¤à¥ यहूदी à¤à¥€à¤¡à¤¼ को देखकर डाह से à¤à¤° गà¤, और निनà¥â€à¤¦à¤¾ करते हà¥à¤ पौलà¥à¤¸ की बातोंके विरोध में बोलने लगे। 46 तब पोलà¥à¤¸ और बरनबास ने निडर होकर कहा, अवशà¥à¤¯ या, कि परमेशà¥à¤µà¤° का वचन पहिले तà¥à¤®à¥à¤¹à¥‡à¤‚ सà¥à¤¨à¤¾à¤¯à¤¾ जाता: परनà¥â€à¤¤à¥ जब कि तà¥à¤® उसे दूर करते हो, और अपके को अननà¥â€à¤¤ जीवन के योगà¥à¤¯ नहीं ठहराते, तो देखो, हम अनà¥à¤¯à¤œà¤¾à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚की ओर फिरते हैं। 47 कà¥â€à¤¯à¥‹à¤•à¤¿à¤‚ पà¥à¤°à¤à¥ ने हमें यह आजà¥à¤žà¤¾ दी है; कि मै। ने तà¥à¤à¥‡ अनà¥à¤¯à¤¾à¤œà¤¾à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚के लिथे जà¥à¤¯à¥‹à¤¤à¤¿ ठहराया है; ताकि तू पृयà¥â€à¤µà¥€ की छोर तक उदà¥à¤§à¤¾à¤° का दà¥à¤µà¤¾à¤° हो। 48 यह सà¥à¤¨à¤•à¤° अनà¥à¤¯à¤œà¤¾à¤¤à¤¿ आननà¥â€à¤¦à¤¿à¤¤ हà¥à¤, और परमेशà¥à¤µà¤° के वचन की बड़ाई करने लगे: और जितने अननà¥â€à¤¤ जीवन के लिथे ठहराठगठथे, उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ किया। 49 तब पà¥à¤°à¤à¥ का वचन उस सारे देश में फैलने लगा। 50 परनà¥â€à¤¤à¥ यहूदियोंने à¤à¤•à¥à¤¤ और कà¥à¤²à¥€à¤¨ सà¥â€à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚को और नगर के बड़े लोगोंको उसकाया, और पौलà¥à¤¸ और बरनबास पर उपदà¥à¤°à¤µ करवाकर उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ अपके सिवानोंसे निकाल दिया। 51 तब वे उन के सामà¥à¤¹à¤¨à¥‡ अपके पांवोंकी धूल फाड़कर इकà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¥à¤® को गà¤à¥¤ 52 और चेले आननà¥â€à¤¦ से और पवितà¥à¤° आतà¥à¥˜à¤¾ से परिपूरà¥à¤£ होते रहे।।
1 इकà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¥à¤® में à¤à¤¸à¤¾ हà¥à¤† कि वे यहूदियोंकी आराधनालय में साय साय गà¤, और à¤à¤¸à¥€ बातें की, कि यहूदियोंऔर यूनानियोंदोनोंमें से बहतोंने विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ किया। 2 परनà¥â€à¤¤à¥ न माननेवाले यहूदियोंने अनà¥à¤¯à¤œà¤¾à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚के मन à¤à¤¾à¤‡à¤¯à¥‹à¤‚के विरोध में उसकाà¤, और बिगाड़ कर दिà¤à¥¤ 3 और वे बहà¥à¤¤ दिन तक वहां रहे, और पà¥à¤°à¤à¥ के à¤à¤°à¥‹à¤¸à¥‡ पर हियाव से बातें करते थे: और वह उन के हाथोंसे चिनà¥â€à¤¹ और अदà¥à¤à¥à¤¤ काम करवाकर अपके अनà¥à¤—à¥à¤°à¤¹ के वचन पर गवाही देता या। 4 परनà¥â€à¤¤à¥ नगर के लोगोंमें फूट पड़ गई यी; इस से कितने तो यहूदियोंकी ओर, और कितने पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤à¥‹à¤‚की ओर हो गà¤à¥¤ 5 परनà¥â€à¤¤à¥ जब अनà¥à¤¯à¤œà¤¾à¤¤à¤¿ और यहूदी उन का अपमान और उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ पतà¥à¤¯à¤°à¤µà¤¾à¤¹ करने के लिथे अपके सरदारोंसमत उन पर दोड़े। 6 तो वे इस बात को जान गा, और लà¥à¤•à¤¾à¤‰à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ के लà¥à¤¸à¥â€à¤¤à¥à¤°à¤¾ और दिरबे नगरोंमें, और आसपास के देश में à¤à¤¾à¤— गà¤à¥¤ 7 और वहां सà¥à¤¸à¤®à¤¾à¤šà¤¾à¤° सà¥à¤¨à¤¾à¤¨à¥‡ लगे।। 8 लà¥à¤¸à¥â€à¤¤à¥à¤°à¤¾ में à¤à¤• मनà¥à¤·à¥à¤¯ बैठा या, जो पांवोंका निरà¥à¤¬à¤² या: वह जनà¥à¥˜ ही से लंगड़ा या, और कà¤à¥€ न चला या। 9 वह पौलà¥à¤¸ को बातें करते सà¥à¤¨ रहा या और इस ने उस की ओर टकटकी लगाकर देखा कि इस को चंगा हो जाने का विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ है। 10 और ऊंचे शबà¥â€à¤¦ से कहा, अपके पांवोंके बल सीधा खड़ा हो: तब वह उछलकर चलने फिरने लगा। 11 लोगोंने पौलà¥à¤¸ का यह काम देखकर लà¥à¤•à¤¾à¤‰à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ à¤à¤¾à¤·à¤¾ में ऊंचे शबà¥â€à¤¦ से कहा; देवता हमारे पास उतर आठहैं। 12 और उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने बरनबास को जà¥à¤¯à¥‚स, और पौलà¥à¤¸ को हिरमेस कहा, कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि यह बातें करने में मà¥à¤–à¥à¤¯ या। 13 और जà¥à¤¯à¥‚स के उस मनà¥â€à¤¦à¤¿à¤° का पà¥à¤œà¤¾à¤°à¥€ जो उस के नगर के सामà¥à¤¹à¤¨à¥‡ या, बैल और फूलोंके हार फाटकोंपर लाकर लोगोंके साय बलिदान करना चाहता या। 14 परनà¥â€à¤¤à¥ बरनबास और पौलà¥à¤¸ पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤à¥‹à¤‚ने जब सà¥à¤¨à¤¾, तो अपके कपके फाड़े, और à¤à¥€à¤¡à¤¼ में लपक गà¤, और पà¥à¤•à¤¾à¤°à¤•à¤° कहने लगे; हे लोगो तà¥à¤® कà¥â€à¤¯à¤¾ करते हो 15 हम à¤à¥€ तो तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥‡ समान दà¥:ख-सà¥à¤– à¤à¥‹à¤—ी मनà¥à¤·à¥à¤¯ हैं, और तà¥à¤®à¥à¤¹à¥‡à¤‚ सà¥à¤¸à¤®à¤¾à¤šà¤¾à¤° सà¥à¤¨à¤¾à¤¤à¥‡ हैं, कि तà¥à¤® इन वà¥à¤¯à¤°à¥à¤¯ वसà¥â€à¤¤à¥à¤“ं से अलग होकर जीवते परमेशà¥à¤µà¤° की ओर फिरो, जिस ने सà¥â€à¤µà¤°à¥à¤— और पृयà¥â€à¤µà¥€ और समà¥à¤¦à¥à¤° और जो कà¥à¤› उन में है बनाया। 16 उस ने बीते समयोंमें सब जातियोंको अपके अपके मारà¥à¤—ोंमें चलने दिया। 17 तौà¤à¥€ उस ने अपके आप को बे-गवाह न छोड़ा; किनà¥â€à¤¤à¥ वह à¤à¤²à¤¾à¤ˆ करता रहा, और आकाश से वरà¥à¤·à¤¾ और फलवनà¥â€à¤¤ ऋतॠदेकर, तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥‡ मन को à¤à¥‹à¤œà¤¨ और आननà¥â€à¤¦ से à¤à¤°à¤¤à¤¾ रहा। 18 यह कहकर à¤à¥€ उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने लोगोंको किठनता से रोका कि उन के लिथे बलिदान न करें।। 19 परनà¥â€à¤¤à¥ कितने यहूदियोंने अनà¥â€à¤¤à¤¾à¤•à¤¿à¤¯à¤¾ और इकà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤® से आकर लोगोंको अपकà¥à¤•à¥€ ओर कर लिया, और पौलà¥à¤¸ को पतà¥à¤¯à¤°à¤µà¤¾à¤¹ किया, और मरा समà¤à¤•à¤° उसे नगर के बाहर घसीट ले गà¤à¥¤ 20 पर जब चेले उस की चारोंओर आ खड़े हà¥à¤, तो वह उठकर नगर में गया और दूसरे दिन बरनबास के साय दिरबे को चला गया। 21 और वे उस नगर के लोगोंको सà¥à¤¸à¤®à¤¾à¤šà¤¾à¤° सà¥à¤¨à¤¾à¤•à¤°, और बहà¥à¤¤ से चेले बनाकर, लà¥à¤¸à¥â€à¤¤à¥à¤°à¤¾ और इकà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤® और अनà¥â€à¤¤à¤¾à¤•à¤¿à¤¯à¤¾ को लौट आà¤à¥¤ 22 और चेलोंके मन को सà¥à¤¯à¤¿à¤° करते रहे और यह उपकेश देते थे, कि हमें बड़े कà¥â€à¤²à¥‡à¤¶ उठाकर परमेशà¥à¤µà¤° के राजà¥à¤¯ में पà¥à¤°à¤µà¥‡à¤¶ करना होगा। 23 और उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने हर à¤à¤• कलीसिया में उन के लिथे पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ ठहराà¤, और उपवास सहित पà¥à¤°à¤¾à¤°à¥à¤¯à¤¨à¤¾ करके, उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ पà¥à¤°à¤à¥ के हाथ सौंपा जिस पर उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ किया या। 24 और पिसिदिया से होते हà¥à¤ वे पंफूलिया में पहà¥à¤‚चे; 25 और पिरगा में वचन सà¥à¤¨à¤¾à¤•à¤° अतà¥à¤¤à¤²à¤¿à¤¯à¤¾ में आà¤à¥¤ 26 और वहां से जहाज से अनà¥â€à¤¤à¤¾à¤•à¤¿à¤¯à¤¾ में आà¤, जहां से वे उस काम के लिथे जो उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने पूरा किया या परमेशà¥à¤µà¤° के अनà¥à¤—à¥à¤°à¤¹ पर सौंपे गठथे। 27 वहां पहà¥à¤‚चकर, उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने कलीसिया इकटà¥à¤ ी की और बताया, कि परमेशà¥à¤µà¤° ने हमारे साय होकर कैसे बड़े बड़े काम किà¤! और अनà¥à¤¯à¤œà¤¾à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚के लिथे विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ का दà¥à¤µà¤¾à¤° खोल दिया। 28 और वे चेलोंके साय बहà¥à¤¤ दिन तक रहे।।
1 फिर कितने लोग यहूदिया से आकर à¤à¤¾à¤‡à¤¯à¥‹à¤‚को सिखाने लगे कि यदि मूसा की रीति पर तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¤¾ खतना न हो तो तà¥à¤® उदà¥à¤§à¤¾à¤° नहीं पा सकते। 2 जब पौलà¥à¤¸ और बरनबास का उन से बहà¥à¤¤ फगड़ा और वाद-विवाद हà¥à¤† तो यह ठहराया गया, कि पौलà¥à¤¸ और बरनबास, और हम में से कितने और वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ इस बात के विषय में यरूशलेम को पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤à¥‹à¤‚और पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨à¥‹à¤‚के पास जांà¤à¥¤ 3 सो मणà¥â€à¤¡à¤²à¥€ ने उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ कà¥à¤› दूर तक पहà¥à¤‚चाया; और वे फीनीके ओर सामरिया से होते हà¥à¤ अनà¥à¤¯à¤œà¤¾à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚के मन फेरने का समाचार सà¥à¤¨à¤¾à¤¤à¥‡ गà¤, और सब à¤à¤¾à¤‡à¤¯à¥‹à¤‚को बहà¥à¤¤ आननà¥â€à¤¦à¤¿à¤¤ किया। 4 जब यरूशलेम में पहà¥à¤‚चे, तो कलीसिया और पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤ और पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ उन से आननà¥â€à¤¦ क ेसाय मिले, और उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने बताया कि परमेशà¥à¤µà¤° ने उन के साय होकर कैसे कैसे काम किठथे। 5 परनà¥â€à¤¤à¥ फरीसियोंके पंय में से जिनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ किया या, उन में से कितनोंने उठकर कहा, कि उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ खतना कराना और मूसा की वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¯à¤¾ को मानने की आजà¥à¤žà¤¾ देना चाहिà¤à¥¤ 6 तब पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤ और पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ इस बात के विषय में विचार करने के लिथे इकटà¥à¤ े हà¥à¤à¥¤ 7 तब पतरस ने बहà¥à¤¤ वाद-विवाद के बाद खड़े होकर उन से कहा।। हे à¤à¤¾à¤‡à¤¯à¥‹, तà¥à¤® जानते हो, कि बहà¥à¤¤ दिन हà¥à¤, कि परमेशà¥à¤µà¤° ने तà¥à¤® में से मà¥à¤à¥‡ चà¥à¤¨ लिया, कि मेरे मà¥à¤‚ह से अनà¥à¤¯à¤œà¤¾à¤¤à¤¿ सà¥à¤¸à¤®à¤¾à¤šà¤¾à¤° का वचन सà¥à¤¨à¤•à¤° विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ करें। 8 और मन के जांचनेवाले परमेशà¥à¤µà¤° ने उन को à¤à¥€ हमारी नाई पवितà¥à¤° आतà¥à¥˜à¤¾ देकर उन की गवाही दी। 9 और विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ उन के मन शà¥à¤¦à¥à¤§ करके हम में और उन में कà¥à¤› à¤à¥‡à¤¦ न रखा। 10 तो अब तà¥à¤® कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚परमेशà¥à¤µà¤° की पकà¥à¤•à¥€à¤à¤¾ करते हो कि चेलोंकी गरदन पर à¤à¤¸à¤¾ जूआ रखो, जिसे न हमारे बापदादे उठा सके थे और न हम उठा सकते। 11 हां, हमारा यह तो निशà¥â€à¤šà¤¯ है, कि जिस रीति से वे पà¥à¤°à¤à¥ यीशॠके अनà¥à¤—à¥à¤°à¤¹ से उदà¥à¤§à¤¾à¤° पाà¤à¤‚गे; उसी रीति से हम à¤à¥€ पाà¤à¤‚गे।। 12 तब सारी सà¤à¤¾ चà¥à¤ªà¤šà¤¾à¤ª होकर बरनबास और पौलà¥à¤¸ की सà¥à¤¨à¤¨à¥‡ लगी, कि परमेशà¥à¤µà¤° ने उन के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ अनà¥à¤¯à¤œà¤¾à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚में कैसे कैसे चिनà¥â€à¤¹, और अदà¥à¤à¥à¤¤ काम दिखाà¤à¥¤ 13 जब वे चà¥à¤ª हà¥à¤, तो याकूब कहने लगा, कि ।। 14 हे à¤à¤¾à¤‡à¤¯à¥‹, मेरी सà¥à¤¨à¥‹: शमौन ने बताया, कि परमेशà¥à¤µà¤° ने पहिले पहिल अनà¥à¤¯à¤œà¤¾à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚पर कैसी कृपादृषà¥â€à¤Ÿà¤¿ की, कि उन में से अपके नाम के लिथे à¤à¤• लोग बना ले। 15 और इस से à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯à¤¦à¥à¤µà¤•à¥à¤¤à¤¾à¤“ं की बातें मिलती हैं, जैसा लिखा है, कि। 16 इस के बाद मैं फिर आकर दाऊद का गिरा हà¥à¤† डेरा उठाऊंगा, और उसके खंडहरोंको फिर बनाऊंगा, और उसे खड़ा करूंगा। 17 इसलिथे कि शेष मनà¥à¤·à¥à¤¯, अरà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥â€ सब अनà¥à¤¯à¤œà¤¾à¤¤à¤¿ जो मेरे नाम के कहलाते हैं, पà¥à¤°à¤à¥ को ढूंढें। 18 यह वही पà¥à¤°à¤à¥ कहता है जो जगत की उतà¥â€à¤ªà¤¤à¥à¤¤à¤¿ से इन बातोंका समाचार देता आया है। 19 इसलिथे मेरा विचार यह है, कि अनà¥à¤¯à¤œà¤¾à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚में से जो लोग परमेशà¥à¤µà¤° की ओर फिरते हैं, हम उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ दà¥:ख न दें। 20 परनà¥â€à¤¤à¥ उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ लिख à¤à¥‡à¤‚जें, कि वे मूरतोंकी अशà¥à¤¦à¥à¤§à¤¤à¤¾à¤“ं और वà¥à¤¯à¤à¤¿à¤šà¤¾à¤° और गला घोंटे हà¥à¤“ं के मांस से और लोहू से पके रहें। 21 कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥‡ समय से नगर नगर मूसा की वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¯à¤¾ के पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤° करनेवाले होते चले आठहै, और वह हर सबà¥â€à¤¤ के दिन अराधनालय में पढ़ी जाती है। 22 तब सारी कलीसिया सहित पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤à¥‹à¤‚और पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨à¥‹à¤‚को अचà¥â€à¤›à¤¾ लगा, कि अपके में से कई मनà¥à¤·à¥à¤¯à¥‹à¤‚को चà¥à¤¨à¥‡à¤‚, अरà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥â€ यहूदा, जो बरसबà¥â€à¤¬à¤¾ कहलाता है, और सीलास को जो à¤à¤¾à¤‡à¤¯à¥‹à¤‚में मà¥à¤–िया थे; और उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ पौलà¥à¤¸ और बरनबास के साय अनà¥â€à¤¤à¤¾à¤•à¤¿à¤¯à¤¾ को à¤à¥‡à¤œà¥‡à¤‚। 23 और उन के हाथ यह लिख à¤à¥‡à¤œà¤¾, कि अनà¥â€à¤¤à¤¾à¤•à¤¿à¤¯à¤¾ और सूरिया और किलिकिया के रहनेवाले à¤à¤¾à¤‡à¤¯à¥‹à¤‚को जो अनà¥à¤¯à¤œà¤¾à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚में से हैं, पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤à¥‹à¤‚और पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ à¤à¤¾à¤‡à¤¯à¥‹à¤‚का नमसà¥â€à¤•à¤¾à¤°! 24 हम ने सà¥à¤¨à¤¾ है, कि हम में से कितनोंने वहां जाकर, तà¥à¤®à¥à¤¹à¥‡à¤‚ अपकà¥à¤•à¥€ बातोंसे घबरा दिया; और तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥‡ मन उलट दिठहैं परनà¥â€à¤¤à¥ हम ने उन को आजà¥à¤žà¤¾ नहीं दी यी। 25 इसलिथे हम ने à¤à¤• चितà¥à¤¤ होकर ठीक समà¤à¤¾, कि चà¥à¤¨à¥‡ हà¥à¤ मनà¥à¤·à¥à¤¯à¥‹à¤‚को अपके पà¥à¤¯à¤¾à¤°à¥‡ बरनबास और पौलà¥à¤¸ के साय तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥‡ पास à¤à¥‡à¤œà¥‡à¤‚। 26 थे तो à¤à¤¸à¥‡ मनà¥à¤·à¥à¤¯ हैं, जिनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने अपके पà¥à¤°à¤¾à¤£ हमारे पà¥à¤°à¤à¥ यीशॠमसीह के नाम के लिथे जोखिम में डाले हैं। 27 और हम ने यहूदा और सीलास को à¤à¥‡à¤œà¤¾ है, जो अपके मà¥à¤‚ह से à¤à¥€ थे बातें कह देंगे। 28 पवितà¥à¤° आतà¥à¥˜à¤¾ को, और हम को ठीक जान पड़ा, कि इन आवशà¥à¤¯à¤• बातोंको छोड़; तà¥à¤® पर और बोफ न डालें; 29 कि तà¥à¤® मूरतोंके बलि किठहà¥à¤“ं से, और लोहू से, और गला घोंटे हà¥à¤“ं के मांस से, और वà¥à¤¯à¤à¤¿à¤šà¤¾à¤° से, पके रहो। इन से पके रहो; तो तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¤¾ à¤à¤²à¤¾ होगा आगे शà¥à¤à¥¤à¥¤ 30 फिर वे विदा होकर अनà¥â€à¤¤à¤¾à¤•à¤¿à¤¯à¤¾ में पहà¥à¤‚चे, और सà¤à¤¾ को इकटà¥à¤ ी करके वह उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ पतà¥à¤°à¥€ दे दी। 31 और वे पढ़कर उस उपकेश की बात से अति आननà¥â€à¤¦à¤¿à¤¤ हà¥à¤à¥¤ 32 और यहूदा और सीलास ने जो आप à¤à¥€ à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯à¤¦à¥à¤µà¤•à¥à¤¤à¤¾ थे, बहà¥à¤¤ बातोंसे à¤à¤¾à¤‡à¤¯à¥‹à¤‚को उपकेश देकर सà¥à¤¯à¤¿à¤° किया। 33 वे कà¥à¤› दिन रहकर à¤à¤¾à¤‡à¤¯à¥‹à¤‚से शानà¥â€à¤¤à¤¿ के साय विदा हà¥à¤, कि अपके à¤à¥‡à¤œà¤¨à¥‡à¤µà¤¾à¤²à¥‹à¤‚के पास जाà¤à¤‚। 34 (परनà¥â€à¤¤à¥ सीलास को वहां रहना अचà¥â€à¤›à¤¾ लगा।) 35 और पौलà¥à¤¸ और बरनबास अनà¥â€à¤¤à¤¾à¤•à¤¿à¤¯à¤¾ में रह गà¤: और बहà¥à¤¤ और लोगोंके साय पà¥à¤°à¤à¥ के वचन का उपकेश करते और सà¥à¤¸à¤®à¤¾à¤šà¤¾à¤° सà¥à¤¨à¤¾à¤¤à¥‡ रहे।। 36 कà¥à¤› दिन बाद पौलà¥à¤¸ ने बरनबास से कहा; कि जिन जिन नगरोंमें हम ने पà¥à¤°à¤à¥ का वचन सà¥à¤¨à¤¾à¤¯à¤¾ या, आओ, फिर उन में चलकर अपके à¤à¤¾à¤‡à¤¯à¥‹à¤‚को देखें; कि कैसे हैं। 37 तब बरनबास ने यूहनà¥à¤¨à¤¾ को जो मरकà¥à¤¸ कहलाता है, साय लेने का विचार किया। 38 परनà¥â€à¤¤à¥ पौलà¥à¤¸ ने उसे जो पंफूलिया में उन से अलग हो गया या, और काम पर उन के साय न गया, साय ले जाना अचà¥â€à¤›à¤¾ न समà¤à¤¾à¥¤ 39 सो à¤à¤¸à¤¾ टंटा हà¥à¤†, कि वे à¤à¤• दूसरे से अलग हो गà¤: और बरनबास, मरकà¥à¤¸ को लेकर जहाज पर कà¥à¤ªà¥à¤°à¥à¤¸ को चला गया। 40 परनà¥â€à¤¤à¥ पौलà¥à¤¸ ने सीलास को चà¥à¤¨ लिया, और à¤à¤¾à¤‡à¤¯à¥‹à¤‚से परमेशà¥à¤µà¤° के अनà¥à¤—à¥à¤°à¤¹ पर सौंपा जाकर वहां से चला गया। 41 और कलीसियाओं को सà¥à¤¯à¤¿à¤° करता हà¥à¤†, सूरिया और किलिकिया से होते हà¥à¤† निकला।।
1 फिर वह दिरबे और लà¥à¤¸à¥â€à¤¤à¥à¤°à¤¾ में à¤à¥€ गया, और देखो, वहां तीमà¥à¤¯à¤¿à¤¯à¥à¤¸ नाम à¤à¤• चेला या, जो किसी विशà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥€ यहूदिनी का पà¥à¤¤à¥à¤° या, परनà¥â€à¤¤à¥ उसका पिता यूनानी या। 2 वह लà¥à¤¸à¥â€à¤¤à¥à¤°à¤¾ और इकà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¥à¤® के à¤à¤¾à¤‡à¤¯à¥‹à¤‚में सà¥à¤¨à¤¾à¤® या। 3 पौलà¥à¤¸ ने चाहा, कि यह मेरे साय चले; और जो यहूदी लोग उन जगहोंमें थे उन के कारण उसे लेकर उसका खतना किया; कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि वे सब जानते या, कि उसका पिता यूनानी या। 4 और नगर नगर जाते हà¥à¤ वे उन विधियोंको जो यरूशलेम के पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤à¥‹à¤‚और पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨à¥‹à¤‚ने ठहराई यीं, मानने के लिथे उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ पहà¥à¤‚चाते जाते थे। 5 इस पà¥à¤°à¤•à¤¾à¤° कलीसिया विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ में सà¥à¤¯à¤¿à¤° होती गई और गिनती में पà¥à¤°à¤¤à¤¿ दिन बढ़ती गई। 6 और वे फà¥à¤°à¥‚गिया और गलतिया देशोंमें से होकर गà¤, और पवितà¥à¤° आतà¥à¥˜à¤¾ ने उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ à¤à¤¶à¤¿à¤¯à¤¾ में वचन सà¥à¤¨à¤¾à¤¨à¥‡ से मना किया। 7 और उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने मूसिया के निकट पहà¥à¤‚चकर, बितूनिया में जाना चाहा; परनà¥â€à¤¤à¥ यीशॠके आतà¥à¥˜à¤¾ ने उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ जाने न दिया। 8 सो मूसिया से होकर वे तà¥à¤°à¥‹à¤†à¤¸ में आà¤à¥¤ 9 और पौलà¥à¤¸ ने रात को à¤à¤• दरà¥à¤¶à¤¨ देखा कि à¤à¤• मकिदà¥à¤¨à¥€ पà¥à¤°à¥‚ष खड़ा हà¥à¤†, उस से बिनती करके कहता है, कि पार उतरकर मकिदà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ में आ; और हमारी सहाथता कर। 10 उसके यह दरà¥à¤¶à¤¨ देखते ही हम ने तà¥à¤°à¤¨à¥â€à¤¤ मकिदà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ जाना चाहा, यह समà¤à¤•à¤°, कि परमेशà¥à¤µà¤° ने हमें उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ सà¥à¤¸à¤®à¤¾à¤šà¤¾à¤° सà¥à¤¨à¤¾à¤¨à¥‡ के लिथे बà¥à¤²à¤¾à¤¯à¤¾ है।। 11 सो तà¥à¤°à¥‹à¤†à¤¸ से जहाज खोलकर हम सीधे सà¥à¤®à¤¾à¤¤à¥à¤°à¤¾à¤•à¥‡ और दूसरे दिन नियापà¥à¤²à¤¿à¤¸ में आà¤à¥¤ 12 वहां से हम फिलिपà¥à¤ªà¥€ में पहà¥à¤‚चे, जो मकिदà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥â€à¤¤ का मà¥à¤–à¥à¤¯ नगर, और रोमियोंकी बसà¥â€à¤¤à¥€ है; और हम उस नगर में कà¥à¤› दिन तक रहे। 13 सबà¥â€à¤¤ के दिन हम नगर के फाटक के बाहर नदी के किनारे यह समà¤à¤•à¤° गà¤, कि वहां पà¥à¤°à¤¾à¤°à¥à¤¯à¤¨à¤¾ करने का सà¥à¤¯à¤¾à¤¨ होगा; और बैठकर उन सà¥â€à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚से जो इकटà¥à¤ ी हà¥à¤ˆ यीं, बातें करने लगे। 14 और लà¥à¤¦à¤¿à¤¯à¤¾ नाम यà¥à¤†à¤¯à¥€à¤°à¤¾ नगर की बैंजनी कपके बेचनेवाली à¤à¤• à¤à¤•à¥à¤¤ सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ सà¥à¤¨à¤¤à¥€ यी, और पà¥à¤°à¤à¥ ने उसका मन खोला, ताकि पौलà¥à¤¸ की बातोंपर चितà¥à¤¤ लगाà¤à¥¤ 15 और जब उस ने अपके घराने समेत बपतिसà¥à¥˜à¤¾ लिया, तो उस ने बिनती की, कि यदि तà¥à¤® मà¥à¤à¥‡ पà¥à¤°à¤à¥ की विशà¥à¤µà¤¾à¤¸à¤¿à¤¨à¥€ समà¤à¤¤à¥‡ हो, तो चलकर मेरे घर में रहो; और वह हमें मनाकर ले गई।। 16 जब हम पà¥à¤°à¤¾à¤°à¥à¤¯à¤¨à¤¾ करने की जगह जा रहे थे, तो हमें à¤à¤• दासी मिली जिस में à¤à¤¾à¤µà¥€ कहनेवाली आतà¥à¥˜à¤¾ यी; और à¤à¤¾à¤µà¥€ कहने से अपके सà¥â€à¤µà¤¾à¤®à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚के लिथे बहà¥à¤¤ कà¥à¤› कमा लाती यी। 17 वह पौलà¥à¤¸ के और हमारे पीछे आकर चिलà¥à¤²à¤¾à¤¨à¥‡ लगी कि थे मनà¥à¤·à¥à¤¯ परम पà¥à¤°à¤§à¤¾à¤¨ परमेशà¥à¤µà¤° के दास हैं, जो हमें उदà¥à¤§à¤¾à¤° के मारà¥à¤— की कया सà¥à¤¨à¤¾à¤¤à¥‡ हैं। 18 वह बहà¥à¤¤ दिन तक à¤à¤¸à¤¾ ही करती रही, परनà¥â€à¤¤à¥ पौलà¥à¤¸ दà¥:खित हà¥à¤†, और मà¥à¤‚ह फेरकर उस आतà¥à¥˜à¤¾ से कहा, मैं तà¥à¤à¥‡ यीशॠमसीह के नाम से आजà¥à¤žà¤¾ देता हूं, कि उस में से निकल जा और वह उसी घड़ी निकल गई।। 19 जब उसके सà¥â€à¤µà¤¾à¤®à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ने देखा, कि हमारी कमाई की आशा जाती रही, तो पौलà¥à¤¸ और सीलास को पकड़ कर चौक में पà¥à¤°à¤¾à¤§à¤¾à¤¨à¥‹à¤‚के पास खींच ले गà¤à¥¤ 20 और उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ फौजदारी के हाकिमोंके पास ले जाकर कहा; थे लोग जो यहूदी हैं, हमारे नगर में बड़ी हलचल मचा रहे हैं। 21 और à¤à¤¸à¥‡ वà¥à¤¯à¤µà¤¹à¤¾à¤° बता रहे हैं, जिनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ गà¥à¤°à¤¹à¤£ करना या मानना हम रोमियोंके लिथे ठीक नहीं। 22 तब à¤à¥€à¤¡à¤¼ के लागे उन के विरोध में इकटà¥à¤ े होकर चढ़ आà¤, और हाकिमोंने उन के कपके फाड़कर उतार डाले, और उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ बेत मारने की आजà¥à¤žà¤¾ दी। 23 और बहà¥à¤¤ बेत लगवाकर उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ बनà¥â€à¤¦à¥€à¤—ृह में डाला; और दारोगा को आजà¥à¤žà¤¾ दी, कि उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ चौकसी से रखे। 24 उस ने à¤à¤¸à¥€ आजà¥à¤žà¤¾ पाकर उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ à¤à¥€à¤¤à¤° की कोठरी में रखा और उन के पांव काठमें ठोंक दिà¤à¥¤ 25 आधी रात के लगà¤à¤— पौलà¥à¤¸ और सीलास पà¥à¤°à¤¾à¤°à¥à¤¯à¤¨à¤¾ करते हà¥à¤ परमेशà¥à¤µà¤° के à¤à¤œà¤¨ गा रहे थे, और बनà¥â€à¤§à¥à¤ उन की सà¥à¤¨ रहे थे। 26 कि इतने में à¤à¤•à¤¾à¤à¤• बड़ा à¤à¥à¤ˆà¤¡à¥‹à¤² हà¥à¤†, यहां तक कि बनà¥â€à¤¦à¥€à¤—ृह की नेव हिल गईं, और तà¥à¤°à¤¨à¥â€à¤¤ सब दà¥à¤µà¤¾à¤° खà¥à¤² गà¤; और सब के बनà¥â€à¤§à¤¨ खà¥à¤² पके। 27 और दारोगा जाग उठा, और बनà¥â€à¤¦à¥€à¤—ृह के दà¥à¤µà¤¾à¤° खà¥à¤²à¥‡ देखकर समà¤à¤¾ कि बनà¥â€à¤§à¥à¤ à¤à¤¾à¤— गà¤, सो उस ने तलवार खींचकर अपके आप को मार डालना चाहा। 28 परनà¥â€à¤¤à¥ पौलà¥à¤¸ ने ऊंचे शबà¥â€à¤¦ से पà¥à¤•à¤¾à¤°à¤•à¤° कहा; अपके आप को कà¥à¤› हानि न पहà¥à¤‚चा, कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि हम सब यहां हैं। 29 तब वह दीया मंगवाकर à¤à¥€à¤¤à¤° लपक गया, और कांपता हà¥à¤† पौलà¥à¤¸ और सीलास के आगे गिरा। 30 और उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ बाहर लाकर कहा, हे साहिबो, उदà¥à¤§à¤¾à¤° पाने के लिथे मैं कà¥â€à¤¯à¤¾ करूं 31 उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा, पà¥à¤°à¤à¥ यीशॠमसीह पर विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ कर, तो तू और तेरा घराना उदà¥à¤§à¤¾à¤° पाà¤à¤—ा। 32 और उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने उस को, और उसके सारे घर के लोगोंको पà¥à¤°à¤à¥ का वचन सà¥à¤¨à¤¾à¤¯à¤¾à¥¤ 33 और रात को उसी घड़ी उस ने उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ ले जाकर उन के घाव धोà¤, और उस ने अपके सब लोगोंसमेत तà¥à¤°à¤¨à¥â€à¤¤ बपतिसà¥à¥˜à¤¾ लिया। 34 और उस ने उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ अपके घर में ले जाकर, उन के आगे à¤à¥‹à¤œà¤¨ रखा और सारे घराने समेत परमेशà¥à¤µà¤° पर विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ करके आननà¥â€à¤¦ किया।। 35 जब दिन हà¥à¤† तक हाकिमोंने पà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¥‹à¤‚के हाथ कहला à¤à¥‡à¤œà¤¾ कि उन मनà¥à¤·à¥à¤¯à¥‹à¤‚को छोड़ दो। 36 दारोगा ने थे बातें पौलà¥à¤¸ से कह सà¥à¤¨à¤¾à¤ˆ, कि हाकिमोंने तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥‡ छोड़ देने की आजà¥à¤žà¤¾ à¤à¥‡à¤œ दी है, सो अब निकलकर कà¥à¤¶à¤² से चले जाओ। 37 परनà¥â€à¤¤à¥ पौलà¥à¤¸ ने उस से कहा, उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने हमें जो रोमी मनà¥à¤·à¥à¤¯ हैं, दोषी ठहाराठबिना, लोगोंके सामà¥à¤¹à¤¨à¥‡ मारा, और बनà¥â€à¤¦à¥€à¤—ृह में डाला, और अब कà¥â€à¤¯à¤¾ चà¥à¤ªà¤•à¥‡ से निकाल देते हैं à¤à¤¸à¤¾ नहीं, परनà¥â€à¤¤à¥ वे आप आकर हमें बाहर ले जाà¤à¤‚। 38 पà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¥‹à¤‚ने थे बातें हाकिमोंसे कह दीं, और वे यह सà¥à¤¨à¤•à¤° कि रोमी हैं, डर गà¤à¥¤ 39 और आकर उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ मनाया, और बाहर ले जाकर बिनती की कि नगर से चले जाà¤à¤‚। 40 वे बनà¥â€à¤¦à¥€à¤—ृह से निकल कर लà¥à¤¦à¤¿à¤¯à¤¾ के यहां गà¤, और à¤à¤¾à¤‡à¤¯à¥‹à¤‚से à¤à¥‡à¤‚ट करके उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ शानà¥â€à¤¤à¤¿ दी, और चले गà¤à¥¤à¥¤
1 फिर वे अमà¥à¤«à¤¿à¤ªà¥à¤²à¤¿à¤¸ और अपà¥à¤²à¥à¤²à¥‹à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ होकर यिसà¥â€à¤¸à¤²à¥à¤¨à¥€à¤•à¥‡ में आà¤, जहां यहूदियोंका à¤à¤• आराधनालय या। 2 और पौलà¥à¤¸ अपकà¥à¤•à¥€ रीति के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° उन के पास गया, और तीन सबà¥â€à¤¤ के दिन पवितà¥à¤° शासà¥â€à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚से उन के साय विवाद किया। 3 और उन का अरà¥à¤¯ खोल खोलकर समà¤à¤¾à¤¤à¤¾ या, कि मसीह का दà¥à¤– उठाना, और मरे हà¥à¤“ं में से जी उठना, अवशà¥à¤¯ या; और यही यीशॠजिस की मैं तà¥à¤®à¥à¤¹à¥‡à¤‚ कया सà¥à¤¨à¤¾à¤¤à¤¾ हूं, मसीह है। 4 उन में से कितनोंने, और à¤à¤•à¥à¤¤ यूनानियोंमें से बहà¥à¤¤à¥‡à¤°à¥‹à¤‚ने और बहà¥à¤¤ सी कà¥à¤²à¥€à¤¨ सितà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤‚ने मान लिया, और पौलà¥à¤¸ और सीलास के साय मिल गà¤à¥¤ 5 परनà¥â€à¤¤à¥ यहूदियोंने डाह से à¤à¤°à¤•à¤° बजारू लोगोंमें से कई दà¥à¤·à¥â€à¤Ÿ मनà¥à¤·à¥à¤¯à¥‹à¤‚को अपके साय में लिया, और à¤à¥€à¤¡à¤¼ लगाकर नगर में हà¥à¤²à¥à¤²à¤¡à¤¼ मचाने लगे, और यासोन के घर पर चढ़ाई करके उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ लोगोंके सामà¥à¤¹à¤¨à¥‡ लाना चाहा। 6 और उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ न पाकर, वे यह चिलà¥à¤²à¤¾à¤¤à¥‡ हà¥à¤ यासोन और कितने और à¤à¤¾à¤‡à¤¯à¥‹à¤‚को नगर के हाकिमोंके सामà¥à¤¹à¤¨à¥‡ खींच लाà¤, कि थे लोग जिनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने जगल को उलटा पà¥à¤²à¤Ÿà¤¾ कर दिया है, यहां à¤à¥€ आठहैं। 7 और यामोन ने उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ अपके यहां उतारा है, और थे सब के सब यह कहते हैं कि यीशॠराजा है, और कैसर की आजà¥à¤žà¤¾à¤“ं का विरोध करते हैं। 8 उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने लोगोंको और नगर के हाकिमोंको यह सà¥à¤¨à¤¾à¤•à¤° घबरा दिया। 9 और उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने यासोन और बाकी लोगोंसे मà¥à¤šà¤²à¤•à¤¾ लेकर उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ छोड़ दिया।। 10 à¤à¤¾à¤‡à¤¯à¥‹à¤‚ने तà¥à¤°à¤¨à¥â€à¤¤ रात ही रात पौलà¥à¤¸ और सीलास को बिरीया में à¤à¥‡à¤œ दिया: और वे वहां पहà¥à¤‚चकर यहूदियोंके आराधनालय में गà¤à¥¤ 11 थे लोग तो यिसà¥â€à¤¸à¤²à¥à¤¨à¥€à¤•à¥‡ के यहूदियोंसे à¤à¤²à¥‡ थे और उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने बड़ी लालसा से वचन गà¥à¤°à¤¹à¤£ किया, और पà¥à¤°à¤¤à¤¿ दिन पवितà¥à¤° शासà¥â€à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚में ढूंढ़ते रहे कि थे बातें योहीं हैं, कि नहीं। 12 सो उन में से बहà¥à¤¤à¥‹à¤‚ने, और यूनानी कà¥à¤²à¥€à¤¨ सà¥â€à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚में से, और पà¥à¤°à¥‚षोंमें से बहà¥à¤¤à¥‡à¤°à¥‹à¤‚ने विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ किया। 13 किनà¥â€à¤¤à¥ जब यिसà¥â€à¤¸à¤²à¥à¤¨à¥€à¤•à¥‡ के यहूदी जान गà¤, कि पौलà¥à¤¸ बिरीया में à¤à¥€ परमेशà¥à¤µà¤° का वचन सà¥à¤¨à¤¾à¤¤à¤¾ है, तो वहां à¤à¥€ आकर लोगोंको उसकाने और हलचल मचाने लगे। 14 तब à¤à¤¾à¤‡à¤¯à¥‹à¤‚ने तà¥à¤°à¤¨à¥â€à¤¤ पौलà¥à¤¸ को विदा किया, कि समà¥à¤¦à¥à¤° के किनारे चला जाà¤; परनà¥â€à¤¤à¥ सीलास और तीमà¥à¤¯à¤¿à¤¯à¥à¤¸ वहीं रह गà¤à¥¤ 15 पौलà¥à¤¸ के पहà¥à¤‚चानेवाले उसे अथेने तक ले गà¤, और सीलास और तीमà¥à¤¯à¤¿à¤¯à¥à¤¸ के लिथे यह आजà¥à¤žà¤¾ लेकर विदा हà¥à¤, कि मेरे पास बहà¥à¤¤ शीघà¥à¤° आओ।। 16 जब पौलà¥à¤¸ अथेने में उन की बाट जोह रहा या, तो नगर को मूरतोंसे à¤à¤°à¤¾ हà¥à¤† देखकर उसका जी जल गया। 17 सो वह आराधनालय में यहूदियोंऔर à¤à¤•à¥à¤¤à¥‹à¤‚से और चौक में जो लोग मिलते थे, उन से हर दिन वाद-विवाद किया करता या। 18 तब इपिकूरी और सà¥â€à¤¤à¥‹à¤ˆà¤•à¥€ पणà¥â€à¤¡à¤¿à¤¤à¥‹à¤‚में से कितने उस से तरà¥à¤• करने लगे, और कितनोंने कहा, यह बकवादी कà¥â€à¤¯à¤¾ कहना चाहता है परनà¥â€à¤¤à¥ औरोंने कहा; वह अनà¥à¤¯ देवताओं का पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤°à¤• मालूम पड़ता है, कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि वह यीशॠका, और पà¥à¤¨à¤°à¥‚तà¥à¤¯à¤¾à¤¨ का सà¥à¤¸à¤®à¤¾à¤šà¤¾à¤° सà¥à¤¨à¤¾à¤¤à¤¾ या। 19 तब वे उसे अपके साय अरियà¥à¤ªà¤—à¥à¤¸ पर ले गठऔर पूछा, कà¥â€à¤¯à¤¾ हम जान सकते हैं, कि यह नया मत जो तू सà¥à¤¨à¤¾à¤¤à¤¾ है, कà¥â€à¤¯à¤¾ है 20 कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि तू अनोखी बातें हमें सà¥à¤¨à¤¾à¤¤à¤¾ है, इसलिथे हम जानना चाहते हैं कि इन का अरà¥à¤¯ कà¥â€à¤¯à¤¾ है 21 (इसलिथे कि सब अथेनवी और परदेशी जो वहां रहते थे नई नई बातें कहने और सà¥à¤¨à¤¨à¥‡ के सिवाय और किसी काम में समय नहीं बिताते थे)। 22 तब पौलà¥à¤¸ ने अरियà¥à¤ªà¤—à¥à¤¸ के बीच में खड़ा होकर कहा; हे अथेने के लोगोंमैं देखता हूं, कि तà¥à¤® हर बात में देवताओं के बड़े माननेवाले हो। 23 कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि मैं फिरते हà¥à¤ तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥€ पूजने की वसà¥â€à¤¤à¥à¤“ं को देख रहा या, तो à¤à¤• à¤à¤¸à¥€ वेदी à¤à¥€ पाई, जिस पर लिखा या, कि ?अनजाने ईशà¥à¤µà¤° के लिथे। सो जिसे तà¥à¤® बिना जाने पूजते हो, मैं तà¥à¤®à¥à¤¹à¥‡à¤‚ उसका समाचार सà¥à¤¨à¤¾à¤¤à¤¾ हूं। 24 जिस परमेशà¥à¤µà¤° ने पृयà¥â€à¤µà¥€ और उस की सब वसà¥â€à¤¤à¥à¤“ं को बनाया, वह सà¥â€à¤µà¤°à¥à¤— और पृयà¥â€à¤µà¥€ का सà¥â€à¤µà¤¾à¤®à¥€ होकर हाथ के बनाठहà¥à¤ मनà¥â€à¤¦à¤¿à¤°à¥‹à¤‚में नहीं रहता। 25 न किसी वसà¥â€à¤¤à¥ का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤œà¤¨ रखकर मनà¥à¤·à¥à¤¯à¥‹à¤‚के हाथोंकी सेवा लेता है, कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि वह तो आप ही सब को जीवन और सà¥â€à¤µà¤¾à¤¸ और सब कà¥à¤› देता है। 26 उस ने à¤à¤• ही मूल से मनà¥à¤·à¥à¤¯à¥‹à¤‚की सब जातियां सारी पृयà¥â€à¤µà¥€ पर रहने के लिथे बनाई हैं; और उन के ठहराठहà¥à¤ समय, और निवास के सिवानोंको इसलिथे बानà¥â€à¤§à¤¾ है। 27 कि वे परमेशà¥à¤µà¤° को ढूंढ़ें, कदाचित उसे टटोलकर पा जाà¤à¤‚ तौà¤à¥€ वह हम में से किसी से दूर नहीं! 28 कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि हम उसी में जीवित रहते, और चलते-फिरते, और सà¥à¤¯à¤¿à¤° रहते हैं; जैसे तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥‡ कितने किवयोंने à¤à¥€ कहा है, कि हम तो उसी के वंश à¤à¥€ हैं। 29 सो परमेशà¥à¤µà¤° का वंश होकर हमें यह समà¤à¤¤à¤¾ उचित नहीं, कि ईशà¥à¤µà¤°à¤¤à¥â€à¤µ, सोने या रूपे या पतà¥à¤¯à¤° के समान है, जो मनà¥à¤·à¥à¤¯ की कारीगरी और कलà¥à¤ªà¤¤à¤¾ से गढ़े गठहों। 30 इसलिथे परमेशà¥à¤µà¤° आजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¤à¤¾ के समयोंमें अनाकानी करके, अब हर जगह सब मनà¥à¤·à¥à¤¯à¥‹à¤‚को मन फिराने की आजà¥à¤žà¤¾ देता है। 31 कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि उस ने à¤à¤• दिन ठहराया है, जिस में वह उस मनà¥à¤·à¥à¤¯ के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ धरà¥à¤® से जगत का नà¥à¤¯à¤¾à¤¯ करेगा, जिसे उस ने ठहराया है और उसे मरे हà¥à¤“ं में से जिलाकर, यह बात सब पर पà¥à¤°à¤¾à¤®à¤¾à¤£à¤¿à¤¤ कर दी है।। 32 मरे हà¥à¤“ं के पà¥à¤¨à¤°à¥‚तà¥à¤¯à¤¾à¤¨ की बात सà¥à¤¨à¤•à¤° कितने तो ठटà¥à¤ ा करने लगे, और कितनोंने कहा, यह बात हम तà¥à¤ से फिर कà¤à¥€ सà¥à¤¨à¥‡à¤‚गे। 33 इस पर पौलà¥à¤¸ उन के बीच में से निकल गया। 34 परनà¥â€à¤¤à¥ कई à¤à¤• मनà¥à¤·à¥à¤¯ उसके साय मिल गà¤, और विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ किया, जिन में दियà¥à¤¨à¥à¤¸à¤¿à¤¯à¥à¤¸ अरियà¥à¤ªà¤•à¥à¤•à¥€ या, और दमरिस नाम à¤à¤• सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ यी, और उन के साय और à¤à¥€ कितने लोग थे।।
1 इस के बाद पौलà¥à¤¸ अथेने को छोड़कर कà¥à¤°à¤¿à¤¨à¥à¤¯à¥à¤¸ में आया। 2 और वहां अकà¥â€à¤µà¤¿à¤²à¤¾ नाम à¤à¤• यहूदी मिला, जिस का जनà¥à¥˜ पà¥à¤¨à¥â€à¤¤à¥à¤¸ का या; और अपकà¥à¤•à¥€ पतà¥â€à¤¨à¥€ पà¥à¤°à¤¿à¤¸à¥â€à¤•à¤¿à¤²à¥à¤²à¤¾ समेत इतालिया से नया आया या, कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि कà¥â€à¤²à¥Œà¤¦à¤¿à¤¯à¥à¤¸ ने सब यहूदियोंको रोम से निकल जाने की आजà¥à¤žà¤¾ दी यी, सो वह उन के यहां गया। 3 और उसका और उन का à¤à¤• ही उदà¥à¤¯à¤® या; इसलिथे वह उन के साय रहा, और वे काम करने लगे, और उन का उदà¥à¤¯à¤® तमà¥à¤¬à¥‚ बनाने का या। 4 और वह हर à¤à¤• सबà¥â€à¤¤ के दिन आराधनालय में वाद-विवाद करके यहूदियोंऔर यूनानियोंको à¤à¥€ समà¤à¤¾à¤¤à¤¾ या।। 5 जब सीलास और तीमà¥à¤¯à¤¿à¤¯à¥à¤¸ मकिदà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ से आà¤, तो पौलà¥à¤¸ वचन सà¥à¤¨à¤¾à¤¨à¥‡ की धà¥à¤¨ में लगकर यहूदियोंको गवाही देता या कि यीशॠही मसीह है। 6 परनà¥â€à¤¤à¥ जब वे विरोध और निनà¥â€à¤¦à¤¾ करने लगे, तो उस ने अपके कपके फाड़कर उन से कहा; तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¤¾ लोहू तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥€ गरà¥à¤¦à¤¨ पर रहे: मैं निदौष हूं: अब ठमैं अनà¥à¤¯à¤œà¤¾à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚के पास जाऊंगा। 7 और वहां से चलकर वह तितà¥à¤¸ यà¥à¤¸à¥â€à¤¤à¥à¤¸ नाम परमेशà¥à¤µà¤° के à¤à¤• à¤à¤•à¥à¤¤ के घर में आया, जिस का घर आराधनालय से लगा हà¥à¤† या। 8 तब आराधनालय के सरदार कà¥à¤°à¤¿à¤¸à¥â€à¤ªà¥à¤¸ ने अपके सारे घराने समेत पà¥à¤°à¤à¥ पर विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ किया; और बहà¥à¤¤ से कà¥à¤°à¤¿à¤¨à¥à¤¯à¥€ सà¥à¤¨à¤•à¤° विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ लाठऔर बपतिसà¥à¥˜à¤¾ लिया। 9 और पà¥à¤°à¤à¥ ने रात को दरà¥à¤¶à¤¨ के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ पौलà¥à¤¸ से कहा, मत डर, बरन कहे जा, और चà¥à¤ª मत रह। 10 कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि मैं तेरे साय हूं: और कोई तà¥à¤ पर चढ़ाई करके तेरी हाति न करेगा; कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि इस नगर में मेरे बहà¥à¤¤ से लोग हैं। 11 सो वह उन में परमेशà¥à¤µà¤° का वचन सिखाते हà¥à¤ डेढ़ वरà¥à¤· तक रहा।। 12 जब गलà¥à¤²à¤¿à¤¯à¥‹ अखाया देश का हाकिम या तो यहूदी लोग à¤à¤•à¤¾ करके पौलà¥à¤¸ पर चढ़ आà¤, और उसे नà¥à¤¯à¤¾à¤¯ आसन के सामà¥à¤¹à¤¨à¥‡ लाकर, कहने लगे। 13 कि यह लोगोंको समà¤à¤¾à¤¤à¤¾ है, कि परमेशà¥à¤µà¤° की उपासना à¤à¤¸à¥€ रीति से करें, जो वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¯à¤¾ के विपकà¥à¤•à¥€à¤¤ है। 14 जब पौलà¥à¤¸ बोलने पर या, तो गलà¥à¤²à¤¿à¤¯à¥‹ ने यहूदियोंसे कहा; हे यहूदियो, यदि यह कà¥à¤› अनà¥à¤¯à¤¾à¤¯ या दà¥à¤·à¥â€à¤Ÿà¤¤à¤¾ की बात होती तो उचित या कि मैं तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥€ सà¥à¤¨à¤¤à¤¾à¥¤ 15 परनà¥â€à¤¤à¥ यदि यह वाद-विवाद शबà¥â€à¤¦à¥‹à¤‚, और नामों, और तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥‡ यहां की वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¯à¤¾ के विषय में है, तो तà¥à¤® ही जानो; कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि मैं इन बातोंका नà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¥€ बनना नहीं चाहता। 16 और उस ने उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ नà¥à¤¯à¤¾à¤¯ आसन के सामà¥à¤¹à¤¨à¥‡ से निकलवा दिया। 17 तब सब लोागें ने अराधनालय के सरदार सोसà¥à¤¯à¤¿à¤¨à¥‡à¤¸ को पकड़ के नà¥à¤¯à¤¾à¤¯ आसन के सामà¥à¤¹à¤¨à¥‡ मारा: परनà¥â€à¤¤à¥ गलà¥à¤²à¤¿à¤¯à¥‹ ने इन बातोंकी कà¥à¤› à¤à¥€ चिनà¥â€à¤¤à¤¾ न की।। 18 सो पौलà¥à¤¸ बहà¥à¤¤ दिन तक वहां रहा, फिर à¤à¤¾à¤‡à¤¯à¥‹à¤‚से विदा होकर किंखिà¥à¤°à¤¯à¤¾ में इसलिथे सिर मà¥à¤£à¥â€à¤¡à¤¾à¤¯à¤¾ कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि उस ने मनà¥à¤¨à¤¤ मानी यी और जहाज पर सूरिया को चल दिया और उसके साय पà¥à¤°à¤¿à¤¸à¥â€à¤•à¤¿à¤²à¥à¤²à¤¾ और अकà¥â€à¤µà¤¿à¤²à¤¾ थे। 19 और उस ने इफिसà¥à¤¸ में पहà¥à¤‚चकर उन को वहां छोड़ा, और आप ही अराधनालय में जाकर यहूदियोंसे विवाद करने लगा। 20 जब उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने उस से बिनती की, कि हमारे साय और कà¥à¤› दिन रह, तो उस ने सà¥â€à¤µà¥€à¤•à¤¾à¤° न किया। 21 परनà¥â€à¤¤à¥ यह कहकर उन से विदा हà¥à¤†, कि यदि परमेशà¥à¤µà¤° चाहे तो मैं तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥‡ पास फिर आऊंगा। 22 तब इफिसà¥à¤¸ से जहाज खोलकर चल दिया, और कैसरिया में उतर कर (यरूशलेम को) गया और कलीसिया को नमसà¥â€à¤•à¤¾à¤° करके अनà¥â€à¤¤à¤¾à¤•à¤¿à¤¯à¤¾ में आया। 23 फिर कà¥à¤› दिन रहकर वहां से चला गया, और à¤à¤• ओर से गलतिया और फà¥à¤°à¥‚गिया में सब चेलोंको सà¥à¤¯à¤¿à¤° करता फिरा।। 24 अपà¥à¤²à¥à¤²à¥‹à¤¸ नाम à¤à¤• यहूदी जिस का जनà¥à¥˜ सिकनà¥â€à¤¦à¤¿à¤°à¤¯à¤¾ में हà¥à¤† या, जो विदà¥à¤µà¤¾à¤¨ पà¥à¤°à¥‚ष या और पवितà¥à¤° शासà¥â€à¤¤à¥à¤° को अचà¥â€à¤›à¥€ तरह से जानता या इफिसà¥à¤¸ में आया। 25 उस ने पà¥à¤°à¤à¥ के मारà¥à¤— की शिà¤à¤¾ पाई यी, और मन लगाकर यीशॠके विषय में ठीक ठीक सà¥à¤¨à¤¾à¤¤à¤¾, और सिखाता या, परनà¥â€à¤¤à¥ वह केवल यूहनà¥à¤¨à¤¾ के बपतिसà¥à¥˜à¤¾ की बात जानता या। 26 वह आराधनालय में निडर होकर बोलने लगा, पर पà¥à¤°à¤¿à¤¸à¥â€à¤•à¤¿à¤²à¥à¤²à¤¾ और अकà¥â€à¤µà¤¿à¤²à¤¾ उस की बातें सà¥à¤¨à¤•à¤°, उसे अपके यहां ले गठऔर परमेशà¥à¤µà¤° का मारà¥à¤— उस को और à¤à¥€ ठीक ठीक बताया। 27 और जब उस ने निशà¥â€à¤šà¤¯ किया कि पार उतरकर अखाया को जाठतो à¤à¤¾à¤‡à¤¯à¥‹à¤‚ने उसे ढाढ़स देकर चेलोंको लिखा कि वे उस से अचà¥â€à¤›à¥€ तरह मिलें, और उस ने पहà¥à¤‚चकर वहां उन लोगोंकी बड़ी सहाथता की जिनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने अनà¥à¤—à¥à¤°à¤¹ के कारण विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ किया या। 28 कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि वह पवितà¥à¤° शासà¥â€à¤¤à¥à¤° से पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£ दे देकर, कि यीशॠही मसीह है; बड़ी पà¥à¤°à¤¬à¤²à¤¤à¤¾ से यहूदियोंको सब के सामà¥à¤¹à¤¨à¥‡ निरूतà¥à¤¤à¤° करता रहा।।
1 और जब अपà¥à¤²à¥à¤²à¥‹à¤¸ कà¥à¤°à¤¿à¤¨à¥à¤¯à¥à¤¸ में या, तो पौलà¥à¤¸ ऊपर से सारे देश से होकर इफिसà¥à¤¸ में आया, और कई चेलोंको देखकर। 2 उन से कहा; कà¥â€à¤¯à¤¾ तà¥à¤® ने विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ करते समय पवितà¥à¤° आतà¥à¥˜à¤¾ पाया उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने उस से कहा, हम ने तो पवितà¥à¤° आतà¥à¥˜à¤¾ की चरà¥à¤šà¤¾ à¤à¥€ नहीं सà¥à¤¨à¥€à¥¤ 3 उस ने उन से कहा; तो फिर तà¥à¤® ने किस का बपतिसà¥à¥˜à¤¾ लिया उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा; यूहनà¥à¤¨à¤¾ का बपतिसà¥à¥˜à¤¾à¥¤ 4 पौलà¥à¤¸ ने कहा; यूहनà¥à¤¨à¤¾ ने यह कहकर मन फिराव का बपतिसà¥à¥˜à¤¾ दिया, कि जो मेरे बाद आनेवाला है, उस पर अरà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥â€ यीशॠपर विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ करना। 5 यह सà¥à¤¨à¤•à¤° उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने पà¥à¤°à¤à¥ यीशॠके नाम का बपतिसà¥à¥˜à¤¾ लिया। 6 और जब पौलà¥à¤¸ ने उन पर हाथ रखे, तो उन पर पवितà¥à¤° आतà¥à¥˜à¤¾ उतरा, और वे à¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ à¤à¤¾à¤·à¤¾ बोलने और à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯à¤¦à¥à¤µà¤µà¤¾à¤£à¥€ करने लगे। 7 थे सब लगà¤à¤— बारह पà¥à¤°à¥‚ष थे।। 8 और वह आराधनालय में जाकर तीन महीने तक निडर होकर बोलता रहा, और परमेशà¥à¤µà¤° के राजà¥à¤¯ के विषय में विवाद करता और समà¤à¤¾à¤¤à¤¾ रहा। 9 परनà¥â€à¤¤à¥ जब कितनोंने कठोर होकर उस की नहीं मानी बरन लोगोंके सामà¥à¤¹à¤¨à¥‡ इस मारà¥à¤— को बà¥à¤°à¤¾ कहने लगे, तो उस ने उन को छोड़कर चेलोंको अलग कर लिया, और पà¥à¤°à¤¤à¤¿ दिन तà¥à¤°à¤¨à¥à¤¨à¥à¤¸ की पाठशाला में विवाद किया करता या। 10 दो वरà¥à¤· तक यही होता रहा, यहां तक कि आसिया के रहनेवाले कà¥â€à¤¯à¤¾ यहूदी, कà¥â€à¤¯à¤¾ यूनानी सब ने पà¥à¤°à¤à¥ का वचन सà¥à¤¨ लिया। 11 और परमेशà¥à¤µà¤° पौलà¥à¤¸ के हाथोंसे सामरà¥à¤¯ के अनोखे काम दिखाता या। 12 यहां तक कि रूमाल और अंगोछे उस की देह से छà¥à¤²à¤µà¤¾à¤•à¤° बीमारोंपर डालते थे, और उन की बीमारियां जाती रहती यी; और दà¥à¤·à¥â€à¤Ÿà¤¾à¤¤à¥à¥˜à¤¾à¤à¤‚ उन में से निकल जाया करती यीं। 13 परनà¥â€à¤¤à¥ कितने यहूदी जो फाड़ा फूंकी करते फिरते थे, यह करने लगे, कि जिन में दà¥à¤·à¥â€à¤Ÿà¤¾à¤¤à¥à¥˜à¤¾ होंउन पर पà¥à¤°à¤à¥ यीशॠका नाम यह कहकर फूंके कि जिस यीशॠका पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤° पौलà¥à¤¸ करता है, मैं तà¥à¤®à¥à¤¹à¥‡à¤‚ उसी की शपय देता हूं। 14 और सà¥â€à¤•à¥â€à¤•à¤¿à¤µà¤¾ नाम के à¤à¤• यहूदी महाथाजक के सात पà¥à¤¤à¥à¤° थे, जो à¤à¤¸à¤¾ ही करते थे। 15 पर दà¥à¤·à¥â€à¤Ÿà¤¾à¤¤à¥à¥˜à¤¾ ने उतà¥à¤¤à¤° दिया, कि यीशॠको मैं जानती हूं, और पौलà¥à¤¸ को à¤à¥€ पहचानती हूं; परनà¥â€à¤¤à¥ तà¥à¤® कौन हो 16 और उस मनà¥à¤·à¥à¤¯ ने जिस में दà¥à¤·à¥â€à¤Ÿ आतà¥à¥˜à¤¾ यी; उन पर लपककर, और उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ वश में लाकर, उन पर à¤à¤¸à¤¾ उपदà¥à¤°à¤µ किया, कि वे नंगे और घायल होकर उस घर से निकल à¤à¤¾à¤—े। 17 और यह बात इफिसà¥à¤¸ के रहनेवाले यहूदी और यूनानी à¤à¥€ सब जान गà¤, और उन सब पर à¤à¤¯ छा गया; और पà¥à¤°à¤à¥ यीशॠके नाम की बड़ाई हà¥à¤ˆà¥¤ 18 और जिनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ किया या, उन में से बहà¥à¤¤à¥‡à¤°à¥‹à¤‚ने आकर अपके अपके कामोंको मान लिया और पà¥à¤°à¤—ट किया। 19 और जादू करनेवालोंमें से बहà¥à¤¤à¥‹à¤‚ने अपकà¥à¤•à¥€ अपकà¥à¤•à¥€ पोयियां इकटà¥à¤ ी करके सब के सामà¥à¤¹à¤¨à¥‡ जला दीं; और जब उन का दाम जोड़ा गया, जो पचास हजार रूपके की निकलीं। 20 योंपà¥à¤°à¤à¥ का वचन बल पूरà¥à¤µà¤• फैलता गया और पà¥à¤°à¤¬à¤² होता गया।। 21 जब थे बातें हो चà¥à¤•à¥€à¤‚, तो पौलà¥à¤¸ ने आतà¥à¥˜à¤¾ में ठाना कि मकिदà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ और अखाया से होकर यरूशलेम को जाऊं, और कहा, कि वहां जाने के बाद मà¥à¤à¥‡ रोमा को à¤à¥€ देखना अवशà¥à¤¯ है। 22 सो अपकà¥à¤•à¥€ सेवा करनेवालोंमें से तीमà¥à¤¯à¤¿à¤¯à¥à¤¸ और इरासà¥â€à¤¤à¥à¤¸ को मकिदà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ में à¤à¥‡à¤œà¤•à¤° आप कà¥à¤› दिन आसिया में रह गया। 23 उस समय में पनà¥à¤¯ के विषय में बड़ा हà¥à¤²à¥à¤²à¤¡à¤¼ हà¥à¤†à¥¤ 24 कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि देमेतà¥à¤°à¤¿à¤¯à¥à¤¸ नाम का ठसà¥à¤¨à¤¾à¤° अरितमिस के चानà¥â€à¤¦à¥€ के मनà¥â€à¤¦à¤¿à¤° बनवाकर कारीगरोंको बहà¥à¤¤ काम दिलाया करता या। 25 उस ने उन को, और, और à¤à¤¸à¥€ वसà¥â€à¤¤à¥à¤“ं के कारीगरोंको इकटà¥à¤ े करके कहा; हे मनà¥à¤·à¥à¤¯à¥‹, तà¥à¤® जानते हो, कि इस काम में हमें कितना धन मिलता है। 26 और तà¥à¤® देखते और सà¥à¤¨à¤¤à¥‡ हो, कि केवल इफिसà¥à¤¸ ही में नहीं, बरन पà¥à¤°à¤¾à¤¯: सारे आसिया में यह कह कहकर इस पौलà¥à¤¸ ने बहà¥à¤¤ लोगोंको समà¤à¤¾à¤¯à¤¾ और à¤à¤°à¤®à¤¾à¤¯à¤¾ à¤à¥€ है, कि जो हाथ की कारीगरी है, वे ईशà¥à¤µà¤° नहीं। 27 और अब केवल इसी à¤à¤• बात का ही डर नहीं, कि हमारे इस धनà¥â€à¤§à¥‡ की पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤·à¥â€à¤ ा जाती रहेगी; बरन यह कि महान देवी अरितमिस का मनà¥â€à¤¦à¤¿à¤° तà¥à¤šà¥â€à¤› समà¤à¤¾ जाà¤à¤—ा और जिस सारा आसिया और जगत पूजता है उसका महतà¥â€à¤µ à¤à¥€ जाता रहेगा। 28 वे यह सà¥à¤¨à¤•à¤° कà¥à¤°à¥‹à¤§ से à¤à¤° गà¤, और चिलà¥à¤²à¤¾ चिलà¥à¤²à¤¾à¤•à¤° कहने लगे, ?इिफिसयोंकी अरितमिस महान है! 29 और सारे नगर में बड़ा कोलाहल मच गया और लोगोंने गयà¥à¤¸ और अरिसà¥â€à¤¤à¤°à¤–à¥à¤¸ मकिदà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚को जो पौलà¥à¤¸ के संगी यातà¥à¤°à¥€ थे, पकड़ लिया, और à¤à¤•à¤¿à¤šà¤¤à¥à¤¤ होकर रंगशाला में दौड़ गà¤à¥¤ 30 जब पौलà¥à¤¸ ने लोगोंके पास à¤à¥€à¤¤à¤° जाना चाहा तो चेलोंने उसे जाने न दिया। 31 आसिया के हाकिमोंमें से à¤à¥€ उसके कई मितà¥à¤°à¥‹à¤‚ने उसके पास कहला à¤à¥‡à¤œà¤¾, और बिनती की, कि रंगशाला में जाकर जोखिम न उठाना। 32 सो कोई कà¥à¤› चिलà¥à¤²à¤¾à¤¯à¤¾, और कोई कà¥à¤›; कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि सà¤à¤¾ में बड़ी गड़बड़ी हो रही यी, और बहà¥à¤¤ से लोग तो यह जानते à¤à¥€ नहीं थे कि हम किस लिथे इकटà¥à¤ े हà¥à¤ हैं। 33 तब उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने सिकनà¥â€à¤¦à¤° को, जिस यहूदियोंने खड़ा किया या, à¤à¥€à¤¡à¤¼ में से आगे बढ़ाया, और सिकनà¥â€à¤¦à¤° हाथ से सैन करके लोगोंके सामà¥à¤¹à¤¨à¥‡ उतà¥à¤¤à¤° दिया चाहता या। 34 परनà¥â€à¤¤à¥ जब उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने जान लिया कि वह यहूदी है, तो सब के सब à¤à¤• शबà¥â€à¤¦ से कोई दो घंटे तक चिलà¥à¤²à¤¾à¤¤à¥‡ रहे, कि इफिसयोंकी अरितमिस महान है। 35 तब नगर के मनà¥â€à¤¤à¥à¤°à¥€ ने लोगोंको शानà¥â€à¤¤ करके कहा; हे इिफिसयों, कौन नहीं जानता, कि इिफिसयोंका नगर बड़ी देवी अरितमिस के मनà¥â€à¤¦à¤¿à¤°, और जà¥à¤¯à¥‚स की ओर से गिरी हà¥à¤ˆ मूरत का टहलà¥à¤† है। 36 सो जब कि इन बातोंका खणà¥â€à¤¡à¤¨ ही नहीं हो सकता, तो उचितà¥à¤¤ है, कि तà¥à¤® चà¥à¤ªà¤•à¥‡ रहो; और बिना सोचे विचारे कà¥à¤› न करो। 37 कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि तà¥à¤® इन मनà¥à¤·à¥à¤¯à¥‹à¤‚को लाठहो, जो न मनà¥â€à¤¦à¤¿à¤° के लूटनेवाले है, और न हमारी देवी के निनà¥â€à¤¦à¤• हैं। 38 यदि देमेतà¥à¤°à¤¿à¤¯à¥à¤¸ और उसके सायी कारीगरोंको किसी से विवाद हो तो कचहरी खà¥à¤²à¥€ है, और हाकिम à¤à¥€ हैं; वे à¤à¤• दूसरे पर नालिश करें। 39 परनà¥â€à¤¤à¥ यदि तà¥à¤® किसी और बात के विषय में कà¥à¤› पूछना चाहते हो, तो नियत सà¤à¤¾ में फैसला किया जाà¤à¤—ा। 40 कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि आज के बलवे के कारण हम पर दोष लगाठजाने का डर है, इसलिथे कि इस का कोई कारण नहीं, सो हम इस à¤à¥€à¤¡à¤¼ के इकटà¥à¤ ा होने का कोई उतà¥à¤¤à¤° न दे सकेंगे। 41 और यह कह के उस ने सà¤à¤¾ को विदा किया।।
1 जब हà¥à¤²à¥à¤²à¤¡à¤¼ यम गया, तो पौलà¥à¤¸ ने चेलोंको बà¥à¤²à¤µà¤¾à¤•à¤° समà¤à¤¾à¤¯à¤¾, और उन से विदा होकर मकिदà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ की और चल दिया। 2 और उस सारे देश में से होकर और उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ बहà¥à¤¤ समà¤à¤¾à¤•à¤°, वह यूनान में आया। 3 जब तीन महीने रहकर जहाज पर सूरिया की ओर जाने पर या, तो यहूदी उस की घात में लगे, इसलिथे उस ने यह सलाह की कि मकिदà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ होकर लोट आà¤à¥¤ 4 बिरीया के रà¥à¤ªà¥à¤°à¥‚स का पà¥à¤¤à¥à¤° सोपतà¥à¤°à¥à¤¸ और यिसà¥â€à¤¸à¤²à¥‚नीकियोंमें से अरिसà¥â€à¤¤à¤°à¥à¤–à¥à¤¸ और सिकà¥à¤¨à¥â€à¤¦à¥à¤¸ और आसिया का तà¥à¤–िकà¥à¤¸ और तà¥à¤°à¥à¤«à¤¿à¤®à¥à¤¸ आसिया तक उसके साय हो लिà¤à¥¤ 5 वे आगे जाकर तà¥à¤°à¥‹à¤†à¤¸ में हमारी बाट जोहते रहे। 6 और हम अखमीरी रोटी के दिनोंके बाअ फिलिपà¥à¤ªà¥€ से जहाज पर चढ़कर पांच दिन में तà¥à¤°à¥‹à¤†à¤¸ में उन के पास पहà¥à¤‚चे, और सात दिन तक वहीं रहे।। 7 सपà¥â€à¤¤à¤¾à¤¹ के पहिले दिन जब हम रोटी तोड़ने के लिथे इकटà¥à¤ े हà¥à¤, तो पौलà¥à¤¸ ने जो दूसरे दिन चले जाने पर या, उन से बातें की, और आधी रात तक बातें करता रहा। 8 जिस अटारी पर हम इकटà¥à¤ े थे, उस में बहà¥à¤¤ दीथे जल रहे थे। 9 और यूतà¥à¤–à¥à¤¸ नाम का à¤à¤• जवान खिड़की पर बैठा हà¥à¤† गहरी नींद से फà¥à¤• रहा या, और जब पौलà¥à¤¸ देर तक बातें करता रहा तो वह नींद के फोके में तीसरी अटारी पर से गिर पड़ा, और मरा हà¥à¤† उठाया गया। 10 परनà¥â€à¤¤à¥ पौलà¥à¤¸ उतरकर उस से लिपट गया, और गले लगाकर कहा; घबराओ नहीं; कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि उसका पà¥à¤°à¤¾à¤£ उसी में है। 11 और ऊपर जाकर रोटी तोड़ी और खाकर इतनी देर तक उन से बातें करता रहा, कि पौ फट गई; फिर वह चला गया। 12 और वे उस लड़के को जीवित ले आà¤, और बहà¥à¤¤ शानà¥â€à¤¤à¤¿ पाई।। 13 हम पहिले से जहाज पर चढ़कर असà¥â€à¤¸à¥à¤¸ को इस विचार से आगे गà¤, कि वहां से हम पौलà¥à¤¸ को चढ़ा लें कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि उस ने यह इसलिथे ठहराया या, कि आप ही पैदल जानेवाला या। 14 जब वह असà¥â€à¤¸à¥à¤¸ में हमें मिला तो हम उसे चढ़ाकर मितà¥à¤²à¥‡à¤¨à¥‡ में आà¤à¥¤ 15 और वहां से जहाज खोलकर हम दूसरे दिन खियà¥à¤¸ के सामà¥à¤¹à¤¨à¥‡ पहà¥à¤‚चे, और अगले दिन सामà¥à¤¸ में लगान किया, फिर दूसरे दिन मीलेतà¥à¤¸ में आà¤à¥¤ 16 कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि पौलà¥à¤¸ ने इफिसà¥à¤¸ के पास से होकर जाने की ठानी यी, कि कहीं à¤à¤¸à¤¾ न हो, कि उसे आसिया में देर लगे; कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि वह जलà¥à¤¦à¥€ करता या, कि यदि हो सके, तो उसे पिनà¥â€à¤¤à¥‡à¤•à¥à¤¸ का दिन यरूशलेम में कटे।। 17 और उस ने मीलेतà¥à¤¸ से इफिसà¥à¤¸ में कहला à¤à¥‡à¤œà¤¾, और कलीसिया के पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨à¥‹à¤‚को बà¥à¤²à¤µà¤¾à¤¯à¤¾à¥¤ 18 जब वे उस के पास आà¤, तो उन से कहा, तà¥à¤® जानते हो, कि पहिले ही दिन से जब मैं आसिया में पहà¥à¤‚चा, मैं हर समय तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥‡ साय किस पà¥à¤°à¤•à¤¾à¤° रहा। 19 अरà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥â€ बड़ी दीनता से, और आंसू बहा बहाकर, और उन पकà¥à¤•à¥€à¤à¤¾à¤“ं में जो यहूदियोंके षडयनà¥â€à¤¤à¥à¤° के कारण मà¥à¤ पर आ पड़ी; मैं पà¥à¤°à¤à¥ की सेवा करता ही रहा। 20 और जो जो बातें तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥‡ लाठकी यीं, उन को बताने और लोगोंके सामà¥à¤¹à¤¨à¥‡ और घर घर सिखाने से कà¤à¥€ न फिफका। 21 बरन यहूदियोंऔर यूनानियोंके सामà¥à¤¹à¤¨à¥‡ गवाही देता रहा, कि परमेशà¥à¤µà¤° की ओर मन फिराना, और हमारे पà¥à¤°à¤à¥ यीशॠमसीह पर विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ करना चाहिà¤à¥¤ 22 और अब देखो, मैं आतà¥à¥˜à¤¾ में बनà¥â€à¤§à¤¾ हà¥à¤† यरूशलेम को जाता हूं, और नहीं जानता, कि वहां मà¥à¤ पर कà¥â€à¤¯à¤¾ कà¥â€à¤¯à¤¾ बीतेगा 23 केवल यह कि पवितà¥à¤° आतà¥à¥˜à¤¾ हर नगर में गवाही दे देकर मà¥à¤ से कहता है, कि बनà¥â€à¤§à¤¨ और कà¥â€à¤²à¥‡à¤¶ तेरे लिथे तैयार है। 24 परनà¥â€à¤¤à¥ मैं अपके पà¥à¤°à¤¾à¤£ को कà¥à¤› नहीं समà¤à¤¤à¤¾: कि उसे पà¥à¤°à¤¿à¤¯ जानूं, बरन यह कि मैं अपकà¥à¤•à¥€ दौड़ को, और उस सेवाकाई को पूरी करूं, जो मैं ने परमेशà¥à¤µà¤° के अनà¥à¤—à¥à¤°à¤¹ के सà¥à¤¸à¤®à¤¾à¤šà¤¾à¤° पर गवाही देने के लिथे पà¥à¤°à¤à¥ यीशॠसे पाई है। 25 और अब देखो, मैं जानता हूं, कि तà¥à¤® सब जिन से मैं परमेशà¥à¤µà¤° के राजà¥à¤¯ का पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤° करता फिरा, मेरा मà¥à¤‚ह फिर न देखोगे। 26 इसलिथे मैं आज के दिन तà¥à¤® से गवाही देकर कहता हूं, कि मैं सब के लोहू से निरà¥à¤¦à¥‹à¤· हूं। 27 कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि मैं परमेशà¥à¤µà¤° की सारी मनसा को तà¥à¤®à¥à¤¹à¥‡à¤‚ पूरी रीति से बनाने से न फिफका। 28 इसलिथे अपकà¥à¤•à¥€ और पूरे फà¥à¤‚ड की चौकसी करो; जिस से पवितà¥à¤° आतà¥à¥˜à¤¾ ने तà¥à¤®à¥à¤¹à¥‡à¤‚ अधà¥à¤¯à¤ ठहराया है; कि तà¥à¤® परमेशà¥à¤µà¤° की कलीसिया की रखवाली करो, जिसे उस ने अपके लोहू से मोल लिया है। 29 मैं जानता हूं, कि मेरे जाने के बाद फाड़नेवाले à¤à¥‡à¤¡à¤¿à¤ तà¥à¤® में आà¤à¤‚गे, जो फà¥à¤‚ड को न छोड़ेंगे। 30 तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥‡ ही बीच में से à¤à¥€ à¤à¤¸à¥‡ à¤à¤¸à¥‡ मनà¥à¤·à¥à¤¯ उठेंगे, जो चेलोंको अपके पीछे खींच लेने को टेढ़ी मेढ़ी बातें कहेंगे। 31 इसलिथे जागते रहो; और सà¥à¥˜à¤°à¤£ करो; कि मैं ने तीन वरà¥à¤· तक रात दिन आंसू बहा बहाकर, हर à¤à¤• को चितौनी देना न छोड़ा। 32 और अब मैं तà¥à¤®à¥à¤¹à¥‡à¤‚ परमेशà¥à¤µà¤° को, और उसके अनà¥à¤—à¥à¤°à¤¹ के वचन को सौंप देता हूं; जो तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥€ उनà¥à¤¨à¤¤à¤¿ कर सकता है, ओशà¥à¤°à¥ सब पवितà¥à¤°à¥‹à¤‚में साफी करके मीरास दे सकता है। 33 मैं ने किसी की चानà¥â€à¤¦à¥€ सोने या कपके का लालच नहीं किया। 34 तà¥à¤® आप ही जानते हो कि इनà¥â€à¤¹à¥€à¤‚ हाथोंने मेरी और मेरे सायियोंकी आवशà¥à¤¯à¤•à¤¤à¤¾à¤à¤‚ पूरी कीं। 35 मैं ने तà¥à¤®à¥à¤¹à¥‡à¤‚ सब कà¥à¤› करके दिखाया, कि इस रीति से परिशà¥à¤°à¥à¤® करते हà¥à¤ निरà¥à¤¬à¤²à¥‹à¤‚को समà¥à¤à¤¾à¤²à¤¨à¤¾, और पà¥à¤°à¤à¥ यीशॠकी बातें सà¥à¥˜à¤°à¤£ रखना अवशà¥à¤¯ है, कि उस ने आप ही कहा है; कि लेने से देना धनà¥à¤¯ है।। 36 यह कहकर उस ने घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ टेके और उन सब के साय पà¥à¤°à¤¾à¤°à¥à¤¯à¤¨à¤¾ की। 37 तब वे सब बहà¥à¤¤ रोठऔर पौलà¥à¤¸ के गले में लिपट कर उसे चूमने लगे। 38 वे विशेष करके इस बात का शोक करते थे, जो उस ने कही यी, कि तà¥à¤® मेरा मà¥à¤‚ह फिर न देखोगे; और उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने उसे जहाज तक पहà¥à¤‚चाया।।
1 जब हम ने उन से अलग होकर जहाज खोला, तो सीधे मारà¥à¤— से कोस में आà¤, और दूसरे दिन रूदà¥à¤¸ में, ओर वहां से पतरा में। 2 और à¤à¤• जहाज फीनीके को जाता हà¥à¤† मिला, और उस पर चढ़कर, उसे खोल दिया। 3 जब कà¥à¤ªà¥à¤°à¥à¤¸ दिखाई दिया, जो हम ने उसे बाà¤à¤‚ हाथ छोड़ा, और सूरिया को चलकर सून में उतरे; कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि वहां जहाज का बोफ उतारना या। 4 और चेलोंको पाकर हम वहां सात दिन तक रहे: उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने आतà¥à¥˜à¤¾ के सिखाठपौलà¥à¤¸ से कहा, कि यरूशलेम में पांव न रखना। 5 जब वे दिन पूरे हो गà¤, तो हम वहां से चल दिà¤; ओर सब सà¥â€à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚और बालकोंसमेत हमें नगर के बाहर तक पहà¥à¤‚चाया और हम ने किनारे पर घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ टेककर पà¥à¤°à¤¾à¤°à¥à¤¯à¤¨à¤¾ की। 6 तब à¤à¤• दूसरे से विदा होकर, हम तो जहाज पर चढ़े, और वे अपके अपके घर लौट गà¤à¥¤à¥¤ 7 जब हम सूर से जलयातà¥à¤°à¤¾ पूरी करके पतà¥à¤²à¤¿à¤®à¤¯à¤¿à¤¸ में पहà¥à¤‚चे, और à¤à¤¾à¤‡à¤¯à¥‹à¤‚को नमसà¥â€à¤•à¤¾à¤° करके उन के साय à¤à¤• दिन रहे। 8 दूसरे दिन हम वहां से चलकर कैसरिया में आà¤, और फिलपà¥â€à¤ªà¥à¤¸ सà¥à¤¸à¤®à¤¾à¤šà¤¾à¤° पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤°à¤• के घर में जो सातोंमें से à¤à¤• या, जाकर उसके यहां रहे। 9 उस की चार कà¥à¤‚वारी पà¥à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ यीं; जो à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯à¤¦à¥à¤µà¤¾à¤£à¥€ करती यीं। 10 जब हम वहां बहà¥à¤¤ दिन रह चà¥à¤•à¥‡, तो अगबà¥à¤¸ नाम à¤à¤• à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯à¤¦à¥à¤µà¤•à¥à¤¤à¤¾ यहूदिया से आया। 11 उस ने हमारे पास आकर पौलà¥à¤¸ का पटका लिया, और अपके हाथ पांव बानà¥â€à¤§à¤•à¤° कहा; पवितà¥à¤° आतà¥à¥˜à¤¾ यह कहता है, कि जिस मनà¥à¤·à¥à¤¯ का यह पटका है, उस को यरूशलेम में यहूदी इसी रीति से बानà¥â€à¤§à¥‡à¤‚गे, और अनà¥à¤¯à¤œà¤¾à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚के हाथ में सौंपेंगे। 12 जब थे बातें सà¥à¤¨à¥€, तो हम और वहां के लोगोंने उस से बिनती की, कि यरूशलेम को न जाà¤à¥¤ 13 परनà¥â€à¤¤à¥ पौलà¥à¤¸ ने उतà¥à¤¤à¤° दिया, कि तà¥à¤® कà¥â€à¤¯à¤¾ करते हो, कि रो रोकर मेरा मन तोड़ते हो, मैं तो पà¥à¤°à¤à¥ यीशॠके नाम के लिथे यरूशलेम में न केवल बानà¥â€à¤§à¥‡ जाने ही के लिथे बरन मरने के लिथे à¤à¥€ तैयार हूं। 14 जब उन से न माना तो हम यह कहकर चà¥à¤ª हो गà¤; कि पà¥à¤°à¤à¥ की इचà¥â€à¤›à¤¾ पूरी हो।। 15 उन दिनोंके बाद हम बानà¥â€à¤§ छानà¥â€à¤§ कर यरूशलेम को चल दिà¤à¥¤ 16 कैसरिया के à¤à¥€ कितने चेले हमारे साय हो लिà¤, और मनासोन नाम कà¥à¤ªà¥à¤°à¥à¤¸ के à¤à¤• पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥‡ चेले को साय ले आà¤, कि हम उसके यहां टिकें।। 17 जब हम यरूशलेम में पहà¥à¤‚चे, तो à¤à¤¾à¤ˆ बड़े आननà¥â€à¤¦ के साय हम से मिले। 18 दूसरे दिन पौलà¥à¤¸ हमें लेकर याकूब के पास गया, जहां सब पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ इकटà¥à¤ े थे। 19 तब उस ने उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ नमसà¥â€à¤•à¤¾à¤° करके, जो जो काम परमेशà¥à¤µà¤° ने उस की सेवकाई के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ अनà¥à¤¯à¤œà¤¾à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚में किठथे, à¤à¤• à¤à¤• करके सब बताया। 20 उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने यह सà¥à¤¨à¤•à¤° परमेशà¥à¤µà¤° की महिमा की, फिर उस से कहा; हे à¤à¤¾à¤ˆ, तू देखता है, कि यहूदियोंमें से कई हजार ने विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ किया है; और सब वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¯à¤¾ के लिथे धà¥à¤¨ लगाठहैं। 21 औशà¥à¤°à¥ उन को तेरे विषय में सिखाया गया है, कि तू अनà¥à¤¯à¤œà¤¾à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚में रहनेवाले यहूदियोंको मूसा से फिर जाने को सिखाया है, और कहता है, कि न अपके बचà¥â€à¤šà¥‹à¤‚का खतना कराओ ओर न रीतियोंपर चलो: सो कà¥â€à¤¯à¤¾ किया जाठ22 लोग अवशà¥à¤¯ सà¥à¤¨à¥‡à¤‚गे, कि तू आया है। 23 इसलिथे जो हम तà¥à¤ से कहते हैं, वह कर: हमारे यहां चार मनà¥à¤·à¥à¤¯ हैं, जिनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने मनà¥à¤¨à¤¤ मानी है। 24 उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ लेकर उस के साय अपके आप को शà¥à¤¦à¥à¤§ कर; और उन के लिथे खरà¥à¤šà¤¾ दे, कि वे सिर मà¥à¤¡à¤¼à¤¾à¤à¤‚: तब सब जान लेगें, कि जो बातें उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ तेरे विषय में सिखाई गईं, उन की कà¥à¤› जड़ नहीं है परनà¥â€à¤¤à¥ तू आप à¤à¥€ वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¯à¤¾ को मानकर उसके अनà¥à¤¸à¤¾à¤° चलता है। 25 परनà¥â€à¤¤à¥ उन अनà¥à¤¯à¤œà¤¾à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚के विषय में जिनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ किया है, हम ने यह निरà¥à¤£à¤¯ करके लिख à¤à¥‡à¤œà¤¾ है कि वे मरतोंके सामà¥à¤¹à¤¨à¥‡ बलि किठहà¥à¤ मांस से, और लोहू से, और गला घोंटे हà¥à¤“ं के मांस से, और वà¥à¤¯à¤à¤¿à¤šà¤¾à¤° से, बचे रहें। 26 तब पौलà¥à¤¸ उन मनà¥à¤·à¥à¤¯à¥‹à¤‚को लेकर, और दूसरे दिन उन के साय शà¥à¤¦à¥à¤§ होकर मनà¥â€à¤¦à¤¿à¤° में गया, और बता दिया, कि शà¥à¤¦à¥à¤§ होने के दिन, अरà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥â€ उन में से हर à¤à¤• के लिथे चढ़ावा चढ़ाठजाने तक के दिन कब पूरे होंगे।। 27 जब वे सात दिन पूरे होने पर थे, तो आसिया के यहूदियोंने पौलà¥à¤¸ को मनà¥â€à¤¦à¤¿à¤° में देखकर सब लोगोंको उसकाया, और योंचिलà¥à¤²à¤¾à¤•à¤° उस को पकड़ लिया। 28 कि हे इसà¥â€à¤¤à¥à¤°à¤¾à¤à¤²à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚, सहाथता करो; यह वही मनà¥à¤·à¥à¤¯ है, जो लोगोंके, और वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¯à¤¾ के, और इस सà¥à¤¯à¤¾à¤¨ के विरोध में हर जगह सब लोगोंको सिखाता है, यहां तक कि यà¥à¤¨à¤¾à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚को à¤à¥€ मनà¥â€à¤¦à¤¿à¤° में लाकर उस ने इस पवितà¥à¤° सà¥à¤¯à¤¾à¤¨ को अपवितà¥à¤° किया है। 29 उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने तो इस से पहिले तà¥à¤°à¥à¤«à¤¿à¤®à¥à¤¸ इफिसी को उसके साय नगर में देखा या, और समà¤à¤¤à¥‡ थे, कि पौलà¥à¤¸ उसे मनà¥â€à¤¦à¤¿à¤° में ले आया है। 30 तब सारे नगर में कोलाहल मच गया, और लोग दौड़कर इकटà¥à¤ े हà¥à¤, और पौलà¥à¤¸ को पकड़कर मनà¥â€à¤¦à¤¿à¤° के बाहर घसीट लाà¤, और तà¥à¤°à¤¨à¥â€à¤¤ दà¥à¤µà¤¾à¤° बनà¥â€à¤¦ किठगà¤à¥¤ 31 जब वे उसके मार डालता चाहते थे, तो पलटन के सारदार को सनà¥â€à¤¦à¥‡à¤¶ पहà¥à¤‚चा कि सारे यरूशलेम में कोलाहल मच रहा है। 32 तब वह तà¥à¤°à¤¨à¥â€à¤¤ सिपाहियोंऔर सूबेदारोंको लेकर उन के पास नीचे दौड़ आया; और उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने पलटन के सरदार को और सिपाहियोंको देख कर पौलà¥à¤¸ को मारने पीटने से हाथ उठाया। 33 तब पलटन के सरदार ने पास आकर उसे पकड़ लिया; और दो जंजीरोंसे बानà¥â€à¤§à¤¨à¥‡ की आजà¥à¤žà¤¾ देकर पूछने लगा, यह कौन है, और इस ने कà¥â€à¤¯à¤¾ किया है 34 परनà¥â€à¤¤à¥ à¤à¥€à¤¡à¤¼ में से कोई कà¥à¤› और कोई कà¥à¤› चिलà¥à¤²à¤¾à¤¤à¥‡ रहे और जब हà¥à¤²à¥à¤²à¤¡à¤¼ के मारे ठीक सचà¥â€à¤šà¤¾à¤ˆ न जान सका, तो उसे गढ़ में ले जाने की आजà¥à¤žà¤¾ दी। 35 जब वह सीढ़ी पर पहà¥à¤‚चा, तो à¤à¤¸à¤¾ हà¥à¤†, कि à¤à¥€à¤¡à¤¼ के दबाव के मारे सिपाहिथें को उसे उठाकर ले जाना पड़ा। 36 कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि लोगोंकी à¤à¥€à¤¡à¤¼ यह चिलà¥à¤²à¤¾à¤¤à¥€ हà¥à¤ˆ उसके पीछे पड़ी, कि उसका अनà¥â€à¤¤ कर दो।। 37 जब वे पौलà¥à¤¸ को गढ़ में ले जाने पर थे, तो उस ने पलटन के सरदार से कहा; कà¥â€à¤¯à¤¾ मà¥à¤à¥‡ आजà¥à¤žà¤¾ है कि मैं तà¥à¤ से कà¥à¤› कहूं उस ने कहा; कà¥â€à¤¯à¤¾ तू यूनानी जानता है 38 कà¥â€à¤¯à¤¾ तू वह मिसरी नहीं, जो इन दिनोंसे पहिले बलवाई बनाकर चार हजार कटारबनà¥â€à¤¦ लोगोंको जंगल में ले गया 39 पौलà¥à¤¸ ने कहा, मैं तो तरसà¥à¤¸ का यहूदी मनà¥à¤·à¥à¤¯ हूं! किलिकिया के पà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤§ नगर का निवासी हूं: और मैं तà¥à¤ से बिनती करता हूं, कि मà¥à¤à¥‡ लोगोंसे बातें करने दे। 40 जब उस ने आजà¥à¤žà¤¾ दी, तो पौलà¥à¤¸ ने सीढ़ी पर खड़े होकर लोगोंको हाथ से सैन किया: जब वे चà¥à¤ª हो गà¤, तो वह इबà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥€ à¤à¤¾à¤·à¤¾ में बोलने लगा, कि,
1 हे à¤à¤¾à¤‡à¤¯à¥‹à¤‚, और पितरो, मेरा पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥à¤¤à¥à¤¤à¤° सà¥à¤¨à¥‹, जो मैं अब तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥‡ सामà¥à¤¹à¤¨à¥‡ कहता हूं।। 2 वे यह सà¥à¤¨à¤•à¤° कि वह हम से इबà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥€ à¤à¤¾à¤·à¤¾ में बोलता है, और à¤à¥€ चà¥à¤ª रहे। तब उस ने कहा; 3 मैं तो यहूदी मनà¥à¤·à¥à¤¯ हूं, जो किलिकिया के तरसà¥à¤¸ में जनà¥à¥˜à¤¾; परनà¥â€à¤¤à¥ इस नगर में गमलीà¤à¤² के पांवोंके पास बैठकर पढ़ाया गया, और बापदादोंकी वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¯à¤¾ की ठीक रीति पर सिखाया गया; और परमेशà¥à¤µà¤° के लिथे à¤à¤¸à¥€ धà¥à¤¨ लगाठया, जैसे तà¥à¤® सब आज लगाठहो। 4 और मैं ने पà¥à¤°à¥‚ष और सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ दोनोंको बानà¥â€à¤§ बानà¥â€à¤§à¤•à¤°, और बनà¥â€à¤¦à¥€à¤—ृह में डाल डालकर, इस पंय को यहां तक सताया, कि उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ मरवा à¤à¥€ डाला। 5 इस बात के लिथे महाथाजक और सब पà¥à¤°à¤¿à¤¨à¤¥à¥‡ गवाह हैं; कि उन में से मैं à¤à¤¾à¤‡à¤¯à¥‹à¤‚के नाम पर चिटà¥à¤ ियां लेकर दिमशà¥â€à¤• को चला जा रहा या, कि जो वहां होंउनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ à¤à¥€ दणà¥â€à¤¡ दिलाने के लिथे बानà¥â€à¤§à¤•à¤° यरूशलेम में लाऊं। 6 जब मैं चलते चलते दिमशà¥â€à¤• के निकट पहà¥à¤‚चा, तो à¤à¤¸à¤¾ हà¥à¤† कि दो पहर के लगà¤à¤— à¤à¤•à¤¾à¤à¤• à¤à¤• बड़ी जà¥à¤¯à¥‹à¤¤à¤¿ आकाश से मेरे चारोंओर चमकी। 7 और मैं à¤à¥‚मि पर गिर पड़ा: और यह शबà¥â€à¤¦ सà¥à¤¨à¤¾, कि हे शाऊल, हे शाऊल, तू मà¥à¤à¥‡ कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚सताता है मैं ने उतà¥à¤¤à¤° दिया, कि हे पà¥à¤°à¤à¥, तू कौन है 8 उस ने मà¥à¤ से कहा; मैं यीशॠनासरी हूं, जिस तू सताता है 9 और मेरे सायियोंने जà¥à¤¯à¥‹à¤¤à¤¿ तो देखी, परनà¥â€à¤¤à¥ जो मà¥à¤ से बोलता या उसका शबà¥â€à¤¦ न सà¥à¤¨à¤¾à¥¤ 10 तब मै। ने कहा; हे पà¥à¤°à¤à¥ मैं कà¥â€à¤¯à¤¾ करूं पà¥à¤°à¤à¥ ने मà¥à¤ से कहा; उठकर दिमशà¥â€à¤• में जा, और जो कà¥à¤¦ तेरे करने के लिथे ठहराया गया है वहां तà¥à¤ से सब कह दिया जाà¤à¤—ा। 11 जब उस जà¥à¤¯à¥‹à¤¤à¤¿ के तेज के मारे मà¥à¤à¥‡ कà¥à¤› दिखाई न दिया, तो मैं अपके सायियोंके हाथ पकड़े हà¥à¤ दिमशà¥â€à¤• में आया। 12 और हननà¥à¤¯à¤¾à¤¹ नाम का वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¯à¤¾ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° à¤à¤• à¤à¤•à¥à¤¤ मनà¥à¤·à¥à¤¯, जो वहां के रहनेवाले सब यहूदियोंमें सà¥à¤¨à¤¾à¤® या, मेरे पास आया। 13 और खड़ा होकर मà¥à¤ से कहा; हे à¤à¤¾à¤ˆ शाऊल फिर देखने लग: उसी घड़ी मेरे नेतà¥à¤° खà¥à¤² गठऔर मैं ने उसे देखा। 14 तब उस ने कहा; हमारे बापदादोंके परमेशà¥à¤µà¤° ने तà¥à¤à¥‡ इसलिथे ठहराया है, कि तू उस की इचà¥â€à¤›à¤¾ को जाने, और उस धरà¥à¤®à¥€ को देखे, और उसके मà¥à¤‚ह से बातें सà¥à¤¨à¥‡à¥¤ 15 कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि तू उस की ओर से सब मनà¥à¤·à¥à¤¯à¥‹à¤‚के सामà¥à¤¹à¤¨à¥‡ उन बातोंका गवाह होगा, जो तू ने देखी और सà¥à¤¨à¥€ हैं। 16 अब कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚देर करता है उठ, बपतिसà¥à¥˜à¤¾ ले, और उसका नाम लेकर अपके पापोंको धो डाल। 17 जब मैं फिर यरूशलेम में आकर मनà¥â€à¤¦à¤¿à¤° में पà¥à¤°à¤¾à¤°à¥à¤¯à¤¨à¤¾ कर रहा या, तो बेसà¥à¤§ हो गया। 18 और उस ने देखा कि मà¥à¤ से कहता है; जलà¥à¤¦à¥€ करके यरूशलेम से फट निकल जा: कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि वे मेरे विषय में तेरी गवाही न मानेंगे। 19 मैं ने कहा; हे पà¥à¤°à¤à¥ वे तो आप जानते हैं, कि मैं तà¥à¤ पर विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ करनेवालोंको बनà¥â€à¤¦à¥€à¤—ृह में डालता और जगह जगह आराधनालय में पिटवाता या। 20 और जब तेरे गवाह सà¥â€à¤¤à¤¿à¤«à¤¨à¥à¤¸ का लोहू बहाथा जा रहा या तब मैं à¤à¥€ वहां खड़ा या, और इस बात में सहमत या, और उसके घातकोंके कपड़ोंकी रखवाली करता या। 21 और उस ने मà¥à¤ से कहा, चला जा: कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि मैं तà¥à¤à¥‡ अनà¥à¤¯à¤œà¤¾à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚के पास दूर दूर à¤à¥‡à¤œà¥‚ंगा।। 22 वे इस बात तक उस की सà¥à¤¨à¤¤à¥‡ रहे; तब ऊंचे शबà¥â€à¤¦ से चिलà¥à¤²à¤¾à¤, कि à¤à¤¸à¥‡ मनà¥à¤·à¥à¤¯ का अनà¥â€à¤¤ करो; उसका जीवित रहता उचित नहीं। 23 जब वे चिलà¥à¤²à¤¾à¤¤à¥‡ और कपके फेंकते और आकाश में धूल उड़ाते थे; 24 तो पलटन के सूबेदार ने कहा; कि इसे गढ़ में ले जाओ; और कोड़े मारकर जांचो, कि मैं जानूं कि लोग किस कारण उसके विरोध में à¤à¤¸à¤¾ चिलà¥à¤²à¤¾ रहे हैं। 25 जब उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने उसे तसमोंसे बानà¥â€à¤§à¤¾ तो पौलà¥à¤¸ ने उस सूबेदार से जो पास खड़ा या कहा, कà¥â€à¤¯à¤¾ यह उचित है, कि तà¥à¤® à¤à¤• रोमी मनà¥à¤·à¥à¤¯ को, और वह à¤à¥€ बिना दोषी ठहराठहà¥à¤ कोड़े मारो 26 सूबेदार ने यह सà¥à¤¨à¤•à¤° पलटन के सरदार के पास जाकर कहा; तू यह कà¥â€à¤¯à¤¾ करता है यह तो रामी है। 27 तब पलटन के सरदार ने उसके पास आकर कहा; मà¥à¤à¥‡ बता, कà¥â€à¤¯à¤¾ तू रोमी है उस ने कहा, हां। 28 यह सà¥à¤¨à¤•à¤° पलटन के सरदार ने कहा; कि मैं ने रोमी होने का पद बहà¥à¤¤ रूपके देकर पाया है: पौलà¥à¤¸ ने कहा, मैं तो जनà¥à¥˜ से रोमी हूं। 29 तब जो लोग उसे जांचने पर थे, वे तà¥à¤°à¤¨à¥â€à¤¤ उसके पास से हट गà¤; और पलटन का सरदार à¤à¥€ यह जानकर कि यह रोमी है, और मैं ने उसे बानà¥â€à¤§à¤¾ है, डर गया।। 30 दूसरे दिन वह ठीक ठीक जानने की इचà¥â€à¤›à¤¾ से कि यहूदी उस पर कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚दोष लगाते हैं, उसके बनà¥â€à¤§à¤¨ खोल दिà¤; और महाथाजकोंऔर सारी महासà¤à¤¾ को इकटà¥à¤ े होने की आजà¥à¤žà¤¾ दी, और पौलà¥à¤¸ को नीचे ले जाकर उन के सामà¥à¤¹à¤¨à¥‡ खड़ा कर दिया।।
1 पौलà¥à¤¸ ने महासà¤à¤¾ की ओर टकटकी लगाकर देखा, और कहा, हे à¤à¤¾à¤‡à¤¯à¥‹à¤‚, मैं ने आज तक परमेशà¥à¤µà¤° के लिथे बिलकà¥à¤² सचà¥â€à¤šà¥‡ विवेक से जीवन बिताया। 2 हननà¥à¤¯à¤¾à¤¹ महाथाजक ने, उन की जो उसके पास खड़े थे, उसके मूंह पर यपà¥â€à¤ªà¤¡à¤¼ मारने की आजà¥à¤žà¤¾ दी। 3 तब पौलà¥à¤¸ ने उस से कहा; हे चूना फिरी हà¥à¤ˆ à¤à¥€à¤¤, परमेशà¥à¤µà¤° तà¥à¤à¥‡ मारेगा: तू वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¯à¤¾ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° मेरा नà¥à¤¯à¤¾à¤¯ करने को बैठा है, और फिर कà¥â€à¤¯à¤¾ वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¯à¤¾ के विरूदà¥à¤§ मà¥à¤à¥‡ मारने की आजà¥à¤žà¤¾ देता है 4 जो पास खड़े थे, उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा, कà¥â€à¤¯à¤¾ तू परमेशà¥à¤µà¤° के महाथाजक को बà¥à¤°à¤¾ कहता है 5 पौलà¥à¤¸ ने कहा; हे à¤à¤¾à¤‡à¤¯à¥‹à¤‚, मैं नहीं जानता या, कि यह महाथाजक है; कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि लिखा है, कि अपके लोगोंके पà¥à¤°à¤§à¤¾à¤¨ को बà¥à¤°à¤¾ न कह। 6 तब पौलà¥à¤¸ ने यह जानकर, कि कितने सदूकी और कितने फरीसी हैं, सà¤à¤¾ में पà¥à¤•à¤¾à¤°à¤•à¤° कहा, हे à¤à¤¾à¤‡à¤¯à¥‹à¤‚, मैं फरीसी और फरीसियोंके वंश का हूं, मरे हà¥à¤“ं ही आशा और पà¥à¤¨à¤°à¥‚तà¥à¤¯à¤¾à¤¨ के विषय में मेरा मà¥à¤•à¤¦à¥à¤¦à¤®à¤¾ हो रहा है। 7 जब उस ने यह बात कही तो फरीसियोंऔर सदूकियोंमें फगड़ा होने लगा; और सà¤à¤¾ में फूट पड़ गई। 8 कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि सदूकी तो यह कहते हैं, कि न पà¥à¤¨à¤°à¥‚तà¥à¤¯à¤¾à¤¨ है, न सà¥â€à¤µà¤°à¥à¤—दूत और न आतà¥à¥˜à¤¾ है; परनà¥â€à¤¤à¥ फरीसी दोनोंको मानते हैं। 9 तब बड़ा हलà¥à¤²à¤¾ मचा और कितने शासà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ जो फरीसियोंके दल के थे, उठकर योंकहकर फगड़ने लगे, कि हम इस मनà¥à¤·à¥à¤¯ में कà¥à¤› बà¥à¤°à¤¾à¤ˆ नहीं पाते; और यदि कोई आतà¥à¥˜à¤¾ या सà¥â€à¤µà¤°à¥à¤—दूत उस से बोला है तो फिर कà¥â€à¤¯à¤¾ 10 जब बहà¥à¤¤ फगड़ा हà¥à¤†, तो पलटन के सरदार ने इस डर से कि वे पौलà¥à¤¸ के टà¥à¤•à¤¡à¤¼à¥‡ टà¥à¤•à¤¡à¤¼à¥‡ न कर डालें पलटन को आजà¥à¤žà¤¾ दी, कि उतरकर उस को उन के बीच में से बरबस निकालो, और गढ़ में ले आओ। 11 उसी रात पà¥à¤°à¤à¥ ने उसके पास आ खड़े होकर कहा; हे पौलà¥à¤¸, ढ़ाढ़स बानà¥â€à¤§; कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि जैसी तू ने यरूशलेम में मेरी गवाही दी, वैसी ही तà¥à¤à¥‡ रोम में à¤à¥€ गवाही देनी होगी।। 12 जब दिन हà¥à¤†, तो यहूदियोंने à¤à¤•à¤¾ किया, और शपय खाई कि जब तक हम पौलà¥à¤¸ को मान न डालें, तब तक खांठया पीà¤à¤‚ तो हम पर धिकà¥à¤•à¤¾à¤°à¤¨à¥‡à¥¤ 13 जिनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने आपस में यह शपय खाई यी, वे चालीस जनोंके ऊपर थे। 14 उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने महाथाजकोंऔर पà¥à¤°à¤¿à¤¨à¤¯à¥‹à¤‚के पास आकर कहा, हम ने यह ठाना है; कि जब तक हम पौलà¥à¤¸ को मार न डालें, तब तक यदि कà¥à¤› चखें à¤à¥€, तो हम पर धिकà¥à¤•à¤¾à¤°à¤¨à¥‡ पर धिकà¥à¤•à¤¾à¤°à¤¨à¥‡ है। 15 इसलिथे अब महासà¤à¤¾ समेत पलटन के सरदार को समà¤à¤¾à¤“, कि उसे तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥‡ पास ले आà¤, मानो कि तà¥à¤® उसके विषय में और à¤à¥€ ठीक जांच करना चाहते हो, और हम उसके पहà¥à¤‚चने से पहिले ही उसे मार डालने के लिथे तैयार रहेंगे। 16 और पौलà¥à¤¸ के à¤à¤¾à¤‚जे न सà¥à¤¨à¤¾, कि वे उस की घात में हैं, तो गढ़ में जाकर पौलà¥à¤¸ को सनà¥â€à¤¦à¥‡à¤¶ दिया। 17 पौलà¥à¤¸ ने सूबेदारोंमें से à¤à¤• को अपके पास बà¥à¤²à¤¾à¤•à¤° कहा; इस जवान को पलटन के सरदार के पास ले जाओ, यह उस से कà¥à¤› कहना चाहता है। 18 सो उस ने उसको पलटन के सरदार के पास ले जाकर कहा; पौलà¥à¤¸ बनà¥â€à¤§à¥à¤ ने मà¥à¤à¥‡ बà¥à¤²à¤¾à¤•à¤° बिनती की, कि यह जवान पलटन के सरदार से कà¥à¤› कहना चाहता है; उसे उसके पास ले जा। 19 पलटन के सरदार ने उसका हाथ पकड़कर, और अलग ले जाकर पूछा; मà¥à¤ से कà¥â€à¤¯à¤¾ कहना चाहता है 20 उस ने कहा; यहूदियोंने à¤à¤•à¤¸à¤¾ किया है, कि तà¥à¤ से बिनती करें, कि कल पौलà¥à¤¸ को महासà¤à¤¾ में लाà¤, मानो तू और ठीक से उस की जांच करना चाहता है। 21 परनà¥â€à¤¤à¥ उन की मत मानना, कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि उन में से चालीस के ऊपर मनà¥à¤·à¥à¤¯ उस की घात में हैं, जिनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने यह ठान लिया है, कि जब तक हम पौलà¥à¤¸ को मान न डालें, तब तक खाà¤à¤‚, पीà¤à¤‚, तो हम पर धिकà¥à¤•à¤¾à¤°à¤¨à¥‡; और अà¤à¥€ वे तैयार हैं और तेरे वचन की आस देख रहे हैं। 22 तब पलटन के सरदार ने जवान को यह आजà¥à¤žà¤¾ देकर विदा किया, कि किसी से न कहना कि तू ने मà¥à¤ को थे बातें बताई हैं। 23 और दो सूबेदारोंको बà¥à¤²à¤¾à¤•à¤° कहा; दो सौ सिपाही, सतà¥à¤¤à¤° सवार, और दो सौ à¤à¤¾à¤²à¥ˆà¤¤, पहर रात बीते कैसरिया को जाने के लिथे तैयार कर रखो। 24 और पौलà¥à¤¸ की सवारी के लिथे घोड़े तैयार रखो कि उसे फेलिकà¥â€à¤¸ हाकिम के पास कà¥à¤¶à¤² से पहà¥à¤‚चा दें। 25 उस ने इस पà¥à¤°à¤•à¤¾à¤° की चिटà¥à¤ ी à¤à¥€ लिखी; 26 महापà¥à¤°à¤¤à¤¾à¤ªà¥€ फेलिकà¥â€à¤¸ हाकिम को कà¥â€à¤²à¥Œà¤¦à¤¿à¤¯à¥à¤¸ लूसियास को नमसà¥â€à¤•à¤¾à¤°; 27 इस मनà¥à¤·à¥à¤¯ को यहूदियोंने पकड़कर मार डालता चाहा, परनà¥â€à¤¤à¥ जब मैं ने जाना कि रोमी है, तो पलटन लेकर छà¥à¤¡à¤¼à¤¾ लाया। 28 और मैं जानना चाहता या, कि वे उस पर किस कारण दोष लगाते हैं, इसलिथे उसे उन की महासà¤à¤¾ में ले गया। 29 तब मैं ने जान लिया, कि वे अपकà¥à¤•à¥€ वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¯à¤¾ के विवादोंके विषय में उस पर दोष लगाते हैं, परनà¥â€à¤¤à¥ मार डाले जाने या बानà¥â€à¤§à¥‡ जाने के योगà¥à¤¯ उस में कोई दोष नहीं। 30 और जब मà¥à¤à¥‡ बताया गया, कि वे इस मनà¥à¤·à¥à¤¯ की घात में लगे हैं तो मैं ने तà¥à¤°à¤¨à¥â€à¤¤ उस को तेरे पास à¤à¥‡à¤œ दिया; और मà¥à¤¦à¥à¤¦à¤‡à¤¯à¥‹à¤‚को à¤à¥€ आजà¥à¤žà¤¾ दी, कि तेरे सामà¥à¤¹à¤¨à¥‡ उस पर नालिश करें।। 31 सो जैसे सिपाहियोंको आजà¥à¤žà¤¾ दी गई यी वैसे ही पौलà¥à¤¸ को लेकर रातों-रात अनà¥â€à¤¤à¤¿à¤ªà¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¸ में लाà¤à¥¤ 32 दूसरे दिन वे सवारोंको उसके साय जाने के लिथे छोड़कर आप गढ़ को लौटे। 33 उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने कैसरिया में पहà¥à¤‚चकर हाकिम को चिटà¥à¤ ी दी: और पौलà¥à¤¸ को à¤à¥€ उसके सामà¥à¤¹à¤¨à¥‡ खड़ा किया। 34 उस ने पढ़कर पूछा यह किस देश का है 35 और जब जान लिया कि किलकिया का है; तो उस से कहा; जब तेरे मà¥à¤¦à¥à¤¦à¤ˆ à¤à¥€ आà¤à¤—ें, तो मैं तेरा मà¥à¤•à¤¦à¥à¤¦à¤®à¤¾ करूंगा: और उस ने उसे हेरोदेस के किले में, पहरे में रखने की आजà¥à¤žà¤¾ दी।।
1 पांच दिन के बाद हननà¥à¤¯à¤¾à¤¹ महाथाजक कई पà¥à¤°à¤¿à¤¨à¤¯à¥‹à¤‚और तिरतà¥à¤²à¥à¤²à¥à¤¸ नाम किसी वकील को साय लेकर आया; उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने हाकिम के सामà¥à¤¹à¤¨à¥‡ पौलà¥à¤¸ पर नालिश की। 2 जब वह बà¥à¤²à¤¾à¤¯à¤¾ गया तो तिरतà¥à¤²à¥à¤²à¥à¤¸ उन पर दोष लगाकर कहने लगा, कि, हे महापà¥à¤°à¤¤à¤¾à¤ªà¥€ फेलिकà¥â€à¤¸, तेरे दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ हमें जो बड़ा कà¥à¤¶à¤² होता है; और तेरे पà¥à¤°à¤¬à¤¨à¥â€à¤§ से इस जाति के लिथे कितनी बà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤¯à¤¾à¤‚ सà¥à¤§à¤°à¤¤à¥€ जाती हैं। 3 इस को हम हर जगह और हर पà¥à¤°à¤•à¤¾à¤° से धनà¥à¤¯à¤µà¤¾à¤¦ के साय मानते हैं। 4 परनà¥â€à¤¤à¥ इसलिथे कि तà¥à¤à¥‡ और दà¥à¤– नहीं देना चाहता, मैं तà¥à¤ से बिनती करता हूं, कि कृपा करके हमारी दो à¤à¤• बातें सà¥à¤¨ ले। 5 कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि हम ने इस मनà¥à¤·à¥à¤¯ को उपदà¥à¤°à¤µà¥€ और जगत के सारे यहूदियोंमें बलवा करानेवाला, और नासरियोंके कà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¯ का मà¥à¤–िया पाया है। 6 उस ने मनà¥â€à¤¦à¤¿à¤° को अशà¥à¤¦à¥à¤§ करना चाहा, और हम ने उसे पकड़ा। 7 इन सब बातोंको जिन के विषय में हम उस पर दोष लगाते हैं, तू आपकà¥à¤•à¥€ उस को जांच करके जान लेगा। 8 यहूदियोंने à¤à¥€ उसका साय देकर कहा, थे बातें इसी पà¥à¤°à¤•à¤¾à¤° की हैं।। 9 जब हाकिम ने पौलà¥à¤¸ को बोलने के लिथे सैन किया तो उस ने उतà¥à¤¤à¤° दिया, मैं यह जानकर कि तू बहà¥à¤¤ वरà¥à¤·à¥‹à¤‚से इस जाति का नà¥à¤¯à¤¾à¤¯ करता है, आननà¥â€à¤¦ से अपना पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥à¤¤à¥à¤¤à¤° देता हूं। 10 तू आप जान सकता है, कि जब से मैं यरूशलेम में à¤à¤œà¤¨ करने को आया, मà¥à¤à¥‡ बारह दिन से ऊपर नहीं हà¥à¤à¥¤ 11 और उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने मà¥à¤à¥‡ न मनà¥â€à¤¦à¤¿à¤° में न सà¤à¤¾ के घरोंमें, न नगर में किसी से विवाद करते या à¤à¥€à¤¡à¤¼ लगाते पाया। 12 और न तो वे उन बातोंको, जिन का वे अब मà¥à¤ पर दोष लगाते हैं, तेरे सामà¥à¤¹à¤¨à¥‡ सच ठहरा सकते हैं। 13 परनà¥â€à¤¤à¥ यह मैं तेरे सामà¥à¤¹à¤¨à¥‡ सच ठहरा सकते हैं। 14 परनà¥â€à¤¤à¥ यह मैं तेरे सामà¥à¤¹à¤¨à¥‡ मान लेता हूं, कि जिस पनà¥à¤¯ को वे कà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¯ कहते हैं, उसी की रीति पर मैं अपके बापदादोंके परमेशà¥à¤µà¤° की सेवा करता हूं: और जो बातें वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¯à¤¾ और à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯à¤¦à¥à¤µà¤•à¥à¤¤à¤¾à¤“ं की पà¥à¤¸à¥â€à¤¤à¤•à¥‹à¤‚में लिखी है, उन सब की पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤¤à¤¿ करता हूं। 15 और परमेशà¥à¤µà¤° से आशा रखता हूं जो वे आप à¤à¥€ रखते हैं, कि धरà¥à¤®à¥€ और अधरà¥à¤®à¥€ दोनोंका जी उठना होगा। 16 इस से मैं आप à¤à¥€ यतन करता हूं, कि परमेशà¥à¤µà¤° की, और मनà¥à¤·à¥à¤¯à¥‹à¤‚की ओर मेरा विवेक सदा निरà¥à¤¦à¥‹à¤· रहे। 17 बहà¥à¤¤ वरà¥à¤·à¥‹à¤‚के बाद मैं अपके लोगोंको दान पहà¥à¤‚चाने, और à¤à¥‡à¤‚ट चढ़ाने आया या। 18 उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने मà¥à¤à¥‡ मनà¥â€à¤¦à¤¿à¤° में, शà¥à¤¦à¥à¤§ दशा में बिना à¤à¥€à¤¡à¤¼ के साय, और बिना दंगा करते हà¥à¤ इस काम में पाया - हां आसिया के कई यहूदी थे - उन को उचित या, 19 कि यदि मेरे विरोध में उन की कोई बात हो तो यहां तेरे सामà¥à¤¹à¤¨à¥‡ आकर मà¥à¤ पर दोष लगाते। 20 या थे आप ही कहें, कि जब मैं महासà¤à¤¾ के सामà¥à¤¹à¤¨à¥‡ खड़ा या, तो उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने मà¥à¤ से कौन सा अपराध पाया 21 इस à¤à¤• बात को छोड़ जो मैं ने उन के बीच में खड़े होकर पà¥à¤•à¤¾à¤°à¤•à¤° कहा या, कि मरे हà¥à¤“ं के जी उठने के विषय में आज मेरा तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥‡ सामà¥à¤¹à¤¨à¥‡ मà¥à¤•à¤¦à¥à¤¦à¤®à¤¾ हो रहा है।। 22 फेलिकà¥â€à¤¸ ने जो इस पनà¥à¤¯ की बातें ठीक ठीक जानता या, उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ यह कहकर टाल दिया, कि जब पलटन का सरदार लूसियास आà¤à¤—ा, तो तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥€ बात का निरà¥à¤£à¤¯ करूंगा। 23 और सूबेदार को आजà¥à¤žà¤¾ दी, कि पौलà¥à¤¸ को सà¥à¤– से रखकर रखवाली करना, और उसके मितà¥à¤°à¥‹à¤‚में से किसी को à¤à¥€ उस की सेवा करने से न रोकना।। 24 कितने दिनोंके बाद फेलिकà¥â€à¤¸ अपकà¥à¤•à¥€ पतà¥â€à¤¨à¥€ दà¥à¤°à¥à¤¸à¤¿à¤²à¥à¤²à¤¾ को, जो यहूदिनी यी, साय लेकर आया; और पौलà¥à¤¸ को बà¥à¤²à¤µà¤¾à¤•à¤° उस विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ के विषय में जे मसीह यीशॠपर है, उस से सà¥à¤¨à¤¾à¥¤ 25 और जब वह धरà¥à¤® और संयम और आनेवाले नà¥à¤¯à¤¾à¤¯ की चरà¥à¤šà¤¾ करता या, तो फेलिकà¥â€à¤¸ ने à¤à¤¯à¤®à¤¾à¤¨ होकर उतà¥à¤¤à¤° दिया, कि अà¤à¥€ तो जा: अवसर पाकर मैं तà¥à¤à¥‡ फिर बà¥à¤²à¤¾à¤Šà¤‚गा। 26 उसे पौलà¥à¤¸ से कà¥à¤› रूपके मिलने की à¤à¥€ आस यी; इसलिथे और à¤à¥€ बà¥à¤²à¤¾ बà¥à¤²à¤¾à¤•à¤° उस से बातें किया करता या। 27 परनà¥â€à¤¤à¥ जब दो वरà¥à¤· बीत गà¤, तो पà¥à¤°à¤¿à¤•à¤¯à¥à¤¸ फेसà¥â€à¤¤à¥à¤¸ फेलिकà¥â€à¤¸ की जगह पर आया, और फेलिकà¥â€à¤¸ यहूदियोंको खà¥à¤¶ करने की इचà¥â€à¤›à¤¾ से पौलà¥à¤¸ को बनà¥â€à¤§à¥à¤† छोड़ गया।।
1 फेसà¥â€à¤¤à¥à¤¸ उन पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥â€à¤¤ में पहà¥à¤‚चकर तीन दिन के बार कैसरिया से यरूशलेम को गया। 2 तब महाथाजकोंने, और यहूदियोंके बड़े लोगोंने, उसके सामà¥à¤¹à¤¨à¥‡ पौलà¥à¤¸ की नालिश की। 3 और उसे से बिनती करके उसके विरोध में यह बर चाहा, कि वह उसे यरूशलेम में बà¥à¤²à¤µà¤¾à¤, कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि वे उसे रासà¥â€à¤¤à¥‡ ही में मार डालने की घात लगाठहà¥à¤ थे। 4 फेसà¥â€à¤¤à¥à¤¸ ने उतà¥à¤¤à¤° दिया, कि पौलà¥à¤¸ कैसरिया में पहरे में है, और मैं आप जलà¥à¤¦ वहां आऊंगा। 5 फिर कहा, तà¥à¤® से जो अधिकà¥à¤•à¤¾à¤°à¤¨à¥‡ रखते हैं, वे साय चलें, और यदि इस मनà¥à¤·à¥à¤¯ ने कà¥à¤› अनà¥à¤šà¤¿à¤¤ काम किया है, तो उस पर दोष लगाà¤à¤‚।। 6 और उन के बीच कोई आठदस दिन रहकर वह कैसरिया गया: और दूसरे दिन नà¥à¤¯à¤¾à¤¯ आसन पर बैठकर पौलà¥à¤¸ के लाने की आजà¥à¤žà¤¾ दी। 7 जब वह आया, तो जो यहूदी यरूशलेम से आठथे, उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने आस पास खड़े होकर उस पर बहà¥à¤¤à¥‡à¤°à¥‡ à¤à¤¾à¤°à¥€ दोष लगाà¤, जिन का पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£ वे नहीं दे सकते थे। 8 परनà¥â€à¤¤à¥ पौलà¥à¤¸ ने उतà¥à¤¤à¤° दिया, कि मैं ने न तो यहूदियोंकी वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¯à¤¾ का और न मनà¥â€à¤¦à¤¿à¤° का, और न कैसर का कà¥à¤› अपराध किया है। 9 तब फेसà¥â€à¤¤à¥à¤¸ ने यहूदियोंको खà¥à¤¶ करने की इचà¥â€à¤›à¤¾ से पौलà¥à¤¸ को उतà¥à¤¤à¤° दिया, कà¥â€à¤¯à¤¾ तू चाहता है कि यरूशलेम को जाà¤; और वहां मेरे सामà¥à¤¹à¤¨à¥‡ तेरा यह मà¥à¤•à¤¦à¥à¤¦à¤®à¤¾ तय किया जाठ10 पौलà¥à¤¸ ने कहा; मैं कैसर के नà¥à¤¯à¤¾à¤¯ आसन के सामà¥à¤¹à¤¨à¥‡ खड़ा हूं: मेरे मà¥à¤•à¤¦à¥à¤¦à¤®à¥‡à¤‚ का यहीं फैसला होना चाहिà¤: जैसा तू अचà¥â€à¤›à¥€ तरह जानता है, यहूदियोंका मैं ने कà¥à¤› अपराध नहीं किया। 11 यदि अपराधी हूं और मार डाले जाने योगà¥à¤¯ कोई काम किया है; तो मरने से नहीं मà¥à¤•à¤°à¤¤à¤¾; परनà¥â€à¤¤à¥ जिन बातोंका थे मà¥à¤ पर दोष लगाते हैं, यदि उन में से कोई बात सच न ठहरे, तो कोई मà¥à¤à¥‡ उन के हाथ नहीं सौंप सकता: मैं कैसर की दोहाई देता हूं। 12 तब फेसà¥â€à¤¤à¥à¤¸ ने मनà¥â€à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚की सà¤à¤¾ के साय बातें करके उतà¥à¤¤à¤° दिया, तू ने कैसर की दोहाई दी है, तू कैसर के पास जाà¤à¤—ा।। 13 और कà¥à¤› दिन बीतने के बाद अगà¥à¤°à¤¿à¤ªà¥â€à¤ªà¤¾ राजा और बिरनीके ने कैसरिया में आकर फेसà¥â€à¤¤à¥à¤¸ से à¤à¥‡à¤‚ट की। 14 और उन के बहà¥à¤¤ दिन वहां रहने के बाद फेसà¥â€à¤¤à¥à¤¸ ने पौलà¥à¤¸ की कया राजा को बताई; कि à¤à¤• मनà¥à¤·à¥à¤¯ है, जिसे फेलिकà¥â€à¤¸ बनà¥â€à¤§à¥à¤† छोड़ गया है। 15 जब मैं यरूशलेम में या, तो महाथाजक और यहूदियोंके पà¥à¤°à¤¿à¤¨à¤¯à¥‹à¤‚ने उस की नालिश की; और चाहा, कि उस पर दणà¥â€à¤¡ की आजà¥à¤žà¤¾ दी जाà¤à¥¤ 16 परनà¥â€à¤¤à¥ मैं ने उन को उतà¥à¤¤à¤° दिया, कि रोमियोंकी यह रीति नहीं, कि किसी मनà¥à¤·à¥à¤¯ को दणà¥â€à¤¡ के लिथे सौंप दें, जब तक मà¥à¤¦à¥à¤¦à¤¾à¤…लैह को अपके मà¥à¤¦à¥à¤¦à¤‡à¤¯à¥‹à¤‚के आमने सामने खड़े होकर दोष के उतà¥à¤¤à¤° देने का अवसर न मिले। 17 सो जब वे यहां इकटà¥à¤ े हà¥à¤, तो मैं ने कà¥à¤› देर न की, परनà¥â€à¤¤à¥ दूसरे ही दिन नà¥à¤¯à¤¾à¤¯ आसन पर बैठकर, उस मनà¥à¤·à¥à¤¯ को लाने की आजà¥à¤žà¤¾ दी। 18 जब उसके मà¥à¤¦à¥à¤¦à¤ˆ खड़े हà¥à¤, तो उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने à¤à¤¸à¥€ बà¥à¤°à¥€ बातोंका दोष नहीं लगाया, जैसा मैं समà¤à¤¤à¤¾ या। 19 परनà¥â€à¤¤à¥ अपके मत के, और यीशॠनाम किसी मनà¥à¤·à¥à¤¯ के विषय में जो मर गया या, और पौलà¥à¤¸ उस को जीवित बताता या, विवाद करते थे। 20 और मैं उलफन में या, कि इन बातोंका पता कैसे लगाऊं इसलिथे मैं ने उस से पूछा, कà¥â€à¤¯à¤¾ तू यरूशलेम जाà¤à¤—ा, कि वहां इन बातोंका फैसला हो 21 परनà¥â€à¤¤à¥ जब पौलà¥à¤¸ ने दोहाई दी, कि मेरे मà¥à¤•à¤¦à¥à¤¦à¤®à¥‡à¤‚ का फैसला महाराजाधिराज के यहां हो; तो मैं ने आजà¥à¤žà¤¾ दी, कि जब तक उसे कैसर के पास न à¤à¥‡à¤œà¥‚ं, उस की रखवाली की जाà¤à¥¤ 22 तब अगà¥à¤°à¤¿à¤ªà¥â€à¤ªà¤¾ ने फेसà¥â€à¤¤à¥à¤¸ से कहा, मैं à¤à¥€ उस मनà¥à¤·à¥à¤¯ की सà¥à¤¨à¤¨à¤¾ चाहता हूं: उस ने कहा, तू कल सà¥à¤¨ लेगा।। 23 सो दूसरे दिन, जब अगà¥à¤°à¤¿à¤ªà¥â€à¤ªà¤¾ और बिरनीके बड़ी धूमधाम से आकर पलटन के सरदारोंऔर नगर के बड़े लोगोंके साय दरबार में पहà¥à¤‚चे, तो फेसà¥â€à¤¤à¥à¤¸ ने आजà¥à¤žà¤¾ दी, कि वे पौलà¥à¤¸ को ले आà¤à¤‚। 24 फेसà¥â€à¤¤à¥à¤¸ ने कहा; हे महाराजा अगà¥à¤°à¤¿à¤ªà¥â€à¤ªà¤¾, और हे सब मनà¥à¤·à¥à¤¯à¥‹à¤‚जो यहां हमारे साय हो, तà¥à¤® इस मनà¥à¤·à¥à¤¯ को देखते हो, जिस के विषय में सारे यहूदियोंने यरूशलेम में और यहां à¤à¥€ चिलà¥à¤²à¤¾ चिलà¥à¤²à¤¾à¤•à¤° मà¥à¤ से बिनती की, कि इस का जीवित रहना उचित नहीं। 25 परनà¥â€à¤¤à¥ मैं ने जान लिया, कि उस ने à¤à¤¸à¤¾ कà¥à¤› नहीं किया कि मार डाला जाà¤; और जब कि उस ने आप ही महाराजाधिराज की दोहाई दी, तो मैं ने उसे à¤à¥‡à¤œà¤¨à¥‡ का उपाय निकाला। 26 परनà¥â€à¤¤à¥ मैं ने उसके विषय में कोई ठीक बात नहीं पाई कि अपके सà¥â€à¤µà¤¾à¤®à¥€ के पास लिखूं, इसलिथे मैं उसे तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥‡ सामà¥à¤¹à¤¨à¥‡ और विशेष करके हे महाराजा अगà¥à¤°à¤¿à¤ªà¥â€à¤ªà¤¾ तेरे सामà¥à¤¹à¤¨à¥‡ लाया हूं, कि जांचने के बाद मà¥à¤à¥‡ कà¥à¤› लिखने को मिले। 27 कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि बनà¥â€à¤§à¥à¤ को à¤à¥‡à¤œà¤¨à¤¾ और जो दोष उस पर लगाठगà¤, उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ न बताना, मà¥à¤à¥‡ वà¥à¤¯à¤°à¥à¤¯ समठपड़ता है।।
1 अगà¥à¤°à¤¿à¤ªà¥â€à¤ªà¤¾ ने पौलà¥à¤¸ से कहा; तà¥à¤à¥‡ अपके विषय में बोलने की आजà¥à¤žà¤¾ है: तब पौलà¥à¤¸ हाथ बढ़ाकर उतà¥à¤¤à¤° देने लगा, कि, 2 हे राजा अगà¥à¤°à¤¿à¤ªà¥â€à¤ªà¤¾, जितनी बातोंका यहूदी मà¥à¤ पर दोष लगाते हैं, आज तेरे सामà¥à¤¹à¤¨à¥‡ उन का उतà¥à¤¤à¤° देने में मैं अपके को धनà¥à¤¯ समà¤à¤¤à¤¾ हूं। 3 विशेष करके इसलिथे कि तू यहूदियोंके सब वà¥à¤¯à¤µà¤¹à¤¾à¤°à¥‹à¤‚और विवादोंको जानता है, सो मैं बिनती करता हूं, धीरज से मेरी सà¥à¤¨ ले। 4 जैसा मेरा चाल चलन आरमà¥à¤ से अपकà¥à¤•à¥€ जाति के बीच और यरूशलेम में या, यह सब यहूदी जानते हैं। 5 वे यदि गवाही देना चाहते हैं, तो आरमà¥à¤ से मà¥à¤à¥‡ पहिचानते हैं, कि मैं फरीसी होकर अपके धरà¥à¤® के सब से खरे पनà¥à¤¯ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° चला। 6 और अब उस पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤œà¥à¤žà¤¾ की आशा के कारण जो परमेशà¥à¤µà¤° ने हमारे बापदादोंसे की यी, मà¥à¤ पर मà¥à¤•à¤¦à¥à¤¦à¤®à¤¾ चल रहा है। 7 उसी पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤œà¥à¤žà¤¾ के पूरे होने की आशा लगाठहà¥à¤, हमारे बारहोंगोतà¥à¤° अपके सारे मन से रात दिन परमेशà¥à¤µà¤° की सेवा करते आठहैं: हे राजा, इसी आशा के विषय में यहूदी मà¥à¤ पर दोष लगाते हैं। 8 जब कि परमेशà¥à¤µà¤° मरे हà¥à¤“ं को जिलाता है, तो तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥‡ यहां यह बात कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ के योगà¥à¤¯ नहीं समà¤à¥€ जाती 9 मैं ने à¤à¥€ समà¤à¤¾ या कि यीशॠनासरी के नाम के विरोध में मà¥à¤à¥‡ बहà¥à¤¤ कà¥à¤› करना चाहिà¤à¥¤ 10 और मैं ने यरूशलेम में à¤à¤¸à¤¾ ही किया; और महाथाजकोंसे अधिकà¥à¤•à¤¾à¤°à¤¨à¥‡ पाकर बहà¥à¤¤ से पवितà¥à¤° लोगोंको बनà¥â€à¤¦à¥€à¤—ृह में डाल, और जब वे मार डाले जाते थे, तो मैं à¤à¥€ उन के विरोध में अपकà¥à¤•à¥€ समà¥à¤ªà¤¤à¤¿ देता या। 11 और हर आराधनालय में मैं उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ ताड़ना दिला दिलाकर यीशॠकी निनà¥â€à¤¦à¤¾ करवाता या, यहां तक कि कà¥à¤°à¥‹à¤§ के मारे à¤à¤¸à¤¾ पागल हो गया, कि बाहर के नगरोंमें à¤à¥€ जाकर उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ सताता या। 12 इसी धà¥à¤¨ में जब मैं महाथाजकोंसे अधिकà¥à¤•à¤¾à¤°à¤¨à¥‡ और परवाना लेकर दिमशà¥â€à¤• को जा रहा या। 13 तो हे राजा, मारà¥à¤— में दोपहर के समय मैं ने आकाश से सूरà¥à¤¯ के तेज से à¤à¥€ बढ़कर à¤à¤• जà¥à¤¯à¥‹à¤¤à¤¿ अपके और अपके साय चलनेवालोंके चारोंओर चमकती हà¥à¤ˆ देखी। 14 और जब हम सब à¤à¥‚मि पर गिर पके, तो मैं ने इबà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥€ à¤à¤¾à¤·à¤¾ में, मà¥à¤ से यह कहते हà¥à¤ यह शबà¥â€à¤¦ सà¥à¤¨à¤¾, कि हे शाऊल, हे शाऊल, तू मà¥à¤à¥‡ कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚सताता है पैने पर लात मारना तेरे लिथे किठन है। 15 मैं ने कहा, हे पà¥à¤°à¤à¥ तू कौन है पà¥à¤°à¤à¥ ने कहा, मैं यीशॠहूं: जिसे तू सताता है। 16 परनà¥â€à¤¤à¥ तू उठ, अपके पांवोंपर खड़ा हो; कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि मैं ने तà¥à¤à¥‡ इसलिथे दरà¥à¤¶à¤¨ दिया है, कि तà¥à¤à¥‡ उन बातोंपर à¤à¥€ सेवक और गवाह ठहराऊं, जो तू ने देखी हैं, और उन का à¤à¥€ जिन के लिथे मैं तà¥à¤à¥‡ दरà¥à¤¶à¤¨ दूंगा। 17 और मैं तà¥à¤à¥‡ तेरे लोगोंसे और अनà¥à¤¯à¤œà¤¾à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚से बचाता रहूंगा, जिन के पास मैं अब तà¥à¤à¥‡ इसलिथे à¤à¥‡à¤œà¤¤à¤¾ हूं। 18 कि तू उन की आंखे खोले, कि वे अंधकार से जà¥à¤¯à¥‹à¤¤à¤¿ की ओर, और शैतान के अधिकà¥à¤•à¤¾à¤°à¤¨à¥‡ से परमेशà¥à¤µà¤° की ओर फिरें; कि पापोंकी à¤à¤®à¤¾, और उन लोगोंके साय जो मà¥à¤ पर विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ करने से पवितà¥à¤° किठगठहैं, मीरास पाà¤à¤‚। 19 सो हे राजा अगà¥à¤°à¤¿à¤ªà¥â€à¤ªà¤¾, मैं ने उस सà¥â€à¤µà¤°à¥à¤—ीय दरà¥à¤¶à¤¨ की बात न टाली। 20 परनà¥â€à¤¤à¥ पहिले दिमशà¥â€à¤• के, फिर यरूशलेम के रहनेवालोंको, तब यहूदिया के सारे देश में और अनà¥à¤¯à¤œà¤¾à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚को समà¤à¤¾à¤¤à¤¾ रहा, कि मन फिराओ और परमेशà¥à¤µà¤° की ओर फिर कर मन फिराव के योगà¥à¤¯ काम करो। 21 इन बातोंके कारण यहूदी मà¥à¤à¥‡ मनà¥â€à¤¦à¤¿à¤° में पकड़के मार डालने का यतà¥â€à¤¨ करते थे। 22 सो परमेशà¥à¤µà¤° की सहाथता से मैं आज तक बना हूं और छोटे बड़े सà¤à¥€ के सामà¥à¤¹à¤¨à¥‡ गवाही देता हूं और उन बातोंको छोड़ कà¥à¤› नहीं कहता, जो à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯à¤¦à¥à¤µà¤•à¥à¤¤à¤¾à¤“ं और मूसा ने à¤à¥€ कहा कि होनेवाली हैं। 23 कि मसीह को दà¥à¤– उठाना होगा, और वही सब से पहिले मरे हà¥à¤“ं में से जी उठकर, हमारे लोगोंमें और अनà¥à¤¯à¤œà¤¾à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚में जà¥à¤¯à¥‹à¤¤à¤¿ का पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤° करेगा।। 24 जब वह इस रीति से उतà¥à¤¤à¤° दे रहा या, तो फेसà¥â€à¤¤à¥à¤¸ ने ऊंचे शबà¥â€à¤¦ से कहा; हे पौलà¥à¤¸, तू पागल है: बहà¥à¤¤ विदà¥à¤¯à¤¾ ने तà¥à¤à¥‡ पागल कर दिया है। 25 परनà¥â€à¤¤à¥ उस ने कहा; हे महापà¥à¤°à¤¤à¤¾à¤ªà¥€ फेसà¥â€à¤¤à¥à¤¸, मैं पागल नहीं, परनà¥â€à¤¤à¥ सचà¥â€à¤šà¤¾à¤ˆ और बà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿ की बातें कहता हूं। 26 राजा à¤à¥€ जिस के सामà¥à¤¹à¤¨à¥‡ मैं निडर होकर बोल रहा हूं, थे बातें जानता है, और मà¥à¤à¥‡ पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤¤à¤¿ है, कि इन बातोंमें से कोई उस से छिपी नहीं, कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि उस घटना तो कोने में नहीं हà¥à¤ˆà¥¤ 27 हे राजा अगà¥à¤°à¤¿à¤ªà¥â€à¤ªà¤¾, कà¥â€à¤¯à¤¾ तू à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯à¤¦à¥à¤µà¤•à¥à¤¤à¤¾à¤“ं की पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤¤à¤¿ करता है हां, मैं जानता हूं, कि तू पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤¤à¤¿ करता है। 28 अब अगà¥à¤°à¤¿à¤ªà¥â€à¤ªà¤¾ ने पौलà¥à¤¸ से कहा तू योड़े ही समà¤à¤¾à¤¨à¥‡ से मà¥à¤à¥‡ मसीही बनाना चाहता है 29 पौलà¥à¤¸ ने कहा, परमेशà¥à¤µà¤° से मेरी पà¥à¤°à¤¾à¤°à¥à¤¯à¤¨à¤¾ यह है कि कà¥â€à¤¯à¤¾ योड़े में, कà¥â€à¤¯à¤¾ बहà¥à¤¤ में, केवल तू ही नहीं, परनà¥â€à¤¤à¥ जितने लोग आज मेरी सà¥à¤¨à¤¤à¥‡ हैं, इन बनà¥â€à¤§à¤¨à¥‹à¤‚को छोड़ वे मेरे समान हो जाà¤à¤‚।। 30 तब राजा और हाकिम और बिरनीके और उन के साय बैठनेवाले उठखड़े हà¥à¤à¥¤ 31 और अलग जाकर आपस में कहने लगे, यह मनà¥à¤·à¥à¤¯ à¤à¤¸à¤¾ तो कà¥à¤› नहीं करता, जो मृतà¥à¤¯à¥ या बनà¥â€à¤§à¤¨ के योगà¥à¤¯ हो। 32 अगà¥à¤°à¤¿à¤ªà¥â€à¤ªà¤¾ ने फेसà¥â€à¤¤à¥à¤¸ से कहा; यदि यह मनà¥à¤·à¥à¤¯ कैसर की दोहाई न देता, तो दूट सकता या।।
1 जब यह ठहराया गया, कि हम जहाज पर इतालिया को जाà¤à¤‚, तो उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने पौलà¥à¤¸ और कितने और बनà¥â€à¤§à¥à¤“ं को à¤à¥€ यूलियà¥à¤¸ नाम औगà¥à¤¸à¥â€à¤¤à¥à¤¸ की पलटन के à¤à¤• सूबेदार के हाथ सौंप दिया। 2 और अदà¥à¤°à¤®à¥à¤¤à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥à¤® के à¤à¤• जहाज पर जो आसिया के किनारे की जगहोंमें जाने पर या, चढ़कर हम ने उसे खोल दिया, और अरिसà¥â€à¤¤à¤°à¥à¤–à¥à¤¸ नाम यिसà¥â€à¤¸à¤²à¥à¤¨à¥€à¤•à¥‡ का à¤à¤• मकिदूनी हमारे साय या। 3 दूसरे दिन हम ने सैदा में लंगर डाला और यूलियà¥à¤¸ ने पौलà¥à¤¸ पर कृपा करके उसे मितà¥à¤°à¥‹à¤‚के यहां जाने दिया कि उसका सतà¥â€à¤•à¤¾à¤° किया जाà¤à¥¤ 4 वहां से जहाज खोलकर हवा विरूदà¥à¤§ होने के कारण हम कà¥à¤ªà¥à¤°à¥à¤¸ की आड़ में होकर चले। 5 और किलिकिया और पंफूलिया के निकट के समà¥à¤¦à¥à¤° में होकर लूसिया के मूरा में उतरे। 6 वहां सूबेदार को सिकनà¥â€à¤¦à¤¿à¤°à¤¯à¤¾ का à¤à¤• जहाज इतालिया जाता हà¥à¤† मिला, और उस ने हमें उस पर चढ़ा दिया। 7 और जब हम बहà¥à¤¤ दिनोंतक धीरे धीरे चलकर किठनता से किनदà¥à¤¸ के सामà¥à¤¹à¤¨à¥‡ पहà¥à¤‚चे, तो इसलिथे कि हवा हमें आगे बढ़ने न देती यी, सलमोने के सामà¥à¤¹à¤¨à¥‡ से होकर कà¥à¤°à¥‡à¤¤à¥‡ की आड़ में चले। 8 और उसके किनारे किनारे किठनता से चलकर शà¥à¤ लंगरबारी नाम à¤à¤• जगह पहà¥à¤‚चे, जहां से लसया नगर निकट या।। 9 जब बहà¥à¤¤ दिन बीत गà¤, और जल यातà¥à¤°à¤¾ में जाखिम इसलिथे होती यी कि उपवास के दिन अब बीत चà¥à¤•à¥‡ थे, तो पौलà¥à¤¸ ने उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ यह कहकर समà¤à¤¾à¤¯à¤¾à¥¤ 10 कि हे सजà¥à¥›à¤¨à¥‹ मà¥à¤à¥‡ à¤à¤¸à¤¾ जान पड़ता है, कि इस यातà¥à¤°à¤¾ में बिपतà¥à¤¤à¤¿ और बहà¥à¤¤ हानि न केवल माल और जहाज की बरन हमारे पà¥à¤°à¤¾à¤£à¥‹à¤‚की à¤à¥€ होनेवाली है। 11 परनà¥â€à¤¤à¥ सूबेदार ने पौलà¥à¤¸ की बातोंसे मांफी और जहाज के सà¥â€à¤µà¤¾à¤®à¥€ की बढ़कर मानी। 12 और वह बनà¥â€à¤¦à¤° सà¥à¤¯à¤¾à¤¨ जाड़ा काटने के लिथे अचà¥â€à¤›à¤¾ न या; इसलिथे बहà¥à¤¤à¥‹à¤‚का विचार हà¥à¤†, कि वहां से जहाज खोलकर यदि किसी रीति से हो सके, तो फीनिकà¥â€à¤¸ में पहà¥à¤‚चकर जाड़ा काटें: यह तो कà¥à¤°à¥‡à¤¤à¥‡ का à¤à¤• बनà¥â€à¤¦à¤° सà¥à¤¯à¤¾à¤¨ है जो दकà¥â€à¤–िन-पचà¥â€à¤›à¤¿à¤® और उतà¥à¤¤à¤°-पचà¥â€à¤›à¤¿à¤® की ओर खà¥à¤²à¤¤à¤¾ है। 13 जब कà¥à¤› कà¥à¤› दकà¥â€à¤–िनी हवा बहने लगी, तो यह समà¤à¤•à¤° कि हमारा मतलब पूरा हो गया, लंगर उठाया और किनारा धरे हà¥à¤ कà¥à¤°à¥‡à¤¤à¥‡ के पास से जाने लगे। 14 परनà¥â€à¤¤à¥ योड़ी देर में वहां से à¤à¤• बड़ी आंधी उठी, जो यूरकà¥à¤²à¥€à¤¨ कहलाती है। 15 जब यह जहाज पर लगी, तब वह हवा के सामà¥à¤¹à¤¨à¥‡ ठहर न सका, सो हम ने उसे बहने दिया, और इसी तरह बहते हà¥à¤ चले गà¤à¥¤ 16 तब कौदा नाम à¤à¤• छोटे से टापू की आड़ में बहते बहते हम किठनता से डोंगी को वश मे कर सके। 17 मलà¥à¤²à¤¾à¤¹à¥‹à¤‚ने उसे उठाकर, अनेक उपाय करके जहाज को नीचे से बानà¥â€à¤§à¤¾, और सà¥à¤°à¤¿à¤¤à¤¸ के चोरबालू पर टिक जाने के à¤à¤¯ से पाल और सामान उतार कर, बहते हà¥à¤ चले गà¤à¥¤ 18 और जब हम ने आंधी से बहà¥à¤¤ हिचकोले और ध?े खाà¤, तो दूसरे दिन वे जहाज का माल फेंकने लगे। और तीसरे दिन उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने अपके हाथोंसे जहाज का सामान फेंक दिया। 19 और तीसरे दिन उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने अपके हाथोंसे जहाज का सामान फेंक दिया। 20 और जब बहà¥à¤¤ दथें तक न सूरà¥à¤¯ न तारे दिखाई दिà¤, और बड़ी आंधी चल रही यी, तो अनà¥â€à¤¤ में हमारे बचने की सारी आशा जाती रही। 21 जब वे बहà¥à¤¤ उपवास कर चà¥à¤•à¥‡, तो पौलà¥à¤¸ ने उन के बीच में खड़ा होकर कहा; हे लोगो, चाहिठया कि तà¥à¤® मेरी बात मानकर, कà¥à¤°à¥‡à¤¤à¥‡ से न जहाज खोलते और न यह बिपत और हाति उठाते। 22 परनà¥â€à¤¤à¥ अब मैं तà¥à¤®à¥à¤¹à¥‡à¤‚ समà¤à¤¾à¤¤à¤¾ हूं, कि ढाढ़स बानà¥â€à¤§à¥‹; कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि तà¥à¤® में से किसी के पà¥à¤°à¤¾à¤£ की हानि न होगी, केवल जहाज की। 23 कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि परमेशà¥à¤µà¤° जिस का मैं हूं, और जिस की सेवा करता हूं, उसके सà¥â€à¤µà¤°à¥à¤—दूत ने आज रात मेरे पास आकर कहा। 24 हे पौलà¥à¤¸, मत डर; तà¥à¤à¥‡ कैसर के सामà¥à¤¹à¤¨à¥‡ खड़ा होना अवशà¥à¤¯ है: और देख, परमेशà¥à¤µà¤° ने सब को जो तेरे साय यातà¥à¤°à¤¾ करते हैं, तà¥à¤à¥‡ दिया है। 25 इसलिथे, हे सजà¥à¥›à¤¨à¥‹à¤‚ढाढ़स बानà¥â€à¤§à¥‹à¤‚; कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि मैं परमेशà¥à¤µà¤° की पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤¤à¤¿ करता हूं, कि जैसा मà¥à¤ से कहा गया है, वैसा ही होगा। 26 परनà¥â€à¤¤à¥ हमें किसी टापू पर जा टिकना होगा।। 27 जब चौदहवीं रात हà¥à¤ˆ, और हम अदà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ समà¥à¤¦à¥à¤° में टकराते फिरते थे, तो आधी रात के निकट मलà¥à¤²à¤¾à¤¹à¥‹à¤‚ने अटकल से जाना, कि हम किसी देश के निकट पहà¥à¤‚च रहे हैं। 28 और याह लेकर उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने बीस पà¥à¤°à¤¸à¤¾ गहरा पाया और योड़ा आगे बढ़कर फिर याह ली, तो पनà¥â€à¤¦à¥à¤°à¤¹ पà¥à¤°à¤¸à¤¾ पाया। 29 तब पतà¥à¤¯à¤°à¥€à¤²à¥€ जगहोंपर पड़ने के डर से उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने जहाज की पिछाड़ी चार लंगर डाले, और à¤à¥‹à¤° का होना मनाते रहे। 30 परनà¥â€à¤¤à¥ जब मलà¥à¤²à¤¾à¤¹ जहाज पर से à¤à¤¾à¤—ना चाहते थे, और गलही से लंगर डालने के बहाने डोंगी समà¥à¤¦à¥à¤° में उतार दी। 31 तो पौलà¥à¤¸ ने सूबेदार और सिपाहियोंसे कहा; यदि थे जहाज पर न रहें, तो तà¥à¤® नहीं बच सकते। 32 तब सिपाहियोंने रसà¥â€à¤¸à¥‡ काटकर डोंगी गिरा दो। 33 जब à¤à¥‹à¤° होने पर या, तो पौलà¥à¤¸ ने यह कहके, सब को à¤à¥‹à¤œà¤¨ करने को समà¤à¤¾à¤¯à¤¾, कि आज चौदह दिन हà¥à¤ कि तà¥à¤® आस देखते देखते à¤à¥‚खे रहे, और कà¥à¤› à¤à¥‹à¤œà¤¨ न किया। 34 इसलिथे तà¥à¤®à¥à¤¹à¥‡à¤‚ समà¤à¤¾à¤¤à¤¾ हूं; कि कà¥à¤› खा लो, जिस से तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¤¾ बचाव हो; कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि तà¥à¤® में से किसी के सिर पर à¤à¤• बाल à¤à¥€ न गिरेगा। 35 और यह कहकर उस ने रोटी लेकर सब के सामà¥à¤¹à¤¨à¥‡ परमेशà¥à¤µà¤° का धनà¥à¤¯à¤µà¤¾à¤¦ किया; और तोड़कर खाने लगा। 36 तब वे सब à¤à¥€ ढाढ़स बानà¥â€à¤§à¤•à¤° à¤à¥‹à¤œà¤¨ करने लगे। 37 हम सब मिलकर जहाज पर दो सौ छिहतà¥à¤¤à¤° जन थे। 38 जब वे à¤à¥‹à¤œà¤¨ करके तृपà¥â€à¤¤ हà¥à¤, तो गेंहू को समà¥à¤¦à¥à¤° में फेंक कर जहाज हलà¥à¤•à¤¾ करने लगे। 39 जब बिहान हà¥à¤†, तो उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने उस देश को नहीं पहिचाना, परनà¥â€à¤¤à¥ à¤à¤• खाड़ी देखी जिस का चौरस किनारा या, और विचार किया, कि यदि हो सके, तो इसी पर जहाज को टिकाà¤à¤‚। 40 तब उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने लंगरोंको खोलकर समà¥à¤¦à¥à¤° में छोड़ दिया और उसी समय पतवारोंके बनà¥â€à¤§à¤¨ खोल दिà¤, और हवा के सामà¥à¤¹à¤¨à¥‡ अगला पाल चढ़ाकर किनारे की ओर चले। 41 परनà¥â€à¤¤à¥ दो समà¥à¤¦à¥à¤° के संगम की जगह पड़कर उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने जहाज को टिकाया, और गलही तो ध?ा खाकर गड़ गई, और टल न सकी; परनà¥â€à¤¤à¥ पिछाड़ी लहरोंके बल से टूटने लगी। 42 तब सिपाहियोंको विचार हà¥à¤†, कि बनà¥â€à¤§à¥à¤“ं को मार डालें; à¤à¤¸à¤¾ न हो, कि कोई तैरके निकल à¤à¤¾à¤—े। 43 परनà¥â€à¤¤à¥ सूबेदार ने पौलà¥à¤¸ को बचाने को इचà¥â€à¤›à¤¾ से उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ इस विचार से रोका, और यह कहा, कि जो तैर सकते हैं, पहिले कूदकर किनारे पर निकल जाà¤à¤‚। 44 और बाकी कोई पटरोंपर, और कोई जहाज की और वसà¥â€à¤¤à¥à¤“ं के सहारे निकल जाà¤, और इस रीति से सब कोई à¤à¥‚मि पर बच निकले।।
1 जब हम बच निकले, तो जाना कि यह टापू मिलिते कहलाता है। 2 और उन जंगली लोगोंने हम पर अनोखी कृपा की; कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि मेंह के कारण जो बरस रहा या और जाड़े के कारण उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने आग सà¥à¤²à¤—ाकर हम सब को ठहराया। 3 जब पौलà¥à¤¸ ने लकिडय़ोंका गटà¥à¤ ा बटोरकर आग पर रखा, तो à¤à¤• सांप आंच पाकर निकला और उसके हाथ से लिपट गया। 4 जब उन जंगलियोंने सांप को उसके हाथ में लटके हà¥à¤ देखा, तो आपस में कहा; सचमà¥à¤š यह मनà¥à¤·à¥à¤¯ हतà¥à¤¯à¤¾à¤°à¤¾ है, कि यदà¥à¤¯à¤ªà¤¿ समà¥à¤¦à¥à¤° से बच गया, तौà¤à¥€ नà¥à¤¯à¤¾à¤¯ ने जीवित रहने न दिया। 5 तब उस ने सांप को आग में फटक दिया, और उसे कà¥à¤› हानि न पहà¥à¤‚ची। 6 परनà¥â€à¤¤à¥ वे बाट जोहते थे, कि वह सूज जाà¤à¤—ा, या à¤à¤•à¤¾à¤à¤• गिरके मर जाà¤à¤—ा, परनà¥â€à¤¤à¥ जब वे बहà¥à¤¤ देर तक देखते रहे, और देखा, कि उसका कà¥à¤› à¤à¥€ नहीं बिगड़ा, तो और ही विचार कर कहा; यह तो कोई देवता है।। 7 उस जगह के आसपास पà¥à¤¬à¤²à¤¿à¤¯à¥à¤¸ नाम उस टापू के पà¥à¤°à¤§à¤¾à¤¨ की à¤à¥‚मि यी: उस ने हमें अपके घर ले जाकर तीन दिन मितà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ से पहà¥à¤¨à¤¾à¤ˆ की। 8 पà¥à¤¬à¤²à¤¿à¤¯à¥à¤¸ का पिता जà¥â€à¤µà¤° और आंव लोहू से रोगी पड़ा या: सो पौलà¥à¤¸ ने उसके पास घर में जाकर पà¥à¤°à¤¾à¤°à¥à¤¯à¤¨à¤¾ की, और उस पर हाथ रखकर उसे चंगा किया। 9 जब à¤à¤¸à¤¾ हà¥à¤†, तो उस टापू के बाकी बीमार आà¤, और चंगे किठगà¤à¥¤ 10 और उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने हमारा बहà¥à¤¤ आदर किया, और जब हम चलने लगे, तो जो कà¥à¤› हमें अवशà¥à¤¯ या, जहाज पर रख दिया।। 11 तीन महीने के बाद हम सिकनà¥â€à¤¦à¤¿à¤°à¤¯à¤¾ के à¤à¤• जहाज पर चल निकले, जो उस टापू में जाड़े à¤à¤° रहा या; और जिस का चिनà¥â€à¤¹ दियà¥à¤¸à¤•à¥‚री या। 12 सà¥à¤°à¤•à¥‚सा में लंगर डाल करके हम तीन दिन टिके रहे। 13 वहां से हम घूमकर रेगियà¥à¤® में आà¤: और à¤à¤• दिन पà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥à¤²à¥€ में आà¤à¥¤ 14 वहां हम को à¤à¤¾à¤ˆ मिले, और उन के कहने से हम उन के यहां सात दिन तक रहे; और इस रीति से रोम को चले। 15 वहां से à¤à¤¾à¤ˆ हमारा समाचार सà¥à¤¨à¤•à¤° अपà¥â€à¤ªà¤¿à¤¯à¥à¤¸ के चौक और तीन-सराठतक हमारी à¤à¥‡à¤‚ट करने को निकल आठजिनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ देखकर पौलà¥à¤¸ ने परमेशà¥à¤µà¤° का धनà¥à¤¯à¤µà¤¾à¤¦ किया, और ढाढ़स बानà¥â€à¤§à¤¾à¥¤à¥¤ 16 जब हम रोम में पहà¥à¤‚चे, तो पौलà¥à¤¸ को à¤à¤• सिपाही के साय जो उस की रखवाली करता या, अकेले रहने की आजà¥à¤žà¤¾ हà¥à¤ˆà¥¤à¥¤ 17 तीन दिन के बाद उस ने यहूदियोंके बड़े लोगोंको बà¥à¤²à¤¾à¤¯à¤¾, और जब वे इकटà¥à¤ े हà¥à¤ तो उन से कहा; हे à¤à¤¾à¤‡à¤¯à¥‹à¤‚, मैं ने अपके लोगोंके या बापदादोंके वà¥à¤¯à¤µà¤¹à¤¾à¤°à¥‹à¤‚के विरोध में कà¥à¤› à¤à¥€ नहीं किया, तौà¤à¥€ बनà¥â€à¤§à¥à¤† होकर यरूशलेम से रोमियोंके हाथ सौंपा गया। 18 उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने मà¥à¤à¥‡ जांच कर छोड़ देना चाहा, कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि मà¥à¤ में मृतà¥à¤¯à¥ के योगà¥à¤¯ कोई दोष न या। 19 परनà¥â€à¤¤à¥ जब यहूदी इस के विरोध में बोलने लगे, तो मà¥à¤à¥‡ कैसर की दोहाई देनी पड़ी: न यह कि मà¥à¤à¥‡ अपके लागोंपर कोई दोष लगाना या। 20 इसलिथे मैं ने तà¥à¤® को बà¥à¤²à¤¾à¤¯à¤¾ है, कि तà¥à¤® से मिलूं और बातचीत करूं; कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि इसà¥â€à¤¤à¥à¤°à¤¾à¤à¤² की आशा के लिथे मैं इस जंजीर से जकड़ा हà¥à¤† हूं। 21 उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने उस से कहा; न हम ने तेरे विषय में यहूदियोंसे चिटà¥à¤ ियां पाईं, और न à¤à¤¾à¤‡à¤¯à¥‹à¤‚में से किसी ने आकर तेरे विषय में कà¥à¤› बताया, और न बà¥à¤°à¤¾ कहा। 22 परनà¥â€à¤¤à¥ तेरा विचार कà¥â€à¤¯à¤¾ है वही हम तà¥à¤ से सà¥à¤¨à¤¨à¤¾ चाहते हैं, कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि हम जानते हैं, कि हर जगह इस मत के विरोध में लोग बातें कहते हैं।। 23 तब उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने उसके लिथे à¤à¤• दिन ठहराया, और बहà¥à¤¤ लोग उसके यहां इकटà¥à¤ े हà¥à¤, और वह परमेशà¥à¤µà¤° के राजà¥à¤¯ की गवाही देता हà¥à¤†, और मूसा की वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¯à¤¾ और à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯à¤¦à¥à¤µà¤•à¥à¤¤à¤¾à¤“ं की पà¥à¤¸à¥â€à¤¤à¤•à¥‹à¤‚से यीशॠके विषय में समà¤à¤¾ समà¤à¤¾à¤•à¤° à¤à¥‹à¤° से सांफ तक वरà¥à¤£à¤¨ करता रहा। 24 तब कितनोंने उन बातोंको मान लिया, और कितनोंने पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤¤à¤¿ न की। 25 जब आपस में à¤à¤• मत न हà¥à¤, तो पौलà¥à¤¸ के इस à¤à¤• बात के कहने पर चले गà¤, कि पवितà¥à¤° आतà¥à¥˜à¤¾ ने यशायाह à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯à¤¦à¥à¤µà¤•à¥à¤¤à¤¾ के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥‡ बापदादोंसे अचà¥â€à¤›à¤¾ कहा, कि जाकर इन लोगोंसे कह। 26 कि सà¥à¤¨à¤¤à¥‡ तो रहोगे, परनà¥â€à¤¤à¥ न समà¤à¥‹à¤—े, और देखते तो रहोगे, परनà¥â€à¤¤à¥ न बà¥à¤«à¥‹à¤—े। 27 कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि इन लोगोंका मन मोटा, और उन के कान à¤à¤¾à¤°à¥€ हो गà¤, और उनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने अपकà¥à¤•à¥€ आंखें बनà¥â€à¤¦ की हैं, à¤à¤¸à¤¾ न हो कि वे कà¤à¥€ आंखोंसे देखें, और कानोंसे सà¥à¤¨à¥‡à¤‚, और मन से समà¤à¥‡à¤‚ और फिरें, और मैं उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ चंगा करूं। 28 सो तà¥à¤® जानो, कि परमेशà¥à¤µà¤° के इस उदà¥à¤§à¤¾à¤° की कया अनà¥à¤¯à¤œà¤¾à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚के पास à¤à¥‡à¤œà¥€ गई है, और वे सà¥à¤¨à¥‡à¤‚गे। 29 जब उस ने यह कहा तो यहूदी आपस में बहà¥à¤¤ विवाद करने लगे और वहां से चले गà¤à¥¤à¥¤ 30 और वह पूरे दो वरà¥à¤· अपके à¤à¤¾à¤¡à¤¼à¥‡ के घर में रहा। 31 और जो उसके पास आते थे, उन सब से मिलता रहा और बिना रोक टोक बहà¥à¤¤ निडर होकर परमेशà¥à¤µà¤° के राजà¥à¤¯ का पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤° करता और पà¥à¤°à¤à¥ यीशॠमसीह की बातें सिखाता रहा।।